अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो में मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट इस तेजी का मुख्य आधार बनी, जिससे डॉलर अपने हालिया उच्च स्तर से फिसल गया। हालांकि, अमेरिका में उम्मीद से कहीं अधिक गर्म थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़े तथा फ्रांस की राजनीतिक व राजकोषीय चिंताओं ने यूरो की इस रिकवरी को एक सीमित दायरे में बांधे रखा है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज गिरावट और डॉलर पर दबाव
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में गुरुवार को सरकारी बॉन्ड यील्ड फिसलकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गई। यील्ड में आई इस तेज नरमी ने अमेरिकी डॉलर को दबाव में ला दिया, जिससे बुधवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े आने के बाद बने अप्रैल 2025 के उच्चतम स्तर से डॉलर नीचे खिसक गया। बॉन्ड यील्ड में नरमी के पीछे चीन द्वारा बॉन्ड खरीदारी की चर्चाओं और वैश्विक इक्विटी बाजारों में कमजोरी को मुख्य वजह माना जा रहा है। यील्ड के घटने से डॉलर इंडेक्स में मुनाफावसूली हावी हुई, जिसका सीधा लाभ यूरो और अन्य प्रमुख मुद्राओं को मिला।
थोक महंगाई के आंकड़ों ने चौंकाया, पीपीआई 1.3 प्रतिशत बढ़ा
गुरुवार को जारी आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई सितंबर के दौरान मासिक आधार पर 1.3 प्रतिशत बढ़ा। यह बाजार के 0.5 प्रतिशत के अनुमान से काफी ज्यादा है। अगस्त के आंकड़ों को भी संशोधित कर 0.5 प्रतिशत की वृद्धि पर रखा गया था। वार्षिक आधार पर उत्पादक मुद्रास्फीति 6.3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 5.6 प्रतिशत के संशोधित आंकड़े और 5.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कहीं अधिक है। यह लगातार संकेत दे रहा है कि उत्पादन स्तर पर लागत का दबाव बना हुआ है, जो अंततः खुदरा कीमतों पर असर डाल सकता है।
उपभोक्ता मुद्रास्फीति और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
पीपीआई के ये आंकड़े बुधवार को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों के ठीक बाद सामने आए हैं। सीपीआई रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई, जबकि बाजार का अनुमान 3.6 प्रतिशत था। इसी तरह कोर मुद्रास्फीति बढ़कर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 2.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। लगातार गर्म आते मुद्रास्फीति के आंकड़े और मजबूत उपभोक्ता खर्च अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख का समर्थन करते हैं।
इसके बावजूद, 27-28 अक्टूबर की आगामी बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम नजर आ रही है। हाल के दिनों में फेड अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि नीति निर्माता लगातार दो बैठकों में बैक-टू-बैक दर वृद्धि करने को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े दिखाते हैं कि वित्तीय बाजारों के ट्रेडर्स दिसंबर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 90 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं।
यूरोपीय चुनौतियां: फ्रांस का कर्ज और ईसीबी की सतर्कता
अटलांटिक के दूसरी तरफ, यूरोप में परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। फ्रांस की राजकोषीय स्थिति और राजनीतिक अनिश्चितताएं यूरो की मजबूती की राह में बड़ी बाधा बनकर उभरी हैं। इसके साथ ही, यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के अधिकारियों की हालिया सतर्क टिप्पणियों ने तुरंत ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदों को धीमा कर दिया है। यही कारण है कि अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के बावजूद यूरो बहुत बड़ी छलांग लगाने में असमर्थ रहा है।
मुद्रा बाजार के प्रदर्शन पर नजर डालें तो विभिन्न प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले यूरो की चाल मिली-जुली रही। गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले यूरो सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दिया, जहां इसे सबसे ज्यादा बढ़त हासिल हुई।
वैश्विक मुद्रा बाजार का रुख: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी निराशाजनक ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों के दबाव में 0.6950 के स्तर के आसपास कमजोर बनी रही। इस गिरावट के साथ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपने मासिक उच्च स्तर से पिछले दिन शुरू हुई फिसलन को आगे बढ़ाया और गुरुवार के एशियाई सत्र के दौरान नए साप्ताहिक निचले स्तर को छू लिया। हालांकि, गिरती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने डॉलर को नीचे खींचकर इस जोड़ी के नुकसान को एक निश्चित स्तर पर सीमित करने में मदद की।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर तीन सप्ताह के उच्च स्तर से शुरू हुई अपनी गिरावट को जारी रखते हुए 158.00 के नीचे आ गया। ट्रेडर्स इस समय काफी सतर्क हैं, क्योंकि बाजार में यह अटकलें तेज हैं कि जापानी अधिकारी गिरते येन को सहारा देने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर पर चीन द्वारा बॉन्ड खरीदारी की चर्चाओं के चलते बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट का भी गहरा असर पड़ा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी पर बिकवाली का दबाव बना रहा।
सोने में नई खरीदारी, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिकवाली जारी
कमोडिटी बाजार में गुरुवार को सोने में नए खरीदार सक्रिय होते दिखाई दिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े निवेशों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी देखी गई। इस कमजोरी ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज गिरावट ला दी, जिसने अमेरिकी डॉलर को अपने साल के उच्चतम स्तर से नीचे खींच लिया। डॉलर और यील्ड दोनों के नरम पड़ने से सोने की कीमतों को मजबूती मिली।
इसके विपरीत, डिजिटल संपत्ति बाजार में मंदी का रुख बना हुआ है। रिपल गुरुवार को लगभग 1.30 डॉलर के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। इस रेमिटेंस टोकन में आई यह मंदी समूचे क्रिप्टोकरेंसी बाजार की तस्वीर को दर्शाती है, जो अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति और सख्त मौद्रिक नीति की चिंताओं के चलते भारी बिकवाली के दबाव में है।
ब्रिटेन का बजट और मजबूत आर्थिक माहौल
ब्रिटेन में चांसलर द्वारा अपना पहला बजट पेश किए जाने में अब 2 सप्ताह से भी कम समय बचा हुआ है। आमतौर पर ब्रिटेन के लिए बजट से पहले का माहौल तनावपूर्ण रहता है, लेकिन इस बार आर्थिक और वित्तीय पृष्ठभूमि काफी उत्साहजनक बनी हुई है। यूके के सरकारी बॉन्ड में तेजी देखी जा रही है, एफटीएसई 100 इस सप्ताह का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला प्रमुख स्टॉक इंडेक्स बना हुआ है, और ब्रिटिश पाउंड भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता हासिल कर रहा है।

















