अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सोसिएते जेनेराल के रणनीतिकारों माइकल हेग और जेरेमी सेलम के अनुसार, दुनिया भर में तेल उत्पाद बाजार अब सामान्य कमी से निकलकर गंभीर संकट के दौर में प्रवेश कर चुका है। आपूर्ति से जुड़े कई मोर्चों पर एक साथ व्यवधान आने से व्यवस्था चरमरा रही है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में रुकावटें, रूसी उत्पादन में आई बाधाएं, समुद्री माल ढुलाई के बढ़े हुए दाम और तेजी से घटता वैश्विक इन्वेंट्री स्तर मिलकर आपूर्ति को संरचनात्मक रूप से सीमित कर रहे हैं। इन विपरीत परिस्थितियों के कारण रिफाइनिंग मार्जिन असामान्य रूप से ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जिससे कच्चे तेल और प्रसंस्कृत उत्पादों का संतुलन बुरी तरह लड़खड़ा चुका है। ऐसी परिस्थितियों में भविष्य के किसी भी नए झटके को झेलने के लिए बाजार के पास कोई बफर नहीं बचा है।
रिफाइनिंग मार्जिन और वैश्विक उत्पाद बाजार पर दबाव
बाजार के मौजूदा ढांचे का बारीक विश्लेषण बताता है कि पेट्रोलियम उत्पादों का संकट लगातार गहराता जा रहा है। गिरती इन्वेंट्री, कमजोर होता निर्यात, रिफाइनरियों से कम आपूर्ति और संयंत्रों के बार-बार बंद होने की बढ़ती घटनाएं वैश्विक बाजार के लगातार संकुचित होने की ओर इशारा कर रही हैं। उत्पादों की भारी मांग और सीमित उपलब्धता के चलते रिफाइनिंग मार्जिन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। अमेरिका, यूरोप और एशिया जैसे प्रमुख उपभोग क्षेत्रों में यह मार्जिन ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर बना हुआ है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि दुनिया भर का रिफाइनिंग नेटवर्क खोई हुई आपूर्ति की भरपाई करने, गोदामों में फिर से स्टॉक जमा करने और दैनिक मांग को पूरा करने की तिहरी चुनौती से एक साथ जूझ रहा है।
चिंता की बात यह है कि दुनिया के दो सबसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद उत्पाद बाजार असाधारण रूप से तंग बना हुआ है। आमतौर पर मांग में नरमी आने से कीमतों और आपूर्ति पर दबाव घटता है, लेकिन इस समय रिफाइनरी शटडाउन, कच्चे तेल के प्रवाह में रुकावट और निर्यात बाधाएं इस कदर हावी हैं कि बाजार की तंगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। तेल शोधन की इस असमर्थता ने प्रसंस्कृत ईंधन की हर श्रेणी में कमी को और गंभीर बना दिया है।
भू-राजनीतिक तनाव और 150 डॉलर प्रति बैरल की चेतावनी
क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। रणनीतिकारों का मानना है कि इन हालिया हमलों ने सैन्य संघर्ष में एक बड़ा विस्तार ला दिया है, जिससे ऊर्जा बुनियादी ढांचे की असुरक्षा खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में बाजार पर गंभीर आपूर्ति झटका लगने की संभावना कई गुना बढ़ गई है। यदि यह सैन्य टकराव इसी तरह गहराता रहा और तेल प्रवाह में व्यवधान लंबे समय तक खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा दायरे से कहीं आगे निकल सकती हैं। ऐसी नकारात्मक स्थिति में ब्रेंट क्रूड के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकते हैं।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों के कदम
ऊर्जा संकट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच वैश्विक वित्तीय और मुद्रा बाजारों में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 0.7100 के ऊपर स्थिर बना रहा। अमेरिकी डॉलर जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर से मामूली सुधार के बाद ठहर गया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट्स पर यथास्थिति बनाए रखने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर कुछ दबाव जरूर बना, लेकिन ट्रम्प-शी शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी के अनुमानों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई कारोबार में 157.00 से नीचे फिसल गई। बैंक ऑफ जापान द्वारा शुक्रवार को किए गए रेट चेक के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को थोड़ी मजबूती दी। इसके अलावा, जापान में अवकाश के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने कारोबारियों को सतर्क रखा है। भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर की गिरावट को थाम दिया, जिससे येन की बढ़त भी सीमित दायरे में सिमट गई।
सोने में गिरावट, बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों की नीतियां
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर भी इस माहौल में बिकवाली का दबाव देखा गया। दो दिनों की लगातार बढ़त के बाद सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की उम्मीदों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने पीली धातु की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है।
तीसरी तिमाही के अंतिम सप्ताहों में प्रवेश करते समय वित्तीय बाजार एक विचित्र स्थिति में नजर आ रहे हैं। चारों तरफ फैली अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव के बावजूद एक तरफ जहां कच्चे तेल के तात्कालिक हाजिर भाव में नरमी रही, वहीं यूरोपीय और अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ खुलने की तैयारी में दिखे। बाजार का असली तनाव संप्रभु बॉन्ड बाजार में केंद्रित है, जहां शुक्रवार देर रात यूरोपीय और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में घबराहट भरी तेजी देखी गई। इसी बीच, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। नीति निर्माताओं ने 7-2 के बहुमत से यह निर्णय लिया, जो कई सप्ताह से बाजार की आम उम्मीदों के पूरी तरह अनुरूप रहा।



















