अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीति फैसले से ठीक पहले वैश्विक मुद्रा बाजारों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोरी के साथ 0.7125 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निवेशक और नीति विशेषज्ञ शाम 18:00 जीएमटी पर आने वाले आधिकारिक नीतिगत ऐलान की प्रतीक्षा में अपनी जोखिम भरी पोजीशन को सीमित कर रहे हैं। बाजार में यह व्यापक उम्मीद बनी हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक उधार लागत में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करके नीतिगत ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा सकता है। इस संभावित कदम और भविष्य के अनुमानों को लेकर डॉलर इंडेक्स लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर 99.70 पर अपनी बढ़त बनाए हुए है।
मुद्रास्फीति का दबाव और केंद्रीय बैंक का दृष्टिकोण
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हाल ही में सामने आए मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने नीति निर्धारकों के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। कमर्जबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में हालिया अप्रत्याशित उछाल फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के अधिकांश सदस्यों को ब्याज दरों में वृद्धि के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार ऐसा फैसला फेडरल रिजर्व की बाजार में विश्वसनीयता को मजबूत करने और नीतिगत संकल्प को साबित करने में मदद करेगा।
हालांकि विश्लेषकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया केवल दरों में वृद्धि के तात्कालिक फैसले तक सीमित नहीं रहेगी। इसके साथ जारी होने वाले डॉट प्लॉट और आर्थिक अनुमान भविष्य की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि अनुमानों से यह संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में और अधिक दर वृद्धि संभव है, तो बाजार इसे इस बात की पुष्टि मानेगा कि बेंचमार्क ब्याज दरें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर को नई मजबूती मिल सकती है और जोखिम संवेदनशील संपत्तियों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर प्रमुख समर्थन
चार्ट विश्लेषण के लिहाज से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी के लिए ऊपरी स्तरों पर 20 अवधि का घातीय गतिमान औसत यानी ईएमए 0.7152 पर तत्काल प्रतिरोध के रूप में खड़ा है। जब तक दैनिक आधार पर इस स्तर से ऊपर का बंद भाव दर्ज नहीं होता, तब तक बिकवाली का दबाव कम होना मुश्किल माना जा रहा है। यदि यह जोड़ी 0.7152 के स्तर को पार करने में सफल रहती है, तो सुधारात्मक तेजी के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।
दूसरी तरफ नीचे की ओर 14 सितंबर के निचले स्तर 0.7108 के पास तत्काल समर्थन क्षेत्र स्थित है। यदि मुद्रा जोड़ी इस समर्थन रेखा को बनाए रखने में विफल रहती है, तो यह गिरावट को और गहरा कर सकती है और भाव 0.7050 के स्तर तक फिसल सकते हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में यह जोड़ी लगातार तीसरे दिन नकारात्मक रुख बनाए रखते हुए 0.7100 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर की रक्षा करने की कोशिश में जुटी रही, जो इसके एक महीने के निचले स्तर के बेहद करीब है।
हालिया लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़ी का भाव 0.7121 के आसपास दर्ज किया गया, जबकि पिछला बंद 0.7115 रहा था। 52 हफ्तों के दौरान इसका दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। 14 अवधि का सापेक्ष शक्ति सूचकांक यानी आरएसआई 48 पर स्थिर है, जो बाजार में तटस्थ रुख दर्शाता है। वहीं घातीय गतिमान औसत में 20 ईएमए 0.7142, 50 ईएमए 0.7107 और 200 ईएमए 0.6955 पर स्थित हैं। लंबी अवधि के चार्ट पर 50 ईएमए का 200 ईएमए से ऊपर होना गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक स्तर पर सकारात्मक संरचना को दर्शाता है, जबकि 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड 0.7092 से 0.7239 के दायरे में सिमटे हुए हैं।
अमेरिकी मौद्रिक नीति तंत्र और आर्थिक संतुलन
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति को संचालित करने की जिम्मेदारी फेडरल रिजर्व की है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक दोहरे जनादेश के तहत काम करता है, जिसमें मूल्य स्थिरता हासिल करना और अधिकतम रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोहरे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फेडरल रिजर्व का मुख्य नीतिगत हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है।
जब अर्थव्यवस्था में कीमतें बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो उधार लागत बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की जाती है। इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ता है और यह मजबूत होता है, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अपनी पूंजी सुरक्षित रखने और बेहतर रिटर्न पाने के लिहाज से अमेरिका को आकर्षक बनाती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति दो प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करता है, जिससे अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखने को मिलता है।
फेडरल रिजर्व साल भर में आठ नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहां एफओएमसी आर्थिक परिस्थितियों का विस्तृत मूल्यांकन करके ब्याज दरों पर अंतिम निर्णय लेती है। इस महत्वपूर्ण समिति में बारह अधिकारी मतदान का अधिकार रखते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय बैंकों में से बारी-बारी से एक साल के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले चार अध्यक्ष शामिल होते हैं।
असाधारण परिस्थितियों में अपरंपरागत नीतियां
संकट के समय जब वित्तीय व्यवस्था गंभीर रूप से अवरुद्ध हो जाती है, तब फेडरल रिजर्व अपरंपरागत मौद्रिक उपायों का सहारा लेता है। इसमें क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई एक प्रमुख प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में ऋण प्रवाह को बड़े पैमाने पर बढ़ाता है। यह उपाय अत्यधिक कम मुद्रास्फीति या गहरे आर्थिक संकट के समय काम में लाया जाता है, जैसा कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान देखा गया था। इस प्रक्रिया में फेडरल रिजर्व अधिक डॉलर बनाता है और वित्तीय संस्थानों से उच्च श्रेणी के बॉन्ड खरीदता है। आमतौर पर क्यूई के क्रियान्वयन से अमेरिकी डॉलर का मूल्य कमजोर पड़ता है।
इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी वह प्रक्रिया है, जिसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन को दोबारा नए बॉन्ड में नहीं लगाता। इस प्रकार व्यवस्था से तरलता को धीरे-धीरे वापस खींचा जाता है, जो सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होता है।
कच्चा तेल, भू-राजनीति और वैश्विक बाजारों की स्थिति
मुद्रा बाजारों के साथ-साथ अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों पर भी व्यापक आर्थिक कारकों का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न मुद्रास्फीति की चिंताओं और फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दर वृद्धि ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम से जुड़ी मुद्राओं पर दबाव गहराया है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं में, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई कारोबार में मजबूत डॉलर के दम पर 155.00 के स्तर को पार कर एक सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। हालांकि निवेशकों ने फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले 155.50 के स्तर के करीब नई खरीदारी में सतर्कता दिखाई। जापानी मुद्रा येन पिछले एक दशक से भी अधिक समय से दुनिया भर में निवेश के सबसे सस्ते वित्तपोषण विकल्पों में शामिल रही है क्योंकि वहां शून्य के करीब ब्याज दरें लागू थीं। लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को और कड़ा करने की उम्मीदों के चलते यह परिदृश्य नए चरण में प्रवेश कर रहा है।
कीमती धातुओं के बाजार में, सोना यूरोपीय सत्र के दौरान 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे सीमित दायरे में रहा। डॉलर इंडेक्स के दो सप्ताह के उच्च स्तर से थोड़ा थमने से सोने को हल्का सहारा मिला, लेकिन केंद्रीय बैंक के जोखिम को देखते हुए बड़े व्यापारी किसी भी आक्रामक सौदे से बचते नजर आए।
आर्थिक आंकड़े और आगामी दिशा
इस बड़े नीतिगत आयोजन से पहले जारी हुए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में अगस्त महीने के दौरान मजबूत स्थिति देखने को मिली थी, जिसने ब्याज दर बाजारों में नीति को अधिक सख्त बनाए रखने की संभावनाओं को हवा दी थी। इसके तुरंत बाद आए अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों ने यह साबित किया कि महंगाई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। जब तक केंद्रीय बैंक की प्रेस कॉन्फ्रेंस और डॉट प्लॉट से आगे की नीति स्पष्ट नहीं होती, तब तक मुद्रा बाजारों में सीमित दायरे का कारोबार और उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।



















