अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में मंगलवार को चांदी के भाव में कमजोरी दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिका में महंगाई के बने रहने से केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने या और बढ़ाने की आशंकाएं गहरा गई हैं। फेडरल रिजर्व के कई प्रमुख अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि बाजार में लगातार बनी मजबूत मांग भी कीमतों पर लगातार दबाव डाल रही है। दूसरी तरफ, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने इस कीमती धातु को कुछ सहारा दिया, जिससे गिरावट सीमित दायरे में रही। ब्याज दर चक्र और वैश्विक भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच निवेशक अब मुद्रास्फीति तथा आर्थिक परिदृश्य का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।
फेडरल रिजर्व की सख्त दरें और डॉलर की चाल का असर
चांदी पर ब्याज दरों के कड़े रुख का सीधा नकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि इसमें सोने की तरह कोई नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती। जब बैंकों की ब्याज दरें और बॉन्ड पर मिलने वाला मुनाफा बढ़ता है, तब बिना यील्ड वाले संपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने पिछले सप्ताह अपनी मानक उधारी दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी, जिसके बाद यह दर 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में आ गई है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक के कुल 18 नीति निर्माताओं में से 16 अधिकारियों का मानना है कि इस कैलेंडर वर्ष में कम से कम एक और बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। यह अनुमान स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को थामने के लिए अपनी आक्रामक नीति आसानी से नहीं छोड़ेगा।
इसी बीच मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर अपनी शुरुआती तेजी गंवाता दिखा। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा के प्रदर्शन को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स दिन के ऊपरी स्तर 100.67 को छूने के बाद 100.45 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे पहले डॉलर इंडेक्स ने 30 जुलाई के बाद का अपना सबसे उच्च स्तर दर्ज किया था। अमेरिकी डॉलर में आई इस हल्की गिरावट ने चांदी की बिकवाली पर फिलहाल लगाम लगाने में मदद की है। विदेशी बाजारों में चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए कमजोर डॉलर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले वैश्विक खरीदारों और निवेशकों के लिए धातु को अपेक्षाकृत सस्ता बना देता है।
न्यूयॉर्क में कूटनीतिक हलचल और वैश्विक ऊर्जा बाजार
बाजार के तमाम हितधारकों का ध्यान अब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर होने वाली एक उच्च स्तरीय वार्ता पर टिका हुआ है। मंगलवार को निर्धारित इस बैठक में अमेरिका और कई खाड़ी देशों के शीर्ष नेता आमने-सामने होंगे। इस कूटनीतिक बातचीत का एक अहम उद्देश्य पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के व्यावहारिक विकल्पों पर चर्चा करना माना जा रहा है। हालांकि पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अब भी काफी गंभीर बना हुआ है। सप्ताहांत के दौरान वॉशिंगटन और तेहरान के बीच ताजा धमकियों और तल्ख बयानों का आदान-प्रदान हुआ है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच संभावित सीधी मुलाकात को लेकर अभी तक कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, जिससे ऊर्जा और सुरक्षित निवेश संपत्तियों में अनिश्चितता कायम है।
निवेश साधन और सुरक्षित संपत्ति के रूप में चांदी की स्थिति
चांदी वित्तीय बाजारों में बड़े पैमाने पर कारोबार की जाने वाली एक बहुमूल्य धातु है, जिसका उपयोग मानव इतिहास में लंबे समय से मूल्य संचय करने और लेनदेन के एक मजबूत माध्यम के तौर पर किया जाता रहा है। यद्यपि लोकप्रियता के मामले में यह सोने से पीछे रहती है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने तथा भीषण महंगाई के दौर में अपने धन की क्रय शक्ति सुरक्षित रखने के लिए चांदी का रुख करते हैं। आम उपभोक्ता और निवेशक बाजार में भौतिक चांदी सिक्कों या सिल्लियों के रूप में खरीद सकते हैं, जबकि वित्तीय बाजारों में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ जैसे आधुनिक माध्यमों से सीधे इसके अंतरराष्ट्रीय भावों पर ट्रेडिंग की जा सकती है।
कीमती धातुओं के बाजार में चांदी का मूल्य व्यवहार कई जटिल कारकों से संचालित होता है। दुनिया भर में भू-राजनीतिक संकट, युद्ध का डर या गहरी आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी की कीमतों में उछाल ला सकती हैं, क्योंकि निवेशक इसे सुरक्षित निवेश का विकल्प मानते हैं, भले ही यह प्रभाव सोने के मुकाबले थोड़ा सीमित रहता हो। चूंकि यह शून्य यील्ड वाली धातु है, इसलिए कम ब्याज दरों के माहौल में इसके दाम ऊपर चढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक मंच पर इसका लेनदेन XAG/USD के रूप में डॉलर में आंका जाता है। एक मजबूत डॉलर आमतौर पर चांदी की कीमतों को सीमित दायरे में बांधकर रखता है, जबकि डॉलर की कमजोरी इसके भावों को नई ऊंचाई पर धकेलने का काम करती है। बाजार में निवेशकों की ताजा मांग, खनन आपूर्ति और रीसाइक्लिंग की दरें भी समय-समय पर इसके मूल्य चक्र को प्रभावित करती हैं, क्योंकि चांदी प्रकृति में सोने की तुलना में काफी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
औद्योगिक इस्तेमाल और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका
चांदी की एक बड़ी खासियत इसका व्यापक औद्योगिक इस्तेमाल है, जो इसे सिर्फ एक आभूषण या वित्तीय संपत्ति से कहीं अलग पहचान देता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक उद्योगों में चांदी की भारी खपत होती है, क्योंकि इसमें सभी ज्ञात धातुओं की तुलना में सबसे अधिक विद्युत चालकता पाई जाती है, जो तांबे और सोने से भी कहीं अधिक है। सौर पैनलों और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक घटकों में इसके अनिवार्य उपयोग के कारण जब वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में तेजी आती है, तो इसकी मांग और कीमतें बढ़ जाती हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसके भावों को नीचे गिराती है।
विश्व की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका, चीन और भारत का आर्थिक प्रदर्शन चांदी की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह बनता है। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल विनिर्माण तथा औद्योगिक क्षेत्र अपनी तमाम तकनीकी और रासायनिक प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर चांदी का उपभोग करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारतीय बाजार में इस चमकीली धातु की मांग मुख्य रूप से आभूषणों, कलाकृतियों और घरेलू निवेश से जुड़ी है। भारत में आम उपभोक्ताओं और परिवारों की आभूषण मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के मूल्य निर्धारण में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाती है।
सोने के साथ जुड़ाव और गोल्ड-सिल्वर अनुपात का गणित
बाजार का ऐतिहासिक रुझान बताता है कि चांदी की चाल अक्सर सोने के कदमों पर चलती है। जब सोने के भाव में मजबूती आती है, तब चांदी भी उसी दिशा में आगे बढ़ती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर दोनों ही संपत्तियां संकट के समय सुरक्षित आश्रय मानी जाती हैं। बाजार विश्लेषक इन दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को मापने के लिए गोल्ड-सिल्वर अनुपात का बारीकी से अध्ययन करते हैं। यह अनुपात दर्शाता है कि सोने के ठीक एक औंस के मूल्य के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की जरूरत होगी।
यदि यह अनुपात काफी ऊंचा हो जाता है, तो कई चतुर निवेशक इसे संकेत मानते हैं कि मौजूदा बाजार में चांदी अपने वास्तविक मूल्य से काफी सस्ती यानी अंडरवैल्यूड है अथवा सोना जरूरत से ज्यादा महंगा यानी ओवरवैल्यूड हो चुका है। इसके विपरीत, जब यह अनुपात ऐतिहासिक स्तरों से काफी नीचे आ जाता है, तब यह माना जाता है कि चांदी की तुलना में सोना अपेक्षाकृत सस्ता है। इस तुलनात्मक अध्ययन का उपयोग ट्रेडर अपनी रणनीतियों को संतुलित करने के लिए नियमित रूप से करते हैं।
मुद्रा बाजार और अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी हासिल करने में सफल रही। इस तेजी को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक के कड़े बयानों से बल मिला। हालांकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नजरिए ने डॉलर को मजबूत समर्थन दिया, जिससे इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है। इसके साथ ही, निवेशकों की नजरें इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं।
डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई कारोबार में मामूली बढ़त के साथ 157.50 के स्तर के करीब दर्ज की गई, जहां जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने येन की गिरावट को थामे रखा। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर तक की गई नरम दर वृद्धि ने येन के खरीदारों को रक्षात्मक रुख पर रखा। दूसरी ओर, फेड के सख्त रुख और मध्य पूर्व के तनाव से डॉलर को मिला समर्थन इस जोड़ी के लिए मददगार बना रहा। बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के एक और कदम के रूप में अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो कि बाजार के हफ्तों पुराने अनुमानों के पूरी तरह अनुरूप रहा।
उधर सोने के बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई, जहां इसका भाव प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया, हालांकि बाद में इसमें कुछ स्थिरता लौटी। सोने पर दबाव इसलिए बना हुआ है क्योंकि यह संभावना लगातार बनी हुई है कि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखेगा, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सप्ताह गुरुवार को वॉशिंगटन में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए मिलने वाले हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली इस वार्ता पर सभी वित्तीय बाजारों की पैनी नजर है, क्योंकि यह बैठक तय करेगी कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक युद्धविराम आगे बढ़ेगा या फिर वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।


















