अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है, जिसकी मुख्य वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी नीतिगत घोषणा को लेकर बनी अनिश्चितता है। बाजार में इस बात की सुगबुगाहट तेज है कि दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड इस बुधवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेंगे और उन्हें मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेंगे। इस नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों में सतर्कता का माहौल है, जिससे करेंसी बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
डॉलर इंडेक्स में एक महीने का नया उच्च स्तर
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक की ताकत को मापता है, ने 101.64 के स्तर पर पहुंचकर एक महीने का नया उच्च स्तर दर्ज किया है। मुद्रा बाजार में डॉलर की इस मजबूती का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। यूरोपीय सुबह के वक्त EUR/USD जोड़ी भी अपने मासिक निचले स्तर के आसपास ही सुस्त बनी हुई है और 1.1300 के मध्य स्तर के पास कारोबार कर रही है। ट्रेडर्स किसी भी तरह के बड़े और आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं और फेड की दो दिवसीय FOMC नीतिगत बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
ट्रंप की ब्याज दर घटाने की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श से ब्याज दरों में कटौती करने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि हालिया मुद्रास्फीति रिपोर्ट काफी सकारात्मक रही है, लागत में तेजी से गिरावट आ रही है और खाड़ी युद्ध समाप्त होने के बाद कीमतों में और भी भारी गिरावट आनी चाहिए। हालांकि इन तमाम बयानों के बावजूद केंद्रीय बैंक के रुख पर अभी संशय बना हुआ है।
सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग
बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति यानी सेफ-हेवन डिमांड ने अमेरिकी डॉलर को और समर्थन दिया है। मंगलवार को GBP/USD जोड़ी जुलाई के नए निचले स्तरों के आसपास 1.3270 के दायरे में रक्षात्मक रुख अपनाए हुए है। स्टॉक बाजारों में बिकवाली के भारी दबाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की चमक को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा, सोने यानी XAU/USD की चाल में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है और यूरोपीय सत्र के दौरान यह 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब मंडरा रहा है। इससे पहले सोने को 4,100 डॉलर के पार टिकने में असफलता मिली थी, जो यह दर्शाता है कि बुलियन बाजार में फिलहाल मंदी का दबाव बना हुआ है।



















