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अगस्त 2026 में देश की बेरोजगारी दर घटकर 5% पर आई, छह महीनों के निचले स्तर पर पहुंचीबाज़ार
19 सित॰ 2026, 4:04 pm (17 मिनट पहले)· 0

अगस्त 2026 में देश की बेरोजगारी दर घटकर 5% पर आई, छह महीनों के निचले स्तर पर पहुंची

ग्रामीण इलाकों में कामकाज के बेहतर मौकों के चलते अगस्त 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई। हालांकि, शहरों में बेरोजगारी बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई, जिससे सुधार केवल गांवों तक सीमित दिखाई दे रहा है।

देश के रोजगार बाजार में अगस्त 2026 के दौरान सुधार दर्ज किया गया है। आधिकारिक मासिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत की समग्र बेरोजगारी दर घटकर 5 प्रतिशत पर आ गई, जो इससे ठीक पिछले महीने जुलाई में 5.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा पिछले छह महीनों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, आंकड़ों का बारीक विश्लेषण यह साफ करता है कि यह सकारात्मक बदलाव मुख्य रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन से संभव हुआ है, जबकि शहरी भारत में काम तलाश रहे लोगों के लिए स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

ग्रामीण इलाकों में काम के अवसर बढ़े, शहरों में दबाव बरकरार

श्रम बाजार के भौगोलिक वितरण पर नजर डालें तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक बड़ा फासला दिखाई देता है। ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर जुलाई के 4.5 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 4.1 प्रतिशत रह गई। इसके उलट, शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति कुछ कमजोर हुई और वहां बेरोजगारी दर जुलाई के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 6.8 प्रतिशत पर पहुंच गई।

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ग्रामीण क्षेत्रों में यह राहत पुरुषों और महिलाओं दोनों वर्गों में एक समान रूप से देखने को मिली है। ग्रामीण पुरुषों के बीच बेरोजगारी दर जुलाई के 4.6 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 4.3 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, ग्रामीण महिलाओं में यह आंकड़ा जुलाई के 4.3 प्रतिशत से सुधरकर 3.9 प्रतिशत पर आ गया। इसके विपरीत, नगरों और महानगरों में पुरुषों की बेरोजगारी दर जुलाई के 5.9 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 6.1 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी महिलाओं की बेरोजगारी दर में कोई बड़ा फेरबदल नहीं हुआ और यह मोटे तौर पर स्थिर रही। इसी असंतुलन के कारण पूरे देश के स्तर पर हुए इस सुधार को एक व्यापक आर्थिक बहाली के रूप में नहीं देखा जा सकता।

श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि से मिले सकारात्मक संकेत

रोजगार के मोर्चे पर एक और राहत भरी खबर श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) से मिली है। देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों का अनुपात, जो या तो काम कर रहे हैं या सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश में हैं, अगस्त में बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गया। जुलाई 2026 में यह आंकड़ा 55.4 प्रतिशत था।

यहां भी बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा गांवों से ही आया। ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम बल भागीदारी दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 58.2 प्रतिशत हो गई। दूसरी ओर, शहरी इलाकों में यह भागीदारी दर बिना किसी बदलाव के 50.4 प्रतिशत पर ही टिकी रही। इससे यह बात और पुख्ता होती है कि कार्यबल में नई हलचल मुख्य रूप से गैर-शहरी क्षेत्रों में ही दर्ज की गई है।

महिलाओं की भागीदारी में इजाफा, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल

कार्यबल में महिलाओं की सक्रियता के आंकड़े भी उल्लेखनीय रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की समग्र श्रम बल भागीदारी दर जुलाई के 34.4 प्रतिशत से सुधरकर अगस्त में 34.8 प्रतिशत तक पहुंच गई। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी दर जुलाई के 38.8 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर अगस्त में 39.4 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, शहरी महिलाओं के लिए यह भागीदारी दर लगभग 25.4 प्रतिशत के स्तर पर यथावत बनी रही।

कार्यबल में अधिक महिलाओं का शामिल होना या उनका काम ढूंढना एक उत्साहजनक संकेत माना जाता है। फिर भी, केवल मासिक आधार पर दर्ज इस उछाल से यह तय नहीं किया जा सकता कि महिलाओं को मिले ये नए काम स्थायी हैं, उन्हें अच्छा वेतन मिल रहा है या वे पूर्णकालिक रोजगार के दायरे में आते हैं।

श्रमिक जनसंख्या अनुपात में छह महीने का उच्चतम स्तर

कुल आबादी में वास्तव में रोजगार प्राप्त लोगों की हिस्सेदारी को मापने वाला पैमाना, यानी श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), भी अगस्त में बेहतर हुआ है। देश का समग्र WPR जुलाई के 52.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 52.8 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2026 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

ग्रामीण भारत में WPR जुलाई के 55.4 प्रतिशत से चढ़कर अगस्त में 55.8 प्रतिशत पहुंच गया। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात बिना किसी फेरबदल के 47 प्रतिशत पर सपाट रहा। ग्रामीण भारत के ये आंकड़े विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वहां एक ओर नए लोग श्रम बाजार में उतरे, तो दूसरी ओर वास्तविक रोजगार पाने वालों का प्रतिशत भी बढ़ा। इससे पता चलता है कि ग्रामीण बेरोजगारी में गिरावट इसलिए आई क्योंकि लोगों को वास्तव में काम मिला, न कि इसलिए कि लोगों ने हताश होकर काम ढूंढना बंद कर दिया था।

सालाना आधार पर भी दिखे साफ अंतर

सालाना आधार पर तुलना करने पर भी ग्रामीण और शहरी रोजगार बाजार का अंतर खुलकर सामने आता है। अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में समग्र LFPR में 0.6 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि महिला LFPR में 1.1 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

ग्रामीण WPR एक साल पहले के मुकाबले 1.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.8 प्रतिशत पर पहुंच गया। हालांकि, शहरी WPR में सालाना गिरावट देखी गई, जहां यह अगस्त 2025 के 47.5 प्रतिशत से फिसलकर अगस्त 2026 में 47 प्रतिशत पर आ गया। ये सभी निष्कर्ष सामयिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के चालू साप्ताहिक स्थिति (CWS) तरीके के तहत जारी मासिक अनुमानों पर आधारित हैं। चूंकि रोजगार का स्वरूप मौसमी और अस्थायी गतिविधियों के अनुसार बदलता रहता है, इसलिए इन मासिक बदलावों को व्यापक वार्षिक रुझानों के साथ जोड़कर देखना जरूरी होता है।

सवाल-जवाब

अगस्त 2026 में भारत की बेरोजगारी दर कितनी रही?
अगस्त 2026 में देश की कुल बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत रही, जो जुलाई के 5.1 प्रतिशत से कम होकर छह महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई।
ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी दर में क्या अंतर रहा?
ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई, जबकि शहरी इलाकों में यह दर बढ़कर 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में क्या बदलाव देखा गया?
समग्र LFPR जुलाई के 55.4 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 55.6 प्रतिशत हो गया, जिसमें मुख्य योगदान ग्रामीण भागीदारी (58.2 प्रतिशत) का रहा।
अगस्त 2026 में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी कितनी दर्ज की गई?
राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की श्रम भागीदारी बढ़कर 34.8 प्रतिशत हुई, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी 39.4 प्रतिशत और शहरी महिलाओं की 25.4 प्रतिशत रही।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) किस स्तर पर पहुंचा?
देश का समग्र WPR अगस्त 2026 में बढ़कर 52.8 प्रतिशत हो गया, जो मार्च 2026 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
यह रोजगार डेटा किस सर्वेक्षण पर आधारित है?
यह डेटा सामयिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के चालू साप्ताहिक स्थिति (CWS) तरीके के तहत तैयार किए गए मासिक अनुमानों पर आधारित है।
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