वैश्विक इक्विटी बाजारों में जोरदार सुधार का दौर देखने को मिला है, जहां अमेरिकी बेंचमार्क सूचकांक एसएंडपी 500 और नैस्डैक दोनों ने ही नई रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू लिया। बीते कारोबारी सत्र में दोनों सूचकांकों में क्रमशः 0.5% और 0.6% की बढ़त दर्ज की गई। सप्ताह के शुरुआती सत्रों की तुलना में यह तेजी मुख्य रूप से एक राहत भरी रैली के रूप में सामने आई। बाजार में सबसे अधिक मजबूती उन क्षेत्रों में देखी गई जो हाल के महीनों में लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहे थे। यूटिलिटीज, रियल एस्टेट और कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी से जुड़े शेयरों में दिन के कारोबार के दौरान 1% से लेकर 3% तक की जोरदार बढ़त दर्ज की गई, जिसने समग्र बाजार धारणा को मजबूती प्रदान की।
मैक्रो चुनौतियों और बढ़ते वैल्यूएशन का गणित
शेयर बाजार का यह नया ऑल-टाइम हाई कई निवेशकों को हैरान कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में ताजा तनाव बढ़ा हुआ है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, बॉन्ड यील्ड में तेजी का रुख है और केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को सख्त करने में जुटे हैं। हालांकि, गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि एसएंडपी 500 ने बीते एक साल के दौरान अपने वैल्यूएशन मल्टीपल में से लगभग पांचवां हिस्सा गंवा दिया है। हालिया तेजी के बाद भी केवल पिछली तिमाही में ही एसएंडपी 500 करीब 5% तक सस्ता हुआ है। इस आधार पर यह माना जा रहा है कि मौजूदा इक्विटी बाजार किसी अत्यधिक आशावाद से ग्रस्त नहीं हैं, बल्कि बाजारों ने पूरे वर्ष के दौरान अर्निंग्स के परिदृश्य को काफी सतर्क और रूढ़िवादी तरीके से आंका है।
कंपनियों की अर्निंग्स और ग्रोथ की भूमिका
शेयर बाजार के प्रदर्शन के लिए सबसे बड़ा और निर्णायक कारक भविष्य में होने वाली नॉमिनल अर्निंग्स ग्रोथ ही बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों के झटके का असर स्पष्ट रूप से दिख रहा है, जो कुछ विशिष्ट सेक्टर्स पर अन्य की तुलना में अधिक भारी पड़ा है। इसके साथ ही ऊंची ब्याज दरें भी बाजार के कुछ हिस्सों पर दबाव बना रही हैं। इसके बावजूद, ब्रॉड इक्विटी परफॉर्मेंस का मुख्य आधार कंपनियों की कमाई ही तय कर रही है, बशर्ते निवेश पर मिलने वाला रिटर्न डिस्काउंट रेट की तुलना में तेजी से बढ़ता रहे, जो कि अब तक की स्थिति में बरकरार है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और प्रमुख जोड़ियों पर दबाव
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ाने में संघर्ष करता नजर आया और 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहा था। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने अमेरिकी डॉलर में निचले स्तरों पर लिवाली को आकर्षित किया। इसके चलते रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में बना रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों की निगाहें अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठकों के मिनट्स पर टिकी हुई हैं।
इसी तरह, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर के पास टिका रहा। तकनीकी मोर्चे पर बुल्स 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज के अहम स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फेडरल रिजर्व के मिनट्स से पहले आगे की पोजीशन बनाई जा सके। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने डॉलर की मांग को फिर से हवा दी है, जबकि बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों ने इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया है। वहीं भारतीय रुपये की बात करें तो भारतीय रिज़र्व बैंक के मौद्रिक नीति निर्णय के बाद यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.37 के आसपास काफी हद तक शांत रहा। अपनी नीतिगत बैठक में रिज़र्व बैंक ने रेपो दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5% कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली ब्याज दर वृद्धि है। दूसरी तरफ यूरोपियन सेंट्रल बैंक के सामने महंगाई को लेकर जटिल दुविधा खड़ी है, क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक रूप से वित्तीय सख्ती कर चुका है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जारी गिरावट
कमोडिटी बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव लगातार बना रहा। एशियाई सत्र के दौरान सोना अपने दो महीने के निचले स्तर यानी लगभग $4,100 के आसपास कारोबार करता दिखा, जिसे इसने पिछले दिन छुआ था। अमेरिकी डॉलर की लौटती मांग को सोने पर दबाव डालने वाला प्राथमिक कारक माना जा रहा है। सर्राफा कारोबारी भी बाजार की अगली दिशा के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं।
डिजिटल एसेट मार्केट में डॉगकॉइन में गिरावट का सिलसिला और गहरा गया। इस हफ्ते 5% से अधिक लुढ़कने के बाद टोकन $0.090 के दायरे में आ गया, जहां लाइव मार्केट डेटा के अनुसार कीमत $0.0908 दर्ज की गई, जो पिछले बंद भाव $0.0954 से 4.84% नीचे है। डॉगकॉइन का 52-सप्ताह का दायरा $0.0680 से $0.1273 का रहा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.02 गुना पर रहा। बाजार में मंदी का दबाव काफी बढ़ चुका है, जहां शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और तकनीकी संकेतकों में कमजोरी देखी जा रही है। डेरिवेटिव डेटा भी ट्रेडर्स के बीच अत्यधिक सतर्कता का संकेत दे रहा है। 14-दिवसीय आरएसआई 49 पर न्यूट्रल है, जबकि एमएसीडी 0.00 पर सिग्नल लाइन 0.00 के मुकाबले मंदी का रुझान दिखा रहा है। 50-दिवसीय ईएमए ($0.0883) का 200-दिवसीय ईएमए ($0.0937) से नीचे होना लॉन्ग-टर्म डाउनट्रेंड और डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स $0.0844 से $0.1025 के बीच हैं, 14-दिवसीय एडीएक्स 28 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, और स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 7 तथा सिग्नल लाइन 29 पर स्थित है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से पिवट पॉइंट $0.0915 पर है, पहला रेजिस्टेंस $0.0932 और दूसरा $0.0956 पर है, जबकि सपोर्ट $0.0891 और $0.0873 पर बना हुआ है।


















