अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार को एक बार फिर मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट और अमेरिकी डॉलर के नरम पड़ने से बहुमूल्य पीली धातु को निचले स्तरों से उबरने में मदद मिली। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान हाजिर सोना गिरकर दो महीने के निचले स्तर 4,104 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया था, लेकिन इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता देखने को मिली। दिन के दौरान सोने का भाव 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,156 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। हालिया कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सत्र में सोना सुधरकर 4,191 डॉलर तक पहुंचा, जो पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर के मुकाबले 0.83 प्रतिशत की मजबूती दर्शाता है।
ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स में नरमी से मिली राहत
अमेरिकी बॉन्ड बाजार में आई नरमी ने बहुमूल्य धातुओं के लिए राहत का काम किया है। मानक 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, जो सोमवार को 5.349 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी, घटकर करीब 5.269 प्रतिशत पर आ गई। उल्लेखनीय है कि 5.349 प्रतिशत का स्तर साल 2002 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था। सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरों में इस ठहराव से डॉलर पर भी दबाव बना।
छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की चाल दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) पिछले कारोबारी सत्र में 102.53 के नए वार्षिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद फिसलकर 102.00 की ओर आ गया। डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों के नरम पड़ने से सोने के खरीदारों को कुछ सांस लेने का मौका मिला है। हालांकि, तकनीकी दृष्टिकोण से यह उछाल अभी भी सीमित दायरे में बना हुआ है और सोना मुख्य रूप से 4,100 डॉलर से 4,200 डॉलर प्रति औंस के दायरे में फंसा हुआ है।
फेडरल रिजर्व की नीति और ब्याज दरों का दबाव
फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं के कारण सोने की बड़ी तेजी पर ब्रेक लगा हुआ है। बाजार सहभागियों का मानना है कि अक्टूबर में दरों में बढ़ोतरी थमने से अल्पावधि में सोने को सहारा जरूर मिला है, लेकिन व्यापक रिकवरी की राह कठिन बनी हुई है। फेडरल रिजर्व अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य 2 प्रतिशत को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी का विकल्प खुला हुआ है। उच्च उधारी लागत गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग को सीमित करती है।
उधर, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बना गतिरोध ऊर्जा-संचालित मुद्रास्फीति जोखिमों को बढ़ाए हुए है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तरों से ऊपर बनी हुई हैं। इसके बावजूद खाड़ी देशों से निर्यात में सुधार और आपातकालीन भंडार से तेल जारी किए जाने के कारण कीमतों पर दबाव देखा गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो लगभग एक महीने का निचला स्तर है।
मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख जोड़ियों की स्थिति
विदेशी मुद्रा बाजार में भी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के उतार-चढ़ाव का असर साफ दिखा। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह छुए गए दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिन की रिकवरी थम गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बने रहने और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने डॉलर को मजबूती दी। हालांकि, इस महीने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दे सकती हैं।
दूसरी तरफ, शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी उम्मीदों और संभावित करेंसी हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन कमजोर रहा। अक्टूबर में फेड की दर वृद्धि की कम होती संभावनाओं के बावजूद डॉलर मजबूत बना रहा, जिससे इस मुद्रा जोड़ी को बढ़त मिली।
यूरोपीय बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां
वैश्विक वित्तीय बाजारों में आज किसी बड़े प्रथम श्रेणी के आर्थिक आंकड़े के जारी होने का कार्यक्रम नहीं है। निवेशकों का पूरा ध्यान यूरोपीय बाजार के घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थितियों पर टिका हुआ है। फ्रांस में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बजट के मुद्दे पर सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली मौजूदा सरकार को गिराने की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष भी आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। आमतौर पर अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी मुद्रास्फीति को काबू करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में तेज वृद्धि का सहारा लेता है। लेकिन मौजूदा दौर में बॉन्ड बाजार की बिकवाली ने पहले ही वित्तीय स्थितियों को कड़ा कर दिया है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के सामने एक जटिल दुविधा खड़ी हो गई है।
तकनीकी विश्लेषण: प्रमुख स्तर और संकेतक
दैनिक तकनीकी चार्ट पर XAU/USD का रुख अल्पावधि में दबाव वाला बना हुआ है, क्योंकि भाव 4,263 डॉलर पर स्थित 20-दिवसीय बोलिंजर सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के नीचे बना हुआ है। गति संकेतक भी नरमी का संकेत दे रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 40 के आसपास बना हुआ है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) नकारात्मक दायरे में बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि नजदीकी समर्थन स्तरों के ऊपर स्थिरता के बावजूद दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का 14-दिवसीय RSI 38 पर दर्ज किया गया है। वहीं MACD शून्य से नीचे -66.69 पर है, जो सिग्नल लाइन -48.82 के नीचे बना हुआ है (हिस्टोग्राम -17.87)। मूविंग एवरेज संकेतकों में 20-दिवसीय ईएमए 4,285 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,333 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को रेखांकित करती है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,104 डॉलर से 4,508 डॉलर (मध्य स्तर 4,306 डॉलर) के बीच हैं और भाव इन्हीं सीमाओं के भीतर है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 20 पर है, जो दायरे में सीमित कारोबार को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 20 और सिग्नल लाइन 10 पर है।
सोने के लिए 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 91.10 डॉलर पर है, जो दैनिक अस्थिरता के आधार पर स्टॉप-लॉस निर्धारित करने का प्रमुख पैमाना है। 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 4,131 डॉलर और प्रतिरोध स्तर 4,480 डॉलर पर स्थित है। दैनिक पिवट स्तर 4,172 डॉलर पर है। ऊपर की ओर पहला प्रतिरोध R1 4,213 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 4,235 डॉलर पर देखा जा रहा है। नीचे की तरफ पहला समर्थन स्तर S1 4,150 डॉलर और दूसरा समर्थन स्तर S2 4,109 डॉलर पर है। पिछले 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। मनोवैज्ञानिक स्तर 4,100 डॉलर और लोअर बोलिंजर बैंड 4,087 डॉलर का क्षेत्र शुरुआती मांग क्षेत्र है। यदि भाव इस स्तर से नीचे फिसलता है, तो 4,000 डॉलर से 3,950 डॉलर का क्षैतिज समर्थन क्षेत्र परीक्षण के दायरे में आ सकता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश का आधार
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो सोने का आकर्षण बरकरार है। बढ़ते सरकारी कर्ज और राजकोषीय चिंताओं ने उधारी लागत बढ़ाई है, लेकिन इसी पृष्ठभूमि में सोने की वैल्यू स्टोर करने की क्षमता भी मजबूत हुई है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग और गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) में पूंजी प्रवाह पीली धातु की मांग को मजबूती प्रदान कर रहा है।
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा विनिमय के माध्यम और मूल्य संरक्षण के साधन के रूप में केंद्रीय भूमिका निभाई है। आभूषणों के उपयोग के अलावा इसे संकट के दौर में सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है। किसी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत बचाव माना जाता है।
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडारों में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कुल कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से यह किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीद थी। भारत, चीन और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को मजबूती देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए लगातार सोने की होल्डिंग बढ़ा रहे हैं।
सोने का अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड के साथ उल्टा संबंध होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है और इसकी मांग बढ़ती है। इसी प्रकार, शेयर बाजारों में तेज उछाल के समय सोने की मांग में कमी आती है, जबकि जोखिम भरी संपत्तियों में बिकवाली के समय निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं। वर्तमान में कमजोर डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में नरमी ने सोने को आधार दिया है, लेकिन फेड की नीतियों और तकनीकी बाधाओं के बीच 4,200 डॉलर का स्तर पार करना सबसे अहम चुनौती बना हुआ है।























