चीन के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सितंबर के दौरान हल्की सुस्ती दर्ज की गई है, हालांकि आंकड़े विश्लेषकों के अनुमानों से बेहतर साबित हुए हैं। सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन का रेटिंगडॉग मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई सितंबर में घटकर 52.0 पर आ गया। इससे पहले अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 52.1 पर दर्ज किया गया था। वित्तीय बाजार इस महीने के लिए 51.6 के स्तर का अनुमान लगा रहे थे, जिसके मुकाबले ताजा आंकड़े काफी मजबूत स्थिति दर्शाते हैं। विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े इस आंकड़े के 50 से ऊपर बने रहने का सीधा अर्थ यह है कि चीनी अर्थव्यवस्था का उत्पादन क्षेत्र अब भी विस्तार की स्थिति में बना हुआ है।
चीन से आए इन सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) में तत्काल कोई बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिला। वैश्विक मुद्रा बाजारों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अक्सर चीन की आर्थिक सेहत के सबसे प्रमुख प्रॉक्सी के रूप में देखा जाता है। इस रिपोर्ट के समय, AUD/USD जोड़ी में दिन के कारोबार के दौरान 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही और यह 0.7030 के स्तर पर कारोबार कर रही थी। एशियाई सत्र के शुरुआती चरण में आई हल्की गिरावट के बाद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा ने अपनी स्थिति को संभाला है, जिसे ईरान पर कूटनीतिक प्रगति की नई उम्मीदों से समर्थन मिला। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर (USD) पर दबाव बढ़ने से जोखिम से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा जरूर मिला, लेकिन निवेशक आगामी नीतिगत फैसलों को देखते हुए आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए ब्याज दरें और केंद्रीय बैंक की नीतियां
विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य को तय करने वाले सबसे अहम कारकों में से एक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा तय की जाने वाली आधिकारिक ब्याज दरें हैं। केंद्रीय बैंक देश के भीतर वाणिज्यिक बैंकों के बीच आपसी उधारी की ब्याज दर निर्धारित करता है, जिससे पूरी ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत तय होती है। आरबीए का प्रमुख वैधानिक उद्देश्य ब्याज दरों में फेरबदल करके मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना है।
जब रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में अपेक्षाकृत ऊंची रहती हैं, तो यह विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूत बनाती हैं। इसके विपरीत, अपेक्षाकृत कम ब्याज दरें मुद्रा के मूल्य को कमजोर करती हैं। इसके अलावा केंद्रीय बैंक बाजार में नकदी की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मात्रात्मक सहजता (क्वांटिटेटिव ईजिंग) और मात्रात्मक सख्ती (क्वांटिटेटिव टाइटनिंग) का भी सहारा लेता है। नकदी बढ़ाने वाला कदम मुद्रा के लिए नकारात्मक और नकदी घटाने वाली सख्ती मुद्रा के मूल्य के लिए सकारात्मक मानी जाती है। विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारी आरबीए के आगामी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण गुरुवार को छुए गए एक महीने के उच्चतम स्तर के नीचे ही हाजिर भाव टिके हुए हैं।
चीनी अर्थव्यवस्था और लौह अयस्क की वैश्विक कीमतों का सीधा संबंध
ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न देश है और उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार चीन है। इसी वजह से चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिति का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन पर बेहद सीधा और गहरा असर पड़ता है। जब चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती है, तो वहां बुनियादी ढांचे और उत्पादन के लिए कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ जाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ ऑस्ट्रेलिया को मिलता है, क्योंकि चीन उसकी खदानों से भारी मात्रा में आयात करता है। मांग बढ़ने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की खरीद बढ़ती है और उसका विनिमय दर मजबूत होता है। वहीं अगर चीन की विकास दर उम्मीद से धीमी पड़ती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग में गिरावट आती है।
लौह अयस्क ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है और चीन इसका प्राथमिक गंतव्य है। वर्ष 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का वार्षिक लौह अयस्क निर्यात 118 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। वैश्विक बाजार में लौह अयस्क की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की चाल को निर्धारित करता है। सामान्य परिस्थितियों में, लौह अयस्क की कीमतों में उछाल से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा मजबूत होती है क्योंकि देश के निर्यात की कुल मांग बढ़ जाती है। इसके विपरीत, लौह अयस्क के दाम टूटने पर मुद्रा कमजोर पड़ने लगती है। कच्चे माल की ऊंची कीमतें ऑस्ट्रेलिया के व्यापार संतुलन को पक्ष में रखने में मदद करती हैं, जिससे मुद्रा को सीधा सहारा मिलता है।
व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक धारणा
ऑस्ट्रेलिया का व्यापार संतुलन भी उसकी मुद्रा को प्रभावित करने वाला एक बुनियादी स्तंभ है। व्यापार संतुलन किसी देश द्वारा अपने निर्यातों से अर्जित विदेशी मुद्रा और आयातों के लिए किए गए भुगतान का शुद्ध अंतर होता है। जब ऑस्ट्रेलिया के निर्यातों की वैश्विक स्तर पर भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों को ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा खरीदनी पड़ती है। आयात बिल की तुलना में निर्यात आमदनी अधिक होने पर देश का शुद्ध व्यापार संतुलन सकारात्मक यानी अधिशेष में रहता है। यह अधिशेष ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य में स्वाभाविक वृद्धि लाता है, जबकि घाटे की स्थिति में मुद्रा पर नीचे की ओर दबाव बनता है।
इसके अलावा, बाजार की समग्र जोखिम धारणा जिसे रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ कहा जाता है, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की चाल तय करती है। जब निवेशक जोखिम उठाने को तैयार होते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ता है। इसके विपरीत वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भागते हैं, जिससे इस मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। घरेलू मोर्चे पर ऑस्ट्रेलिया की मुद्रास्फीति, विकास दर और रोजगार के आंकड़े भी इस समीकरण को प्रभावित करते हैं।
वैश्विक मुद्राओं, सोने और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर
वैश्विक मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी सोमवार को महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिली। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) ने एशियाई सत्र में फिर से सकारात्मक गति हासिल की और शुक्रवार को 157.00 के निचले स्तर से उछाल दर्ज किया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता जापानी मुद्रा को कमजोर कर रही है। हालांकि, पश्चिम एशिया में कूटनीति के प्रयासों ने सुरक्षित ठिकाने माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की तेजी को सीमित किया है, साथ ही यह अटकलें भी हैं कि जापानी अधिकारी मुद्रा के समर्थन के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं।
दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोने ने सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ की। शुक्रवार को अक्टूबर 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर को छूने के बाद पीली धातु में हल्की रिकवरी दर्ज की गई। ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर की बढ़त को रोक दिया, जिससे सोने को कुछ राहत मिली। फिर भी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं ने बिना ब्याज वाली इस धातु की तेजी को सीमित कर रखा है। बाजार का ध्यान अब नए महीने के पहले सप्ताह में आने वाले प्रमुख अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित है, जिसमें सोमवार को आने वाला आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग डेटा और शुक्रवार को जारी होने वाली गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) रिपोर्ट शामिल है। इसके अलावा वीकेंड में पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े अहम घटनाक्रमों पर भी बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं, जो पूरे कारोबारी सप्ताह की दिशा तय कर सकते हैं।


















