अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो को लेकर रणनीतिकारों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी द्वारा अपनाए जाने वाले नपे-तुले सख्त रुख से आने वाले समय में करेंसी को जरूरी सहारा मिल सकता है। हालिया कारोबारी सत्रों में वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और यूरोप में बढ़ती ऊर्जा कीमतों के जोखिम के चलते यूरो पर भारी दबाव देखा गया है। इसके बावजूद टिकाऊ आर्थिक वृद्धि और लगातार बने हुए महंगाई के दबावों के बीच नीति निर्माताओं का ध्यान दरों को हल्के प्रतिबंधात्मक दायरे में वापस लाने पर केंद्रित है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ईसीबी दिसंबर में 25 आधार अंकों की एक अंतिम बढ़ोतरी कर सकता है, जिसके बाद डिपॉजिट दर बढ़कर 2.75 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
ईसीबी की नीतिगत दिशा और यूरो-डॉलर का ताजा गणित
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में EUR/USD की जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक फिसल गई, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा जनवरी के शिखर 1.2082 से काफी नीचे बना हुआ है। यूरो में आई यह तीव्र गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर की चौतरफा तेजी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली भू-राजनीतिक चिंताओं और ऊर्जा लागतों को लेकर यूरोप की संवेदनशील स्थिति का नतीजा है। हालांकि यूरोजोन में महंगाई का एक नया झटका साझा मुद्रा को अप्रत्याशित राहत प्रदान कर सकता है। आर्थिक आंकड़े और मुद्रास्फीति के बुनियादी संकेतक व्यापक रूप से एक ऐसी नपी-तुली मौद्रिक सख्ती के अनुकूल बने हुए हैं, जिसका अंतिम लक्ष्य नीति को मामूली प्रतिबंधात्मक दायरे में पहुंचाना है।
बाजार की पोजिशनिंग पर नजर रखने वाली वित्तीय फर्म टीडी सिक्योरिटीज ने EUR/USD पर साल के अंत के लिए अपना तेजी यानी बुलिश पूर्वानुमान बरकरार रखा है। इस परिदृश्य को देखते हुए तीन महीने के रिस्क रिवर्सल के जरिए अमेरिकी डॉलर की व्यापक रैली के खिलाफ रुख अपनाने की रणनीति सामने रखी गई है। डेरिवेटिव्स और ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप यानी OIS बाजारों की बात करें तो वहां 2026 के अंत तक ईसीबी की ओर से लगभग 31 आधार अंकों की सख्ती की संभावना जताई जा रही है। वहीं 2027 के अंत तक संचयी रूप से करीब 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी आंकी जा रही है, जो टर्मिनल दर को लगभग 3.5 प्रतिशत तक ले जाएगी। यह स्तर कई ईसीबी नीति निर्माताओं द्वारा संदर्भित 2.5 प्रतिशत की तटस्थ यानी न्यूट्रल दर से कहीं अधिक ऊपर है।
एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की चाल
वैश्विक करेंसी बाजारों में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को AUD/USD लगभग दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। इस गिरावट की मुख्य वजह ऑस्ट्रेलिया में अगस्त महीने के उम्मीद से कमजोर कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आंकड़े रहे, जिसने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। इसके अतिरिक्त चीन के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़ों से भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई सकारात्मक सहारा नहीं मिल सका, भले ही उस दौरान अमेरिकी डॉलर की आक्रामक बढ़त कुछ समय के लिए थमती नजर आई थी।
दूसरी ओर USD/JPY की जोड़ी में भी कमजोरी बनी रही और यह एशियाई सत्र में 157.00 के स्तर से नीचे फिसलती नजर आई। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त मौद्रिक नीति अपनाए जाने की बढ़ती अपेक्षाओं और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने जापानी येन को मजबूत सहारा दिया। इस दबाव के चलते जापान के घरेलू स्तर पर जारी कमजोर फैक्ट्री उत्पादन और खुदरा बिक्री के नकारात्मक आंकड़े भी येन की मजबूती को नहीं रोक पाए। साथ ही वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के थोड़े पीछे हटने ने भी USD/JPY के नीचे आने में बराबर का योगदान दिया।
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और क्रिप्टो बाजार का मिजाज
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में तेज अस्थिरता देखने को मिली। अमेरिकी सत्र की शुरुआत में उम्मीद से कम मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद सोने ने 4,220 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया था। अमेरिका में मुद्रास्फीति के उत्साहजनक आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, खासकर तब जब रोजगार और विकास से जुड़े आर्थिक आंकड़ों ने अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन किया था। हालांकि पीली धातु अपनी इस शुरुआती तेजी की लय को बरकरार रखने में असमर्थ रही और बाद में 4,180 डॉलर के आसपास सपाट दायरे में कारोबार करती देखी गई।
डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बुधवार का दिन काफी सुस्त रहा। शीर्ष क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 83,000 डॉलर के तत्काल सपोर्ट स्तर को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करती दिखी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एथेरियम ने भी बिटकॉइन के अनुरूप ही रुख दिखाया और यह ऊपर की ओर 2,700 डॉलर के प्रमुख स्तर तथा नीचे की ओर 2,600 डॉलर के स्तर के बीच सीमित दायरे में बनी रही। तीसरी प्रमुख डिजिटल करेंसी रिपल यानी XRP भी इस दौरान लगभग 1.50 डॉलर के आसपास मंडराती नजर आई, जिससे पूरे डिजिटल एसेट बाजार में संभलकर चलने का माहौल बना रहा।



















