अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक उल्लेखनीय विरोधाभास देखने को मिला है, जहां तत्काल आपूर्ति वाले अनुबंधों में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि लंबी अवधि के वायदा सौदों में तेजी का रुख लगातार बना हुआ है। यूरोप के कारोबारी सत्र की शुरुआत में मजबूती के साथ कारोबार करते हुए ब्रेंट क्रूड पहले 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक उछल गया था। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ ही आपूर्ति से जुड़ी दो बड़ी घटनाक्रमों ने अचानक बाजार का रुख पलट दिया और कीमतों में तीव्र इंट्राडे गिरावट आई। इसके बावजूद निवेशक आने वाले वर्षों में ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर लंबी अवधि के व्यवधान की संभावनाओं को देखते हुए दूर के सौदों में ऊंची कीमतें चुकाने को तैयार दिख रहे हैं।
सऊदी आपूर्ति की बहाली और अमेरिकी रिजर्व जारी होने का तत्काल दबाव
कच्चे तेल में आई अचानक नरमी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व से जुड़ी आपूर्ति बहाली की खबर रही। सऊदी अरब ने अपने प्रमुख यनबू बंदरगाह से तेल लोडिंग का काम फिर से शुरू कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का प्रवाह सामान्य होने के संकेत मिलते ही हाजिर बाजार में तुरंत राहत महसूस की गई और खरीदारों की ओर से बिकवाली शुरू हो गई। इस खबर ने सुबह के सत्र में बने खरीद दबाव को तेजी से खत्म कर दिया।
दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक बड़े नीतिगत कदम ने भी हाजिर कीमतों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी Strategic Petroleum Reserve (SPR) से 4 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल बाजार में उतारेगा। यह कदम साल की शुरुआत में घोषित वैश्विक स्तर पर समन्वित तेल निकासी का आखिरी चरण है। 4 करोड़ बैरल की इस अतिरिक्त आपूर्ति की पुष्टि होते ही व्यापारियों ने तत्काल जरूरतों के सौदों में मुनाफावसूली की, जिससे दिन के कारोबार में तेल की कीमतों ने नीचे की ओर तीखा मोड़ ले लिया।
लंबी अवधि के अनुबंधों में तेजी और अनसुलझे भू-राजनीतिक जोखिम
तत्काल आपूर्ति वाले ब्रेंट क्रूड और प्राकृतिक गैस की दरों में दिन के दौरान नरमी आने के बाद भी वित्तीय बाजारों में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े व्यापक विवादों या संकटों के समाधान के लिए किसी भी तरह के ठोस समझौते की दिशा में कोई स्पष्ट प्रगति नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि निवेशकों का ध्यान तत्काल राहत से हटकर भविष्य के जोखिमों पर टिका रहा।
बाजार की इस गहरी चिंता का सीधा असर लंबी अवधि के वायदा अनुबंधों में साफ देखने को मिला। दूर के महीनों के ब्रेंट अनुबंधों में लगातार बढ़त दर्ज की गई, जहां दिसंबर 2027 के वायदा सौदे में 0.65 प्रतिशत की ताजा तेजी आई और यह 80.81 डॉलर प्रति बैरल के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार खाड़ी क्षेत्र से तेल का प्रवाह बढ़ने से भले ही नजदीकी दबाव थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन निवेशक अभी भी ऊर्जा बाजार में एक लंबे समय तक चलने वाले आपूर्ति व्यवधान का जोखिम मानकर चल रहे हैं।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन का रुख
वैश्विक कमोडिटी के साथ-साथ विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भी बुधवार के एशियाई सत्र में व्यापक हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा और AUD/USD टूटकर लगभग दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। अगस्त महीने के ऑस्ट्रेलियाई अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे हैं, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं पर पानी फिर गया। इसके अतिरिक्त चीन के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई मदद नहीं मिल सकी, भले ही इस दौरान अमेरिकी डॉलर की बढ़त थमी हुई थी।
दूसरी ओर जापानी मुद्रा के मोर्चे पर स्थिति अलग रही। USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे नुकसान में बनी रही। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों और विदेशी मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिमों ने जापानी येन को मजबूत सहारा दिया। जापान के कमजोर घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के निराशाजनक आंकड़ों के बावजूद येन टिकने में सफल रहा, जिसमें अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने भी मुद्रा जोड़ी की गिरावट को बढ़ाया।
सोने में सीमित दायरा और बिटकॉइन पर 85,000 डॉलर का अवरोध
कीमती धातुओं के बाजार में सोना यूरोपीय सत्र के दौरान एक सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को मंगलवार को छुए गए दो महीने के उच्च स्तर से नीचे धकेल दिया, जिससे गैर-यील्ड वाली पीली धातु को कुछ सहारा मिला। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों ने सोने की बढ़त को एक निश्चित सीमा में बांधे रखा, क्योंकि बाजार प्रतिभागी किसी भी नई दिशा के लिए आगामी महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन बुधवार को 83,000 डॉलर के पास स्थिर रहने की कोशिश करता नजर आया। इस सप्ताह की शुरुआत में बिटकॉइन के खरीदार इसे 85,000 डॉलर के प्रमुख स्तर से ऊपर बंद कराने में नाकाम रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और सप्ताह में आने वाले कई अहम व्यापक आर्थिक आंकड़ों के कारण डिजिटल एसेट के निवेशक बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं।
अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) आंकड़ों पर टिकी नजरें
वैश्विक वित्तीय बाजारों के सभी क्षेत्रों की नजरें अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका का ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस बुधवार को 12:30 GMT पर अगस्त महीने के लिए व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) मूल्य सूचकांक आंकड़े जारी करने वाला है। वित्तीय बाजार इस PCE मूल्य सूचकांक पर पैनी नजर रखते हैं क्योंकि यह फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है। मुद्रास्फीति के ये आंकड़े आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक के ब्याज दर फैसलों और संपूर्ण नीतिगत परिदृश्य को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



















