अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हालिया तेजी के बाद कुछ मजबूती जरूर दिखाई है, लेकिन आगे की राह पर कड़ा अवरोध खड़ा नजर आ रहा है। यूनाइटेड ओवरसीज बैंक यानी यूओबी के तकनीकी मूल्यांकन के अनुसार, मुद्रा जोड़ी में हालिया बढ़त के बाद ऊपर की तरफ 1.3315 का स्तर पार करना काफी मुश्किल साबित हो सकता है। बाजार में दैनिक और साप्ताहिक रुझान यह दर्शा रहे हैं कि सीमित उछाल के बावजूद खरीदारों के पास लंबी रैली जारी रखने के लिए पर्याप्त रफ्तार नहीं है।
दैनिक दायरे से बाहर निकला पाउंड और तात्कालिक स्तर
अल्पकालिक समय सीमा में ब्रिटिश पाउंड की चाल ने शुरुआती अनुमानों को झुठला दिया था। दो दिन पहले के मूल्य व्यवहार को देखने के बाद विश्लेषकों का मानना था कि तेजी या मंदी में से किसी भी दिशा में स्पष्ट गति नहीं बन रही है और पाउंड 1.3195 से 1.3245 के सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। हालांकि, बाजार ने इस दायरे को तोड़ते हुए 1.3286 का ऊपरी स्तर छू लिया, जिससे तेजी की रफ्तार में मामूली इजाफा दर्ज किया गया।
वर्तमान 24 घंटे के परिदृश्य को देखते हुए पाउंड के लिए 1.3285 के स्तर का दोबारा परीक्षण करने की संभावना बनी हुई है। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस स्तर से आगे लगातार बढ़त बने रहने के आसार बेहद कम हैं। ऊपर की ओर 1.3315 का बड़ा प्रतिरोध स्तर किसी गंभीर चुनौती के दायरे में आता नहीं दिख रहा है। नीचे की तरफ अगर बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो पहला सहारा 1.3240 पर मिलेगा, जिसके बाद अगला अहम सपोर्ट 1.3220 के स्तर पर स्थित है।
एक से तीन सप्ताह का व्यापक तकनीकी दृष्टिकोण
व्यापक नजरिए से देखें तो पिछले शुक्रवार यानी 2 अक्टूबर को जब स्पॉट स्तर 1.3195 पर था, तब नीचे की ओर मंदी का दबाव बनने की बात कही जा रही थी, हालांकि वह दबाव बहुत मजबूत नहीं था। उस समय संभावना जताई गई थी कि पाउंड खिसककर 1.3140 के प्रमुख सपोर्ट स्तर की ओर जा सकता है। लेकिन बीते सत्र में पाउंड ने मजबूती दिखाते हुए 1.3265 के कड़े प्रतिरोध स्तर को पार कर लिया और पुराने मंदी के रुख को अमान्य कर दिया।
इस तकनीकी बदलाव के बाद तेजी की रफ्तार में मामूली बढ़त आई है और पाउंड धीरे-धीरे 1.3315 की दिशा में आगे बढ़ सकता है। मौजूदा तकनीकी रुझान के आधार पर 1.3315 से ऊपर की निरंतर तेजी संभव नहीं मानी जा रही है। इस हल्की तेजी की लय को बरकरार रखने के लिए पाउंड को अपने मजबूत सपोर्ट स्तर 1.3200 के ऊपर बने रहना अनिवार्य होगा।
लाइव तकनीकी संकेतक और लंबी अवधि के रुझान
मौजूदा क्लोजिंग सत्र के रियल-टाइम तकनीकी आंकड़ों पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी जोड़ी 1.32 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले 1.32 के बंद भाव के मुकाबले 0.19 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाती है। 52 हफ्तों के दौरान इसका दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि मौजूदा वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना के बराबर बना हुआ है।
तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 38 पर दर्ज किया गया है, जो कमजोर स्थिति का संकेत देता है। एमएसीडी (MACD) -0.01 पर है जबकि सिग्नल लाइन भी -0.01 पर है, जिससे हिस्टोग्राम -0.00 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 1.33, 50-दिवसीय ईएमए 1.34 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर हैं। वहीं 50-दिवसीय एसएमए 1.35 और 200-दिवसीय एसएमए 1.34 पर स्थित हैं। 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाने से डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 1.31 से 1.36 के बीच हैं जिसका मध्य स्तर 1.33 है, और कीमतें इन्हीं बैंड्स के भीतर हैं। इसके अलावा 14-दिवसीय एडीएक्स (ADX) 33 पर ट्रेंडिंग चरण दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 29 और सिग्नल लाइन 21 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर दैनिक अस्थिरता दर्शाता है। पिवट स्तर 1.33 पर है, जहां रेजिस्टेंस R1 और R2 दोनों 1.33 पर हैं तथा सपोर्ट S1 और S2 दोनों 1.32 पर मौजूद हैं। विश्लेषकों का यह भी आकलन है कि यदि भाव 1.3180 के नीचे फिसलता है तो गिरावट का दबाव और तेज हो सकता है।
वैश्विक मुद्राओं और बॉन्ड यील्ड का व्यापक माहौल
फॉरेक्स बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों की स्थिति भी अमेरिकी डॉलर की मांग से प्रभावित हो रही है। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में ताजा उछाल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण डॉलर में निचले स्तरों पर लिवाली लौट रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) हालिया सुधार को आगे बढ़ाने में संघर्ष कर रहा है और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा, भले ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से सख्त रुख की उम्मीदें बनी हुई हैं। बाजार की नजरें अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी (FOMC) के मिनट्स पर टिकी हैं।
उधर यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) एशियाई सत्र के दौरान 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर मंडरा रहा है। डॉलर खरीदार एफओएमसी मिनट्स से पहले 200-दिवसीय एसएमए की बाधा पार करने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान के नरम बयानों और अमेरिकी यील्ड में तेजी ने इस जोड़ी को सहारा दिया है। कमोडिटी बाजार में सोने पर भी दबाव बना हुआ है और वह बुधवार को पिछले दिन छुए गए दो महीने के निचले स्तर यानी लगभग 4,100 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी, भारतीय रुपया और ईसीबी की दुविधा
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) में गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह 0.090 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा, जो इस सप्ताह अब तक 5 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है। इसमें शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और डेरिवेटिव डेटा ट्रेडर्स की सतर्कता दर्शा रहा है।
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मोटे तौर पर 96.37 के आसपास शांत रहा। इस नीति बैठक में आरबीआई ने अपनी रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.5 प्रतिशत कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली ब्याज दर वृद्धि है। वहीं यूरोप में यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी होने के कारण दरें बढ़ाने का दबाव है, लेकिन बॉन्ड बाजार पहले ही सख्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है, जिससे बैंक के सामने नीतिगत असमंजस की स्थिति बन गई है।






















