चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने इस महीने अपनी प्रमुख उधारी दरों में किसी भी प्रकार का बदलाव न करने का फैसला किया है। मंगलवार को सामने आए इस आधिकारिक निर्णय के अनुसार, देश के एक वर्षीय लोन प्राइम रेट को 3.00 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है, जबकि दीर्घकालिक ऋणों का पैमाना माने जाने वाले पांच वर्षीय लोन प्राइम रेट को 3.50 प्रतिशत पर स्थिर छोड़ा गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों और ब्याज दर चक्रों पर करीबी नजर रखी जा रही है। दरों को यथावत रखने के इस कदम ने बाजार विश्लेषकों और निवेशकों को चीनी अर्थव्यवस्था के मौजूदा रुख को समझने का एक स्पष्ट संकेत दिया है।
लोन प्राइम रेट की व्यवस्था और आर्थिक प्रभाव
लोन प्राइम रेट चीनी बैंकिंग प्रणाली के भीतर उधारी की लागत तय करने वाला प्राथमिक बेंचमार्क माना जाता है। वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए जाने वाले तमाम व्यावसायिक ऋणों, उपभोक्ता कर्जों और आवासीय बंधक दरों का निर्धारण सीधे तौर पर इसी दर के आधार पर किया जाता है। एक वर्षीय दर सामान्य तौर पर कंपनियों के लिए कार्यशील पूंजी और अल्पकालिक कर्जों के लिए मानक का काम करती है। इसके विपरीत पांच वर्षीय दर का सबसे अधिक प्रभाव देश के रियल एस्टेट क्षेत्र और आवास ऋणों की मासिक किस्तों पर पड़ता है।
जब पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना इस दर में कटौती करता है, तो बाजार में ऋण सस्ता हो जाता है, जिससे निवेश और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिलता है। इसके विपरीत, दरों को स्थिर रखने का मतलब है कि केंद्रीय बैंक वर्तमान में बाजार में मौजूद नकदी और ऋण लागत को मौजूदा आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुकूल मान रहा है। इसके साथ ही, बेंचमार्क दरों में होने वाले किसी भी समायोजन का सीधा असर राष्ट्रीय मुद्रा रेनमिनबी की विनिमय दर पर भी पड़ता है, जो घरेलू कीमतों की स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है।
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की संरचना और नीतिगत उपकरण
पश्चिमी देशों के स्वतंत्र केंद्रीय बैंकों की तुलना में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की शासन प्रणाली काफी भिन्न है। यह पूरी तरह से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के राज्य के स्वामित्व में संचालित होता है और इसे स्वायत्त संस्थान का दर्जा प्राप्त नहीं है। केंद्रीय बैंक के प्रबंधन और उसकी रणनीतिक दिशा तय करने में स्टेट काउंसिल के चेयरमैन द्वारा नामित चीनी कम्युनिस्ट पार्टी समिति के सचिव की भूमिका सबसे अधिक प्रभावशाली होती है। वर्तमान समय में पैन गोंगशेंग इन दोनों महत्वपूर्ण पदों को संभाल रहे हैं, यानी वे केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी हैं और पार्टी समिति के सचिव भी हैं।
चीन का केंद्रीय बैंक अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई अलग अलग नीतिगत साधनों का उपयोग करता है। इसके मुख्य उद्देश्यों में मूल्य स्थिरता बनाए रखना, मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखना और समग्र आर्थिक विकास को गति देना शामिल है। इसके अलावा, वित्तीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर खोलने और आधुनिक बनाने के लिए सुधारों को लागू करना भी इसके दायरे में आता है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बैंक सात दिवसीय रिवर्स रेपो रेट, मीडियम टर्म लेंडिंग फैसिलिटी, विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप और रिजर्व रिक्वायरमेंट रेशियो जैसे व्यापक टूल्स का नियमित सहारा लेता है।
चीन का बैंकिंग ढांचा और निजी डिजिटल लेंडर्स
चीन की विशाल वित्तीय व्यवस्था पारंपरिक रूप से बड़े राज्य समर्थित बैंकों के नियंत्रण में रही है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें कुछ विविधता भी देखने को मिली है। वर्तमान में चीन में 19 निजी बैंक सक्रिय हैं, जो देश के कुल वित्तीय तंत्र का एक बेहद छोटा हिस्सा हैं। निजी पूंजी से पूरी तरह वित्तपोषित घरेलू ऋणदाताओं को वित्तीय क्षेत्र में काम करने की अनुमति साल 2014 में दी गई थी।
इन निजी वित्तीय संस्थानों में सबसे बड़े नाम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रूप में उभरे हैं। इनमें वीबैंक और एमवायबैंक प्रमुख हैं, जिन्हें प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों टेनसेंट और ऐंट ग्रुप का ठोस समर्थन प्राप्त है। हालांकि इन निजी और डिजिटल बैंकों की मौजूदगी धीरे धीरे बढ़ रही है, फिर भी संपूर्ण बैंकिंग परिदृश्य में सरकारी बैंकों का दबदबा स्पष्ट रूप से बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा बाजार पर असर और मुद्राओं की चाल
चीनी केंद्रीय बैंक के इस फैसले के समय विदेशी मुद्रा बाजार में भी कई अहम उतार चढ़ाव देखने को मिले। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 0.6980 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के सामने लगातार दो सत्रों की बढ़त दर्ज की, जहां जोखिम उठाने की बेहतर होती धारणा के बीच यह 0.50 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुई। इस तेजी को चीन के हालिया जीडीपी और खुदरा बिक्री के मजबूत आंकड़ों से भी बड़ा सहारा मिला है।
दूसरी ओर, एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर येन की जोड़ी 158.00 के करीब रक्षात्मक मुद्रा में रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट के चलते अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर के आसपास दबाव में बना रहा। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के सख्त नीतिगत बयानों और बाजार में संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिमों ने जापानी येन को मजबूती दी। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावनाओं और भू राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर के नुकसान को सीमित रखने का काम किया है।
सोने के भाव में नरमी और निवेशकों की सतर्कता
कमोडिटी बाजार की बात करें तो शुरुआती एशियाई कारोबार में सोने की कीमत गिरकर लगभग 4,135 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। ऊर्जा की घटती कीमतों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों पर बनी रहने से इस बहुमूल्य धातु पर दबाव लगातार बढ़ता दिखा। सामान्य तौर पर कमजोर डॉलर सोने की कीमतों को सहारा देता है, लेकिन यह धातु 4,200 डॉलर के स्तर से ऊपर टिकने में बार बार असफल रही है।
बाजार के कारोबारी अब अमेरिकी ब्याज दरों के दृष्टिकोण का सावधानीपूर्वक आकलन कर रहे हैं, विशेष रूप से अगले सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक को देखते हुए। अनुकूल परिस्थितियों के मिश्रण के बावजूद सोने का एक सीमित दायरे में बंधा रहना यह दर्शाता है कि निवेशक आगामी वैश्विक नीतिगत संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।















