अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अनिश्चितताओं और विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षात्मक शुल्क लगाने के गतिरोध के बीच चीनी अर्थव्यवस्था से बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सितंबर के दौरान देश के निर्यात क्षेत्र में अप्रत्याशित तेजी दर्ज की गई है, जिसने वैश्विक बाजारों को हैरत में डाल दिया है। अमेरिकी डॉलर के आधार पर मापे गए इस निर्यात आंकड़े ने न केवल विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, बल्कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ देश के व्यापार अधिशेष को अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा दिया। साथ ही, घरेलू स्तर पर लागत दबाव बढ़ने से उत्पादक कीमतों में भी लंबे समय बाद सबसे तेज इजाफा देखने को मिला है, जिसने वैश्विक आपूर्ति शृंखला और नीति निर्माताओं के सामने नए समीकरण खड़े कर दिए हैं।
चीन के निर्यात और आयात में अनुमान से कहीं अधिक तेजी
सितंबर में चीन की विदेशी व्यापार गतिविधियों में जोरदार गति दर्ज की गई। डॉलर मूल्य के संदर्भ में चीन के निर्यात में सालाना आधार पर 36.3 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बाजार विशेषज्ञों द्वारा लगाए गए 25.7 फीसदी के अनुमान से काफी ज्यादा है। इससे पिछले महीने यानी अगस्त में निर्यात वृद्धि दर 25.0 फीसदी दर्ज की गई थी, जिसके मुकाबले सितंबर का यह उछाल फरवरी के बाद की सबसे तेज मासिक रफ्तार दर्शाता है।
केवल निर्यात ही नहीं, बल्कि विदेशी सामानों की घरेलू मांग यानी आयात के मोर्चे पर भी सुखद आंकड़े दर्ज किए गए। सितंबर में चीन का आयात सालाना आधार पर 31.0 फीसदी बढ़ा, जबकि वित्तीय विश्लेषकों ने इसमें 25.0 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान जताया था। यह रफ्तार अगस्त महीने के 28.2 फीसदी के आंकड़े से भी बेहतर रही। विदेशी व्यापार के इन दोनों पहलुओं में जोरदार तेजी के चलते देश का मासिक व्यापार अधिशेष बढ़कर 133.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले 20 महीनों की अवधि में दर्ज किया गया सबसे बड़ा मासिक व्यापार अधिशेष है।
2026 के पहले नौ महीनों में व्यापार अधिशेष ने बनाया नया कीर्तिमान
साल 2026 के शुरुआती नौ महीनों के दौरान चीन का संचयी व्यापार अधिशेष अब 938 अरब डॉलर के विशाल स्तर पर जा पहुंचा है। जिस रफ्तार से विदेशी ऑर्डरों की आपूर्ति हो रही है, उसे देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि यह आंकड़ा पूरे वर्ष के अंत तक 2025 में स्थापित किए गए 1.2 लाख करोड़ डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड को भी आसानी से पार कर सकता है।
हालांकि, व्यापार संतुलन का यह भारी झुकाव ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब यूरोपीय संघ और चीन के बीच विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर व्यापारिक मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं। यूरोपीय बाजारों में स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे सुरक्षात्मक कदमों और शुल्कों के बीच चीन के इस रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष से पश्चिमी देशों के साथ जारी कूटनीतिक और आर्थिक तनाव और अधिक तीखा होने की आशंका बढ़ गई है।
कच्चे तेल और एआई लागत से चार साल के शिखर पर पीपीआई
कारखानों और विनिर्माण स्तर पर लागत दबाव को मापने वाला उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई भी सितंबर में उम्मीदों से कहीं अधिक तेज गति से ऊपर चढ़ा। आंकड़ों के मुताबिक, उत्पादक कीमतों में सालाना आधार पर 5.0 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार के 4.4 फीसदी के आम अनुमान को पार कर गई। यह दर पूर्व अवधि में दर्ज 3.8 फीसदी की तेजी से काफी अधिक है और साल 2022 के बाद से उत्पादक कीमतों की सबसे तीव्र वार्षिक बढ़त का प्रतिनिधित्व करती है।
उत्पादक कीमतों में इस तेज उभार की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का उच्च स्तर पर बना रहना है। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों, घटकों और संबंधित हार्डवेयर उत्पादों की निर्माण लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी औद्योगिक लागत को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है।
बॉन्ड जारी करने से कर्ज विस्तार बढ़ा, लेकिन निजी मांग सुस्त
आर्थिक तंत्र में वित्तीय तरलता के प्रवाह का आकलन करने वाला कुल सामाजिक वित्तपोषण यानी एग्रीगेट सोशल फाइनेंसिंग सितंबर में 3.55 लाख करोड़ युआन बढ़ा। जून के बाद से दर्ज किया गया यह सबसे तेज मासिक विस्तार है। इस तेज बढ़ोतरी को सरकार द्वारा पिछले एक साल से भी अधिक समय में जारी किए गए सबसे बड़े सरकारी बॉन्ड निर्गम से मजबूत सहारा मिला।
आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग तंत्र के जरिए दिए जाने वाले नए युआन ऋण 1.3 लाख करोड़ युआन के स्तर पर पहुंच गए। हालांकि, इस वित्तीय वृद्धि के भीतर असंतुलन की स्थिति स्पष्ट दिखाई दी। परिवारों और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं द्वारा कर्ज लेने की रफ्तार बेहद धीमी बनी रही। घरेलू ऋण उठाव में यह कमजोरी दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की कर्ज मांग अभी तक ठोस तरीके से पटरी पर नहीं लौट पाई है, जिससे कुल आर्थिक सुधार की गति थोड़ी असमान नजर आ रही है।
मुद्रा बाजारों और बॉन्ड प्रतिफल पर वैश्विक असर
चीन के इन व्यापक आर्थिक आंकड़ों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का असर दुनिया भर के मुद्रा और जिंस बाजारों पर सीधे तौर पर देखा गया
- अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड: बुधवार को आए अमेरिका के मजबूत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों के बाद डॉलर अप्रैल 2025 के उच्च स्तर तक उछल गया था। लेकिन चीन द्वारा बॉन्ड खरीद की चर्चाओं और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट के चलते डॉलर अपने इन उच्चतम स्तरों से नीचे फिसल गया।
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD): ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोजगार आंकड़ों के कारण यह मुद्रा जोड़ी एशियाई सत्र में गिरकर 0.6950 के करीब आ गई, जिससे यह अपने नए साप्ताहिक निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में और अधिक गिरावट सीमित रही।
- अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY): तीन सप्ताह के उच्च स्तर से शुरू हुई गिरावट को आगे बढ़ाते हुए यह मुद्रा जोड़ी 158.00 के स्तर से नीचे लुढ़क गई। जापानी अधिकारियों द्वारा येन को संभालने के लिए बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की संभावना को देखते हुए कारोबारी अत्यधिक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
- ब्रिटेन का आर्थिक परिदृश्य: चांसलर द्वारा अपना पहला बजट पेश किए जाने में दो सप्ताह से भी कम का समय बचा है। अमूमन ब्रिटेन में बजट से पहले अनिश्चितता रहती है, लेकिन इस बार आर्थिक और वित्तीय माहौल काफी सकारात्मक है। ब्रिटिश बॉन्ड में लिवाली जारी है, एफटीएसई 100 सूचकांक इस सप्ताह प्रमुख वैश्विक शेयर सूचकांकों में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता बना हुआ है और पाउंड भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हो रहा है।
सोना चमका, क्रिप्टो बाजार में दबाव गहराया
वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम धारणा बदलने से बहुमूल्य धातुओं और डिजिटल संपत्तियों में विपरीत दिशा में हलचल देखी गई। दुनिया भर के शेयर बाजारों में एआई से जुड़े भारी निवेशों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण कमजोरी छाई रही। शेयर बाजारों की इस गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आए तेज करेक्शन ने सोने की मांग को फिर से जगा दिया। सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाने वाले सोने में नए सिरे से लिवाली देखने को मिली, जिससे डॉलर के साल के उच्चतम स्तर से फिसलने का सीधा फायदा पीली धातु को मिला।
दूसरी ओर, डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मंदी का रुख हावी रहा। रिपल से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी लगभग 1.30 डॉलर के करीब संघर्ष करती नजर आई। टोकन में आई यह नरमी समग्र क्रिप्टोकरेंसी बाजार की भारी बिकवाली को दर्शाती है, जहां निवेशक अमेरिका में मुद्रास्फीति के बढ़ते दबावों को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं और जोखिम भरी परिसंपत्तियों से पूंजी बाहर निकाल रहे हैं।



















