अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक अस्थिरता और आपूर्ति से जुड़ी ढांचागत समस्याओं ने कच्चे तेल की कीमतों को फिर से तेज उछाल की ओर धकेल दिया है। ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड के बढ़ते स्प्रेड ने स्पष्ट कर दिया है कि रिफाइनरियां समय पर कच्चा तेल हासिल करने के लिए भारी मशक्कत कर रही हैं। यह स्थिति केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने अमेरिकी डॉलर, वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल, प्रमुख एशियाई मुद्राओं और सोने के कारोबार को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
भौतिक तेल बाजार में आपूर्ति का बढ़ता दबाव
भौतिक तेल बाजार में तंगी लगातार गहरी होती जा रही है। इसका सबसे स्पष्ट संकेत डेटेड ब्रेंट और फ्रंट फ्यूचर अनुबंध के बीच बढ़ते अंतर से मिलता है, जो अप्रैल के मध्य के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। रिफाइनरियों द्वारा तत्काल तेल की आपूर्ति सुरक्षित करने की होड़ ने इस प्रीमियम को काफी बढ़ा दिया है। विश्लेषक बेंजामिन पिक्टन के अनुसार, भू-राजनीतिक जोखिमों के गहराने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं।
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार यानी एसपीआर से अतिरिक्त तेल निकासी के अंत और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार बनी व्यवधान की स्थिति से आ रहा है। इस अहम समुद्री मार्ग से होने वाली आपूर्ति में रुकावटों ने वैश्विक खरीदारों की घबराहट बढ़ा दी है। इसके अलावा, अमेरिकी तेल भंडारों में गिरावट और गैसोलीन की आसमान छूती कीमतों ने इस बात की अटकलों को हवा दी है कि प्रशासन नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले चुनिंदा तेल उत्पादों पर निर्यात प्रतिबंध लगाने का फैसला ले सकता है। हालांकि, आंतरिक सचिव डग बर्गम ने इस संभावना को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के कदमों से कीमतों को नीचे लाने में कोई वास्तविक मदद नहीं मिलेगी।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की बैठकें
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति के दोबारा भड़कने का खतरा पैदा हो गया है, जिसने अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में बना हुआ है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में एयूडी/यूएसडी 0.7150 के नीचे फिसल गया, जो बीते कारोबारी दिन दर्ज किए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब है। इसके साथ ही अगस्त महीने के लिए चीन के मिले-जुले आर्थिक गतिविधि आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई सहारा नहीं दिया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी भारी हलचल देखी जा रही है। शुरुआती मंगलवार के कारोबार में यूएसडी/जेपीवाई 155.00 के स्तर की ओर चढ़ता दिखा। निवेशक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठकों पर नजरें टिकाए हुए हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की दांव और तेल जनित महंगाई जोखिमों ने डॉलर को बढ़त दी है। इसके बावजूद, बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की आक्रामक संभावनाओं ने येन को नीचे से सहारा दिया है, जिससे यूएसडी/जेपीवाई की तेज बढ़त सीमित रह सकती है।
सोने की कीमतों पर मौद्रिक सख्ती का साया
बढ़ती महंगाई और ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल के बीच पीली धातु की मांग भी सीमित दायरे में घिर गई है। एशियाई कारोबारी सत्र में मामूली सुधार के बावजूद सोना अपनी बढ़त को टिकाने के लिए संघर्ष करता दिखा और अपने एक महीने के निचले स्तर के बेहद पास बना रहा, जिसे उसने पिछले दिन छुआ था।
वर्तमान में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ठीक नीचे कारोबार कर रहा है। फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय नीतिगत बैठक से पहले व्यापारी सतर्क रुख अपनाते हुए बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की संभावना और मजबूत अमेरिकी मुद्रा ने बुलियन बाजार में निवेशकों के उत्साह को फिलहाल ठंडा कर रखा है।



















