अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन पर दबाव बना रहा। एमयूएफजी के विश्लेषक माइकल वान ने रेखांकित किया है कि यूएसडी/जेपीवाई मुद्रा जोड़ी अभी भी 158 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (बीओजे) के गवर्नर काजुओ उएदा की हालिया टिप्पणियां इस बात की ओर लगातार इशारा कर रही हैं कि केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी येन में किसी भी ठोस और टिकाऊ मजबूती के लिए केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में उम्मीद से तेज बढ़ोतरी करनी होगी।
मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक जोखिमों पर गवर्नर उएदा का रुख
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा ने बुनियादी मुद्रास्फीति को 2% के लक्षित दायरे में स्थिर रखने के महत्व पर विशेष बल दिया है। उन्होंने नीतिगत रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता जताते हुए कई ऐसे कारकों का उल्लेख किया जो भविष्य में महंगाई को और बढ़ा सकते हैं। उएदा के अनुसार, आयातित वस्तुओं की बढ़ती लागत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी तेज वैश्विक मांग और जापानी येन की मौजूदा कमजोरी ऐसे प्रमुख जोखिम हैं जो मूल्य वृद्धि पर ऊपर की तरफ दबाव बना सकते हैं। इन तमाम जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक धीरे-धीरे अपनी ढीली मौद्रिक नीति से पीछे हटने के संकेत दे रहा है। हालांकि, बाजार सहभागियों का मानना है कि जब तक वास्तविक नीतिगत बदलाव तेजी से लागू नहीं होते, तब तक जापानी मुद्रा को भारी मजबूती मिलना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
10-वर्षीय जापानी बॉन्ड नीलामी और घरेलू परिसंपत्तियों का रुझान
दूसरी तरफ, जापानी सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेशकों की उल्लेखनीय दिलचस्पी देखने को मिली। 10-वर्षीय जेजीबी नीलामी में सामान्य से बेहतर मांग दर्ज की गई, क्योंकि 3% से ऊपर की यील्ड ने खरीदारों को जोरदार तरीके से आकर्षित किया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि देश के राजकोषीय तनाव और चिंताओं के बावजूद निवेशकों को लंबी अवधि के जोखिम के लिए बेहतर रिटर्न मिल रहा है। हालांकि, नीलामी के इन मजबूत नतीजों ने यील्ड पर और ऊपर की ओर दबाव बनने की संभावना को सीमित भी कर दिया है। इसके अतिरिक्त, बाजार में आए नवीनतम आंकड़ों और रिपोर्टों को घरेलू संपत्तियों की ओर किसी बड़े बदलाव के बजाय मौजूदा पोर्टफोलियो आवंटन के जारी रहने के संकेत के रूप में देखा गया। इससे येन के लिए अतिरिक्त ढांचागत मांग पैदा होने की उम्मीदें कमजोर हुईं और व्यापारियों द्वारा येन में बनाई गई लॉन्ग पोजीशंस को समेटने का सिलसिला शुरू हो गया।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और तकनीकी स्तरों की स्थिति
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर के पास टिका रहा। तकनीकी मोर्चे पर ट्रेडर्स अब किसी बड़ी तेजी से पहले 200-दिवसीय एसएमए बाधा को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूएसडी/जेपीवाई 158.32 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 157.96 से 0.22% की दैनिक बढ़त दिखाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 149.41 से 163.98 के बीच रहा है। दैनिक तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 56 पर है, जबकि एमएसीडी 0.13 और सिग्नल -0.13 पर अनुकूल संकेत दे रहे हैं। ईएमए50 158.00 और ईएमए200 157.75 के साथ गोल्डन क्रॉस अपट्रेंड को पुष्ट कर रहे हैं, जबकि एसएमए200 158.51 पर प्रमुख प्रतिरोध के रूप में खड़ा है। निकट अवधि में पिवट स्तर 158.29 है, जिसके लिए रेजिस्टेंस आर1 158.54 व आर2 158.77 और सपोर्ट एस1 158.06 व एस2 157.80 पर स्थित हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डॉलर में फिर से खरीदार सक्रिय हो गए हैं, जिससे एफओएमसी मिनट्स से पहले डॉलर को मजबूती मिल रही है।
वैश्विक मुद्राओं, कमोडिटी और अन्य परिसंपत्तियों का हाल
डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (एयूडी/यूएसडी) अपनी पिछली रिकवरी को भुनाने में असफल रहा और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक (आरबीए) के सख्त रुख की अपेक्षाओं के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के चलते ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा दबाव में रही। वहीं, सोने में भी बिकवाली का दबाव बना रहा और यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास के स्तर पर दो महीने के निचले दायरे के करीब ट्रेड करता नजर आया।
डिजिटल एसेट बाजार में डॉगकॉइन में गिरावट का दायरा बढ़ता दिखा, जहां टोकन 0.090 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था और इस सप्ताह इसमें 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। शॉर्ट पोजीशंस एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कमजोर गति संकेतकों के कारण इसमें और गिरावट की आशंका बनी हुई है। घरेलू मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मौद्रिक नीतिगत फैसले के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.37 के स्तर पर लगभग शांत बना रहा। अपनी बैठक में आरबीआई ने रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5% करने का फैसला किया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है। अंत में, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) भी लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही मुद्रास्फीति और बॉन्ड बाजार की खुद-ब-खुद सख्त होती स्थितियों के बीच एक जटिल दुविधा का सामना कर रहा है।























