अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति यानी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) बुधवार को अपनी ब्याज दरों पर ताजा फैसले का ऐलान करने जा रही है। वित्तीय बाजारों में इस बात को लेकर व्यापक सहमति बन चुकी है कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉश और उनकी टीम ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (bps) की बढ़ोतरी का कदम उठा सकती है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि नीतिगत दरों को मौजूदा स्तर पर ही जस का तस रखने की संभावना 10 फीसदी से भी कम रह गई है। हालांकि नीतिगत बदलाव का यह अनुमान ज्यादातर विश्लेषकों के लिए अप्रत्याशित नहीं है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीय बैंक के इस संभावित फैसले के पीछे आर्थिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर जटिल समीकरण खड़े हैं।
केविन वॉश के सामने नीतियों और प्राथमिकताओं का द्वंद्व
फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉश का मौद्रिक नीतियों को लेकर रुख हमेशा से थोड़ा अलग रहा है। मई में फेडरल रिजर्व की कमान संभालने के बाद से ही उन्होंने यह बात साफ कर दी थी कि वे बाजार को भविष्य के कदमों की पहले से जानकारी देने यानी फॉरवर्ड गाइडेंस की व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं। इसी रणनीति के तहत उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान ऐसे अग्रिम संकेतों से काफी दूरी बनाए रखी। इसके बावजूद इस वर्ष आयोजित जैक्सन होल सिम्पोजियम के मंच से उनका एक अहम रुख सामने आया था। उस दौरान वॉश ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया था कि मुद्रास्फीति अब भी लक्ष्य से काफी ऊपर बनी हुई है। उन्होंने साफ इशारा किया था कि महंगाई पर काबू पाने के लिए निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की सख्त दरकार होगी। उनकी यह टिप्पणी इस साल का सबसे स्पष्ट और कड़ा नीतिगत संकेत मानी गई।
अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चेयरमैन वॉश महंगाई से मुकाबले को प्राथमिकता देते हैं या राजनीतिक दबावों को साधते हैं। केविन वॉश इस समय बेहद मुश्किल दोराहे पर खड़े हैं। यदि वे ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला लेते हैं, तो उनके सामने डोनाल्ड ट्रंप के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही यदि ट्रंप व्यापारिक पाबंदियों और आयात शुल्कों की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो दरों में इजाफे के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था में और अधिक तीव्र संकुचन का जोखिम पैदा हो सकता है। इसके विपरीत, यदि वॉश ब्याज दरों को जस का तस छोड़ देते हैं, तो केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत साख खो सकता है। ऐसी स्थिति में बाजार यह मानने लगेंगे कि केंद्रीय बैंक के लिए अर्थव्यवस्था के स्थायित्व की तुलना में डोनाल्ड ट्रंप के रुख को साधना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
सोने के बाजार पर संभावित असर और परिदृश्य
ब्याज दरों के इस फैसले के बीच पीली धातु यानी सोने (XAU/USD) के भविष्य को लेकर दो प्रमुख स्थितियां सामने आ रही हैं। पहली स्थिति ब्याज दर बढ़ोतरी की है और दूसरी दरों को जस का तस रखने की। हालांकि नीतिगत दरों के न बदलने की संभावना काफी कम है, लेकिन इस विकल्प को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। यदि फेडरल रिजर्व अप्रत्याशित रूप से दरों को स्थिर रखने का रास्ता चुनता है, तो अमेरिकी डॉलर में अचानक भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसी परिस्थिति में 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे कारोबार कर रहा सोना उछलकर 4,500 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि बाजार में जोखिम से बचने के माहौल को देखते हुए सोने का फिर से अपने 4,700 डॉलर के पिछले शिखर तक पहुंचना बेहद मुश्किल जान पड़ता है, क्योंकि समग्र चार्ट ढांचा मंदड़ियों के नियंत्रण में दिखाई दे रहा है।
सोने के दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAU/USD अपने तमाम अहम मूविंग एवरेज के नीचे बना हुआ है। 20-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) नीचे की ओर खिसक रहे हैं और वे क्रमशः 4,450 डॉलर और 4,330 डॉलर के स्तर पर किसी भी तेजी के प्रयास को सीमित कर रहे हैं। हालांकि कई तकनीकी संकेतकों में गिरावट की रफ्तार कुछ थमी है, लेकिन वे अभी भी नकारात्मक दायरे में बने हुए हैं और इससे मंदी की विदाई का कोई ठोस संकेत नहीं मिलता है। ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, सोने का हाजिर भाव 4,425 डॉलर के आसपास देखा जा रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,400 डॉलर से 0.57 फीसदी ऊपर है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,664 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। तकनीकी पैमाने पर 14-दिवसीय आरएसआई 50 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम -20.83 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। सोने के लिए 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,255 डॉलर से 4,729 डॉलर के दायरे में है, जिसमें मिडिल बैंड 4,492 डॉलर पर स्थित है। आने वाले सत्रों के लिए धुरी स्तर यानी पिवट 4,412 डॉलर है, जहां से पहला प्रतिरोध 4,452 डॉलर और दूसरा 4,480 डॉलर पर है, जबकि समर्थन स्तर क्रमशः 4,385 डॉलर और 4,345 डॉलर पर देखे जा रहे हैं। सोने के लिए 20-दिवसीय अहम समर्थन 4,273 डॉलर और प्रतिरोध 4,755 डॉलर के आसपास स्थित है।
विदेशी मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड की चाल
फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के करीब टिकी हुई है, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई के जोखिमों का भी समर्थन मिल रहा है। इस मजबूत बॉन्ड यील्ड और स्थिर अमेरिकी डॉलर के चलते अन्य वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (AUD/USD) 0.7150 के नीचे कमजोर बना रहा, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। चीन की ओर से अगस्त महीने के लिए जारी मिश्रित आर्थिक गतिविधियों के आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कोई सहारा नहीं दिया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी मंगलवार की शुरुआत में 155.00 के स्तर की तरफ मजबूत होती दिखी। विदेशी मुद्रा व्यापारी इस सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान (BoJ) दोनों की बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जहां एक ओर फेड की संभावित सख्ती डॉलर को सहारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की आक्रामक उम्मीदें जापानी येन को भी कुछ सहारा दे सकती हैं, जिससे USD/JPY की ऊपरी बढ़त सीमित रहने का अनुमान है। इस बीच, मंगलवार को सोने ने भी सोमवार की मायूसी को आगे बढ़ाते हुए 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार टिकने में संघर्ष किया और मामूली नुकसान में कारोबार किया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नरमी
पारंपरिक वित्तीय परिसंपत्तियों के साथ-साथ डिजिटल संपत्तियों में भी अनिश्चितता का माहौल साफ देखा जा रहा है। प्रमुख ऑल्टकॉइन्स में मंगलवार को बिकवाली का दबाव बना रहा। एक्सआरपी (XRP), कार्डानो (ADA) और हाइपरलिक्विड (HYPE) जैसी क्रिप्टोकरेंसीज लगभग 2 फीसदी के नुकसान के साथ लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। इस कमजोरी के पीछे केवल फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सतर्कता ही नहीं है, बल्कि मंगलवार को क्लैरिटी एक्ट (CLARITY Act) पर होने वाले क्लोजर वोट से पहले निवेशकों की सतर्कता भी ऑल्टकॉइन्स पर बिकवाली का दबाव बढ़ा रही है। नीतिगत मोर्चे पर अनिश्चितताओं ने तमाम संवेदनशील परिसंपत्तियों के निवेशकों को फिलहाल सुरक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।



















