मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और सऊदी अरब की अहम ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन के अचानक ठप पड़ जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। आपूर्ति व्यवस्था गंभीर रूप से बाधित होने के कारण आईसीई ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गया। पिछले 3 दिनों के दौरान बाजार को इसी मूल्य स्तर के आसपास लगातार कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में उपलब्धता को लेकर गहरी अनिश्चितता पैदा हो गई है, जिससे निकट भविष्य में तेल कीमतों को लगातार मजबूती मिलने के संकेत मिल रहे हैं।
पाइपलाइन ठप होने और नुकसान को लेकर बनी अनिश्चितता
सऊदी अरब की 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है और इसकी मरम्मत में कितना वक्त लगेगा, इसे लेकर अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। ऊर्जा विश्लेषक वारेन पैटरसन और एवा मन्थे के अनुसार जब तक इस बुनियादी ढांचे के नुकसान और बहाली की समयसीमा पर पुख्ता स्पष्टता नहीं मिल जाती, तब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकी रह सकती हैं। विभिन्न आकलनों से संकेत मिल रहे हैं कि यह अहम पाइपलाइन कई हफ्तों तक सेवा से बाहर रह सकती है। पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।
यानबु भंडारण और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े लॉजिस्टिक जोखिम
सऊदी अरब के पास लाल सागर के तट पर स्थित यानबु बंदरगाह के भंडारण टैंकों में तेल मौजूद है। यह सुरक्षित भंडार कुछ दिनों तक सऊदी निर्यात को बनाए रखने में सक्षम है, लेकिन यह केवल एक फौरी राहत ही साबित हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि सबसे बड़ा खतरा यह है कि पाइपलाइन का संचालन दोबारा शुरू होने से पहले ही यानबु बंदरगाह का मौजूदा तेल भंडार पूरी तरह खत्म हो सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए ऐसे संकेत मिले हैं कि सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग से अपना निर्यात बढ़ाने पर विचार कर रहा है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से मौजूद व्यवधानों और टकरावों को देखते हुए इस समुद्री मार्ग से अतिरिक्त कच्चा तेल भेजना कहना जितना आसान है, जमीन पर करना उतना आसान नहीं होगा।
रूस यूक्रेन समझौते के बावजूद रिफाइनिंग मार्जिन पर राहत नहीं
ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर भी वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन एक दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। इसके बावजूद रिफाइनिंग बाजार में मिडिल डिस्टिलेट क्रैक्स में कोई विशेष राहत या नरमी देखने को नहीं मिली है। रिफाइनरी उत्पादों की मांग और आपूर्ति के बीच तनाव लगातार बना हुआ है, जिससे ईंधन उत्पादन की लागत में कमी नहीं आ पा रही है।
मुद्रा बाजारों पर असर और डॉलर में मजबूती
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल ने मुद्रा बाजारों में महंगाई का नया डर पैदा कर दिया है। मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान एयूडी/यूएसडी जोड़ी लगातार दबाव में रही और 0.7150 के नीचे कारोबार करती दिखी, जो पिछले दिन छुए गए तीन हफ्ते से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब है। एफओएमसी बैठक से पहले तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई के जोखिम और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई वर्षों के उच्च स्तर पर बने रहने से अमेरिकी डॉलर को व्यापक समर्थन मिला है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर अतिरिक्त दबाव डाला। इसके साथ ही चीन के अगस्त महीने के मिले जुले आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई गति प्रदान नहीं की।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी हलचल तेज हो गई है। यूएसडी/जेपीवाई मंगलवार सुबह तेजी के साथ 155.00 की ओर बढ़ता दिखा। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दांव और तेल जनित मुद्रास्फीति के दबाव के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की आक्रामक उम्मीदों के चलते जापानी येन को भी आंतरिक समर्थन मिल रहा है, जो यूएसडी/जेपीवाई की आगे की बढ़त को सीमित कर सकता है।
सोने में सुस्ती और एफओएमसी बैठक का इंतजार
ऊर्जा की कीमतों में आग लगने और डॉलर के मजबूत होने के बीच बहुमूल्य धातु बाजार सतर्क रुख अपनाए हुए है। सोना एशियाई सत्र के दौरान अपनी मामूली बढ़त को बनाए रखने में संघर्ष करता नजर आया और पिछले दिन छुए गए एक महीने के निचले स्तर के करीब बना रहा। वर्तमान में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ठीक नीचे कारोबार कर रहा है। आज बाद में शुरू होने वाली दो दिवसीय महत्वपूर्ण एफओएमसी नीतिगत बैठक से पहले निवेशक और कारोबारी किसी भी बड़े दांव से बचते हुए पूरी तरह सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।


















