अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती ने कई प्रमुख वैश्विक करेंसियों की रफ्तार थाम रखी है, जिसमें कनाडाई डॉलर विशेष रूप से सुस्त नजर आ रहा है। बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर मैकलेम के हालिया बयानों से ब्याज दरों की आगामी दिशा को लेकर जारी बहस में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। उनके विचार केंद्रीय बैंक के हालिया नीतिगत बयान के बिल्कुल अनुरूप रहे हैं, जिसमें व्यापारिक तनाव और लगातार बनी हुई महंगाई के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन साधने का प्रयास किया गया था। बाजार विश्लेषक मान रहे हैं कि नीतिगत सख्ती का विकल्प अभी पूरी तरह खुला हुआ है, लेकिन दरों के सटीक रुख को समझने के लिए अक्टूबर में आने वाले नीतिगत फैसले का इंतजार करना पड़ेगा।
कनाडाई मुद्रा और मुद्रास्फीति का संवेदनशील गणित
विदेशी मुद्रा बाजार में कनाडाई डॉलर में आई मामूली गिरावट से महंगाई के मोर्चे पर आंशिक जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि सितंबर की शुरुआत के बाद से कनाडाई मुद्रा में गिरावट बहुत ज्यादा बड़ी नहीं रही है, और बैंक ऑफ कनाडा आम तौर पर मुद्रा के उतार-चढ़ाव का महंगाई पर पड़ने वाले असर को सीमित और देरी से आने वाला मानता है। इसके बावजूद, नीति निर्माताओं के लिए चिंता की बात यह है कि मुद्रास्फीति वर्तमान में 3 प्रतिशत के करीब अटकी हुई है। यदि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2 प्रतिशत पर होता तो स्थिति अलग होती, लेकिन 3 प्रतिशत के स्तर पर नीति निर्माता मुद्रा के कमजोर रुझान को लेकर कहीं अधिक संवेदनशील रुख अपना रहे हैं।
व्यापारिक घटनाक्रम और कमोडिटी आपूर्ति
इस बीच, व्यापारिक और राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बेलारूस के बीच पोटाश आयात को लेकर चर्चा में आया संभावित समझौता निकट भविष्य में व्यावहारिक रूप लेता नहीं दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बेलारूस के पास वर्तमान में कोई अतिरिक्त निर्यात क्षमता उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते इस समझौते से तुरंत किसी बड़े बदलाव की उम्मीद बेहद कम है। तकनीकी स्तर पर अमेरिकी डॉलर को इंट्राडे और दैनिक ट्रेंड संकेतकों से निरंतर सहारा मिल रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर के लिए शुरुआती समर्थन स्तर 1.3900 से 1.3915 के दायरे में बना हुआ है।
एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं का प्रदर्शन
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी उठापटक स्पष्ट देखी गई है। मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी हासिल करने में सफल रही। इस उछाल को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के कड़े बयानों से समर्थन मिला। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत दृष्टिकोण ने अमेरिकी डॉलर के सकारात्मक रुख को बरकरार रखा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके अलावा, इसी हफ्ते होने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की महत्वपूर्ण बैठक पर भी बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा कदम
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.50 के स्तर के करीब मामूली बढ़त दर्ज करती नजर आई। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने येन की गिरावट को थामने में मदद की है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्च स्तर पर की गई नरम ब्याज दर वृद्धि ने येन पर दबाव बनाए रखा। बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो बाजार की लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों के अनुरूप रहा।
सोने में गिरावट और वाशिंगटन शिखर सम्मेलन पर नजर
डॉलर के मजबूत रुख का सीधा असर कीमती धातुओं पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगातार दूसरे सत्र में गिरावट दर्ज करते हुए 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया, हालांकि बाद में इसमें आंशिक स्थिरता देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को लगातार मजबूती मिल रही है, जिससे सोने पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अब पूरे बाजार की नजरें वाशिंगटन में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गुरुवार की बैठक पर टिकी हैं। यह शिखर सम्मेलन तय करेगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने कारोबारी संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक बाजार अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।



















