रक्षा तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख भारतीय कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड ने भारतीय रक्षा बाजार में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वायु सेना (IAF) ने स्वदेशी प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट (IPREK) कार्यक्रम के तहत अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को प्राइम डेवलपमेंट Agency के रूप में सूचीबद्ध और चयनित किया है। इस रणनीतिक चयन के साथ ही कंपनी ने भारत के प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन (PGM) यानी सटीक मार करने वाले सैन्य हथियारों के क्षेत्र में अपनी आधिकारिक शुरुआत कर दी है।
प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन सेक्टर में रणनीतिक प्रवेश
प्रिसिजन रेंज एक्सटेंशन किट (IPREK) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायु सेना के पास मौजूद पुराने और सामान्य हथियारों को आधुनिक तकनीक से लैस करना है। यह किट एक वोल्ट-ऑन प्रिसिजन गाइडेंस प्रणाली है, जिसे भारतीय वायु सेना के 500 किलोग्राम वाले अनगाइडेड जनरल पर्पज (GP) बमों में फिट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस किट के लगने के बाद साधारण बम लंबी दूरी तक सटीक निशाना लगाने वाले ग्लाइड हथियारों में बदल जाते हैं।
यह पूरा प्रोजेक्ट रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP-2020) के तहत संचालित किया जा रहा है। DAP-2020 भारतीय रक्षा खरीद का एक बेहद प्रगतिशील ढांचा है, जिसके माध्यम से निजी रक्षा कंपनियों को अपनी लागत पर उन्नत सैन्य प्रणालियों के डिजाइन और विकास में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके तहत कंपनियां अपने स्वयं के अनुसंधान और विकास संसाधनों का उपयोग करके नई सैन्य तकनीकों का निर्माण करती हैं।
स्वदेशी रक्षा निर्माण और वायु सेना का भरोसा
इस चयन पर प्रतिक्रिया देते हुए अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह सूचीबद्धता केवल एक व्यावसायिक प्रोजेक्ट हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह भारतीय वायु सेना द्वारा कंपनी की उस क्षमता पर लगाया गया आधिकारिक भरोसा है, जिसके तहत वह भारतीय धरती पर ही विश्वस्तरीय प्रिसिजन गाइडेड वेपन सिस्टम को डिजाइन, विकसित और डिलीवर कर सकती है।
कंपनी के अनुसार, इस कदम से रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में उच्च स्तरीय तकनीक का निर्माण संभव हो सकेगा। 500 किलोग्राम के बमों को लंबी दूरी के ग्लाइड हथियारों में बदलकर वायु सेना अपनी आक्रामक क्षमता को बिना नया भारी-भरकम बजट खर्च किए कई गुना बढ़ा सकती है।
शेयर बाजार में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का प्रदर्शन
घोषणा के बावजूद, बीएसई (BSE) पर मंगलवार को अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का शेयर 3.82 प्रतिशत गिरकर 377.95 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के दौरान शेयर ने 392.65 रुपये का intraday उच्च स्तर और 375.00 रुपये का intraday निचला स्तर छुआ। इस स्तर पर कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 14,044.60 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
कंपनी के शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 466.70 रुपये प्रति शेयर रहा है, जो उसने 3 जुलाई 2026 को हासिल किया था। वहीं, इसका 52 हफ्तों का निचला स्तर 162.25 रुपये प्रति शेयर रहा, जो 28 जुलाई 2025 को दर्ज किया गया था। वित्तीय मापदंडों की बात करें तो कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 14.21 प्रतिशत है।
मल्टीबैगर रिटर्न और लंबी अवधि का ट्रैक रिकॉर्ड
शॉर्ट-टर्म में शेयर भाव में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने लंबी अवधि के निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। साल 2026 में अब तक इस रक्षा शेयर ने लगभग 37 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। वहीं, पिछले तीन वर्षों के आंकड़े देखें तो इस मल्टीबैगर स्टॉक ने अपने निवेशकों को लगभग 587 प्रतिशत का भारी-भरकम रिटर्न प्रदान किया है। रक्षा क्षेत्र में सरकार के स्वदेशीकरण के जोर और नए ऑर्डर्स के बल पर कंपनी का आधार मजबूत बना हुआ है।



















