अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की कीमतों को लेकर आपूर्ति जोखिम एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब और रूस के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के कारण वैश्विक स्तर पर कीमतों में संभावित तेजी का जोखिम बना हुआ है। वित्तीय रणनीतिकारों के अनुसार कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स यानी सीटीए इस समय डब्ल्यूटीआई क्रूड, ब्रेंट क्रूड, डीजल और गैसोलीन में अधिकतम लॉन्ग पोजीशन बनाए हुए हैं। इस समय केवल उतार-चढ़ाव का स्तर ही उनकी आक्रामक स्थिति को थोड़ा नियंत्रित कर रहा है, वरना बाजार की दिशा पूरी तरह तेजी की ओर झुकी हुई दिख रही है।
सऊदी अरब की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त और आपूर्ति की चुनौतियां
ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं तब और बढ़ गईं जब सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा। उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक इस महत्वपूर्ण पाइपलाइन प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा तीन से पांच सप्ताह तक सेवा से बाहर रह सकता है। इसके साथ ही हूती हमलों के जारी खतरे ने आपूर्ति संकट को और गहरा कर दिया है। रणनीतिकारों का कहना है कि जब तक बुनियादी ढांचे पर इस तरह के हमले जारी रहेंगे, कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों में जोखिम प्रीमियम बना रहेगा। सऊदी अरब की इस पाइपलाइन से आपूर्ति ठप होने का असर सीधे तौर पर कच्चे तेल के परिवहन पर पड़ रहा है।
रूसी रिफाइनरियों पर हमले और डीजल बाजार पर दबाव
मध्य पूर्व के अलावा पूर्वी यूरोप में भी ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल का बाजार लगातार सख्त हो रहा है। रिफाइनरियों को हुए नुकसान के चलते ईंधन के उत्पादन और निर्यात में गिरावट आई है, जिससे गैसोलीन और डीजल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखा जा रहा है। रणनीतिकारों का स्पष्ट मानना है कि मध्य पूर्व और रूस दोनों मोर्चों पर बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने से आपूर्ति चक्र टूट रहा है, जिससे कीमतों में उछाल का जोखिम असामान्य रूप से ऊंचा बना हुआ है।
मध्य पूर्व का तेल प्रवाह और चीनी मांग की भूमिका
हाल के दिनों में मध्य पूर्व से होने वाले कुल तेल प्रवाह में सुधार देखा गया था और यह युद्ध-पूर्व स्तर के 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसमें होर्मुज, ओमान की खाड़ी, ओमान, फुजैराह और यानबू जैसे प्रमुख केंद्रों से होने वाला प्रवाह शामिल है। हालांकि तेल शोधन का स्तर अब भी सामान्य से कम बना हुआ है। इसके बावजूद लगातार हमलों से आपूर्ति सीमित होने की आशंका और चीन की ओर से ईंधन की मांग में सुधार के साथ रिफाइनरी संचालन बढ़ने की संभावनाओं ने बाजार में पहले से ही ऊंचा जोखिम प्रीमियम बनाए रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि चीनी खपत में तेजी आती है, तो आपूर्ति की यह कमी और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में उठापटक: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन
ऊर्जा बाजार में जारी इस उथल-पुथल और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों की आशंकाओं का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD जोड़ी गिरकर डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर 0.7140 के करीब पहुंच गई। दिन के कारोबार में हाजिर कीमतों में करीब 0.25 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 0.7100 के मध्य स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रही थी। हालांकि इस गिरावट में आगे कोई बहुत तेज बिकवाली का सिलसिला नहीं दिखा।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन यानी USD/JPY जोड़ी में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में कुछ खरीदारी लौटी। एशियाई सत्र में यह जोड़ी शुक्रवार के नुकसान की कुछ भरपाई करते हुए 154.00 के स्तर के करीब चढ़ गई। इसके बावजूद हाजिर भाव पिछले लगभग एक सप्ताह के दायरे में ही सीमित रहे। यह स्तर पिछले मंगलवार को छुए गए लगभग सात महीने के निचले स्तर के काफी करीब है, क्योंकि मुद्रा कारोबारी इस सप्ताह केंद्रीय बैंकों से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और नीतिगत फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।
सोने में भारी गिरावट और फेडरल रिजर्व का रुख
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिका में मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से भड़का दिया है। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में सभी अवधियों में आई जोरदार तेजी के चलते सोने की कीमतों में गिरावट का रुख तेज हो गया। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर लगभग 4,250 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब आ गया, जो कई सप्ताह का निचला स्तर है। अमेरिकी पीपीआई और सीपीआई के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं।
फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले और उसका नया डॉट प्लॉट अमेरिकी डॉलर की भविष्य की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। वहीं ट्रंप द्वारा ब्याज दरों को कम रखने के दबाव के बीच वार्श की स्वतंत्रता की भी परीक्षा मानी जा रही है। अगर डॉलर को अपनी बढ़त जारी रखनी है, तो फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों को लेकर मौजूदा सख्त उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बढ़त का रुख
पारंपरिक संपत्तियों और मुद्राओं में अनिश्चितता के बीच डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मजबूती दर्ज की गई। सोमवार को बिटकॉइन बढ़कर 77,884 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया। व्यापक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में देखी गई तेजी के साथ तालमेल बिठाते हुए एथेरियम और रिपल ने भी बिटकॉइन के तटस्थ से सकारात्मक रुख का अनुसरण किया। इस दौरान एथेरियम 2,521 डॉलर के प्रमुख समर्थन स्तर पर टिका रहा, जबकि रिपल 1.38 डॉलर के अपने महत्वपूर्ण स्तर को बनाए रखने में सफल रहा।



















