वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते कर्ज के दबाव और मुद्रा बाजारों की तीव्र उथल-पुथल के बीच जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मंच पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए हैं। जी20 देशों की उच्चस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक ऋण में वृद्धि वर्तमान समय में एक वैश्विक प्रवृत्ति बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस वैश्विक चुनौती के बावजूद जापान अपनी राजकोषीय नीति को आर्थिक वृद्धि और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार कर रहा है। कातायामा ने अमेरिका के वित्त मंत्री बेसेंट और वित्तीय संस्थान जेपीमॉर्गन के प्रमुख डिमन के साथ हुई अपनी द्विपक्षीय बातचीत का ब्योरा भी साझा किया, जिसमें मुद्रा हस्तक्षेप, आर्थिक सुधारों और उत्पादकता बढ़ाने वाले घरेलू निवेशों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
जी20 मंच पर वैश्विक कर्ज वृद्धि और जापान की राजकोषीय रणनीति
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सम्मेलन जी20 की चर्चाओं के दौरान जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा ने कहा कि सरकारी ऋण का विस्तार केवल एक देश तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इस समय कर्ज के बढ़ते स्तर से जूझ रही हैं। उन्होंने बताया कि जापान अपनी राजकोषीय प्राथमिकताओं को इस तरह से रेखांकित कर रहा है जिससे देश की विकास दर को गति मिले और साथ ही राजकोषीय संतुलन भी सुरक्षित रहे। बैठक में वैश्विक आर्थिक असंतुलन, उभरते बाजारों पर चढ़े कर्ज के बोझ और आम नागरिकों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कातायामा ने उल्लेख किया कि अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कर्ज प्रबंधन के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों का संदर्भ दिया, जिससे दोनों देशों के बीच ऋण प्रबंधन को लेकर एक साझा समझ बनाने में मदद मिली है।
अमेरिका-जापान द्विपक्षीय बातचीत और संयुक्त मुद्रा हस्तक्षेप का ढांचा
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के मुद्दे पर सात्सुकी कातायामा ने अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट के साथ अपनी बैठकों की जानकारी दी। उन्होंने जी20 सदस्यों को अवगत कराया कि अमेरिका और जापान द्वारा हाल में किए गए विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप पूरी तरह से जी7 समूह की प्रतिबद्धताओं और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप थे। कातायामा ने कहा कि जी20 की यह बैठक दोनों देशों द्वारा मिलकर किए जाने वाले संयुक्त FX हस्तक्षेप की रणनीतियों को गहराई से समझने का एक अत्यंत मूल्यवान अवसर साबित हुई है। इसके साथ ही, कातायामा ने जेपीमॉर्गन के प्रमुख डिमन से भी बात की, जिन्होंने जापान में हाल के दिनों में लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों की सराहना की। अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट के रुख पर बात करते हुए कातायामा ने बताया कि बेसेंट पिछले साल अक्टूबर से ही यह कहते रहे हैं कि यदि जापान का अवस्फीति दृष्टिकोण बदलता है, तो एक नए आर्थिक दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। बेसेंट का मानना है कि घरेलू निवेश के जरिए उच्च विकास क्षमता और उत्पादकता हासिल करना एक सही दिशा है। हालांकि, विदेशी मुद्रा के विशिष्ट विनिमय दरों पर कातायामा ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
सरकारी बॉन्ड यील्ड, 3 प्रतिशत का स्तर और बाजार आधारित ब्याज दरें
जब सात्सुकी कातायामा से जापान के बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड के 3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने की संभावना से जुड़ा सवाल पूछा गया, तो उन्होंने किसी भी विशिष्ट स्तर पर सीधी टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों का निर्धारण कई तरह के आर्थिक कारकों और बाजार की अपनी अंतर्निहित शक्तियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से होता है। सरकार का काम बाजार की वास्तविकताओं में सीधा हस्तक्षेप करने के बजाय एक स्थिर और भरोसेमंद राजकोषीय माहौल तैयार करना है। बेंचमार्क यील्ड को लेकर बाजारों में चल रही अटकलों के बीच उन्होंने दोहराया कि मौद्रिक और राजकोषीय स्थितियां बाजार के रुझानों के अनुरूप ही आकार लेती हैं।
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति का ऐतिहासिक विकासक्रम
जापान के मौजूदा आर्थिक परिदृश्य को समझने के लिए वहां के केंद्रीय बैंक, यानी बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों के इतिहास को देखना आवश्यक है। बैंक ऑफ जापान का मुख्य जनादेश बैंक नोट जारी करना, मुद्रा पर नियंत्रण रखना और मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, जिसके तहत लगभग 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर का लक्ष्य रखा गया है। कम मुद्रास्फीति के माहौल से निपटने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बैंक ऑफ जापान ने 2013 में एक बेहद उदार मौद्रिक नीति की शुरुआत की थी। इस नीति का मुख्य आधार मात्रात्मक और गुणात्मक मौद्रिक ढील (QQE) था, जिसके तहत बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए नए नोट छापकर सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदे जाते थे। वर्ष 2016 में केंद्रीय बैंक ने अपनी ढील को और बढ़ाते हुए पहली बार नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड को सीधे नियंत्रित करने की व्यवस्था शुरू की। हालांकि, एक दशक से अधिक समय तक इस व्यवस्था को चलाने के बाद, मार्च 2024 में बैंक ऑफ जापान ने अपनी रणनीति बदलते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की और इस तरह अति-उदार मौद्रिक नीति से अपने कदम वापस खींच लिए।
येन का अवमूल्यन, वैश्विक नीतिगत अंतर और मुद्रास्फीति में बदलाव
बैंक ऑफ जापान द्वारा लंबे समय तक चलाए गए विशाल आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के कारण जापानी येन अपनी प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में लगातार कमजोर होता चला गया। यह अवमूल्यन 2022 और 2023 के दौरान और अधिक गहरा गया, क्योंकि दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने दशकों की उच्चतम मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए अपनी ब्याज दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी की, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी उदार नीति पर टिका रहा। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के इस बढ़ते अंतर ने येन के मूल्य को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, 2024 में यह प्रवृत्ति आंशिक रूप से पलट गई जब जापानी केंद्रीय बैंक ने अपनी अति-उदार नीति को समाप्त करने का निर्णय लिया। कमजोर येन और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आए उछाल के कारण जापान में मुद्रास्फीति बढ़ी और बैंक ऑफ जापान के 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर गई। इसके अतिरिक्त, देश में बढ़ती मजदूरी की संभावनाओं ने भी मुद्रास्फीति के इस नए रुझान को समर्थन दिया।
विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल: USD/JPY, GBP/USD और EUR/USD का हाल
वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, बयानों के समय USD/JPY विनिमय दर में 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 160.20 के स्तर पर कारोबार कर रही थी। वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी देखा गया। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) दबाव में रहा और फिसलकर 1.3500 के निचले स्तरों के आसपास आ गया, जो दो सप्ताह का निचला स्तर है। पाउंड में यह गिरावट अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के आने और अमेरिका-ईरान संकट से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच डॉलर में आई मजबूती के कारण हुई। वहीं दूसरी ओर, EUR/USD में भी गिरावट तेज हुई और यह 1.1600 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर को तोड़कर नीचे चला गया। निराशाजनक अमेरिकी आंकड़ों के बावजूद भू-राजनीतिक चिंताओं और सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग ने यूरो पर भारी दबाव बनाया।
वैश्विक बॉन्ड बाजार में बिकवाली और ऊर्जा क्षेत्र में डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड
महीने की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर के sovereign बॉन्ड बाजारों में तेज बिकवाली का माहौल देखा गया। इस बिकवाली की सबसे गाज ब्रिटेन के बॉन्ड बाजार पर गिरी, जहां 2-वर्षीय और 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में एक समय 10 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बाद में क्रमशः 7 और 8 आधार अंक की बढ़त पर बनी रही। सोने की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु की कीमतों में गिरावट आई और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के प्रमुख स्तर की ओर खिसक गई। सोने में इस नरमी का मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया तेज उछाल रहा। इसके अलावा, कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही कुछ शांत दिख रही हों, लेकिन डीजल बाजार से बिल्कुल अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी WTI कच्चे तेल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर को छू गया।



















