अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ताजा मौद्रिक नीतिगत फैसले से ठीक पहले कीमती धातुओं के बाजार में उल्लेखनीय हलचल देखी जा रही है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान बुधवार को चांदी (XAG/USD) 1.8 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 64.80 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। वैश्विक निवेशक शाम 18:00 GMT पर आने वाले फेडरल रिजर्व के आधिकारिक नीतिगत बयान और उसके बाद चेयरमैन वार्श की पत्रकार वार्ता का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नीतिगत घोषणा से ठीक पहले आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान सुरक्षित निवेश विकल्पों और औद्योगिक मांग के संतुलन पर केंद्रित कर दिया है।
फेडरल रिजर्व से दर बढ़ोतरी की संभावनाएं और बॉन्ड यील्ड का असर
सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि ब्याज दरों को लेकर वित्तीय बाजार में व्यापारियों का भरोसा काफी पुख्ता है। अधिकांश ट्रेडर्स यह मान रहे हैं कि फेडरल रिजर्व बेंचमार्क उधारी दरों में 25 आधार अंकों (bps) की वृद्धि करके इसे 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में ला सकता है। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की इस उम्मीद को पिछले सप्ताह जारी हुए अगस्त महीने के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से बल मिला है, जिसमें महंगाई के आंकड़े अनुमान से अधिक जिद्दी बने रहे थे। इसके साथ ही फेडवॉच टूल पर यह भी दिखाई दे रहा है कि इस साल के अंत तक फेडरल रिजर्व द्वारा कम से कम दो बार ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगभग 79 प्रतिशत तक बनी हुई है।
दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बाजार भी नीतिगत फैसले से पूर्व सतर्क रुख अपनाए हुए है। बुधवार को 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली नरमी देखने को मिली और यह 5 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई। हालांकि, यह स्तर मंगलवार को बने 5.04 प्रतिशत के उस आंकड़े के बेहद करीब है, जो पिछले 19 वर्षों का उच्चतम स्तर माना गया है। बॉन्ड बाजार में ऐतिहासिक रूप से ऊंची यील्ड बने रहने के बावजूद कीमती धातुओं में शॉर्ट-टर्म खरीदारी का माहौल बना हुआ है।
चांदी का तकनीकी ढांचा और दैनिक चार्ट पर अहम स्तर
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो XAG/USD 64.80 डॉलर के स्तर पर कारोबार करते हुए नजदीकी अवधि में हल्का मंदी का झुकाव बनाए हुए है। इसका मुख्य कारण यह है कि भाव 65.12 डॉलर पर स्थित 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के ठीक नीचे रुका हुआ है। हालिया सत्रों में चांदी एक गिरती हुई रेजिस्टेंस ट्रेंड लाइन से ऊपर टिकने में असमर्थ रही, जिसके बाद यह दोबारा इस अल्पकालिक औसत से नीचे खिसक गई। साथ ही, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 49 के स्तर पर झूल रहा है, जो घटती गति और निर्णायक खरीदारी दबाव के अभाव का संकेत देता है।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो 65.12 डॉलर पर मौजूद 20-दिवसीय ईएमए प्रारंभिक प्रतिरोध के तौर पर काम कर रहा है। मौजूदा गिरावट के दबाव को कम करने और टूटी हुई अवरोही ट्रेंड लाइन की दिशा में तेजी का रास्ता दोबारा खोलने के लिए दैनिक आधार पर इस स्तर से ऊपर बंद होना अनिवार्य होगा। इसके विपरीत, निचले स्तरों पर कीमत की चाल को 62 डॉलर के निचले स्तर से शुरू होने वाली एक आरोही सपोर्ट ट्रेंड लाइन सहारा दे रही है। यदि भाव इस चढ़ते हुए ढांचे से नीचे फिसलता है, तो चांदी में 60 डॉलर के निचले दायरे की ओर बड़ी गिरावट का जोखिम पैदा हो सकता है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, कमोडिटी वायदा (SI=F) का भाव 66.56 डॉलर पर है, जो पिछले बंद स्तर 65.47 डॉलर के मुकाबले 1.66 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 41.81 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है। लाइव तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 55 पर है, जबकि एमएसीडी 0.20 पर है जो 0.46 की सिग्नल लाइन के नीचे नकारात्मक हिस्टोग्राम (-0.26) के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 65.31 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 64.99 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 66.67 डॉलर पर दर्ज हैं। बोलिंगर बैंड्स 62.51 डॉलर से 70.06 डॉलर के बीच फैले हैं। आज के पिवट स्तरों में पिवट 66.68 डॉलर, रेजिस्टेंस R1 66.81 डॉलर, R2 67.07 डॉलर और सपोर्ट S1 66.43 डॉलर तथा S2 66.30 डॉलर पर स्थित हैं।
सोने के साथ तालमेल और गोल्ड-सिल्वर रेशियो
चांदी की कीमतों का रुझान ऐतिहासिक रूप से सोने की चाल के साथ कदमताल करता दिखाई देता है। जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी में भी आमतौर पर वैसा ही उछाल देखने को मिलता है क्योंकि दोनों कीमती धातुओं को अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित निवेश का साधन माना जाता है। बुधवार को यूरोपीय कारोबार में सोना भी 4,350 डॉलर के स्तर से नीचे सीमित दायरे में संघर्ष करता नजर आया। अमेरिकी डॉलर के दो सप्ताह के उच्च स्तर से ठहरने से सर्राफा बाजार को थोड़ा सहारा मिला, लेकिन बड़ी नीतिगत घटना से पहले ट्रेडर्स आक्रामक दांव लगाने से बचते दिखे।
बाजार विश्लेषक सोने और चांदी के सापेक्ष मूल्यांकन को मापने के लिए गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल करते हैं। यह अनुपात यह दर्शाता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो कई निवेशक इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि चांदी का मूल्यांकन सोने के मुकाबले कम (अंडरवैल्यूड) है या फिर सोना जरूरत से ज्यादा महंगा हो चुका है। इसके विपरीत, इस अनुपात में भारी गिरावट यह संकेत दे सकती है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता नजर आ रहा है।
औद्योगिक मांग, आभूषण बाजार और भू-राजनीतिक कारक
चांदी केवल एक वित्तीय संपत्ति या मूल्य संचय का माध्यम नहीं है, बल्कि आधुनिक उद्योगों में इसकी अपरिहार्य भूमिका है। तांबे और सोने की तुलना में भी अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इसका व्यापक उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी सेक्टर में होता है। सोलर पैनल्स और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में चांदी की निरंतर आवश्यकता वैश्विक मांग को सीधे प्रभावित करती है। जब औद्योगिक उत्पादन में तेजी आती है, तो चांदी की कीमतों को मजबूत बुनियादी समर्थन मिलता है, जबकि आर्थिक मंदी के दौरान खपत घटने से कीमतें दबाव में आ सकती हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका, चीन और भारत चांदी के बाजार को दिशा देने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी की खपत करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में चांदी की मांग का एक बड़ा हिस्सा खुदरा उपभोक्ताओं, पारंपरिक आभूषणों और सांस्कृतिक आयोजनों से आता है। इसके अलावा, खनन आपूर्ति की प्रचुरता और रिसाइकिलिंग की दरें भी आपूर्ति पक्ष को तय करती हैं। चूंकि चांदी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार अमेरिकी डॉलर (XAG/USD) में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती इसे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए महंगा बनाती है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को पंख लगाता है।
वैश्विक फॉरेक्स और बॉन्ड बाजारों में व्यापक हलचल
फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले सिर्फ कीमती धातुएं ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार भी व्यापक उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। बुधवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) लगातार तीसरे दिन नकारात्मक रुख के साथ 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और कच्चे तेल के कारण बढ़ी मुद्रास्फीति की चिंताओं ने डॉलर को मजबूती दी। साथ ही मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बनाकर सुरक्षित अमेरिकी मुद्रा का समर्थन किया।
इसी तरह जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) चढ़कर 155.00 के नए एक-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव और सुरक्षित मुद्रा की मांग ने डॉलर को मजबूती दी। हालांकि, फेड के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के चलते तेजी सीमित रही। जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तपोषित किया था। अब जब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को कड़ा करने के संकेत मिल रहे हैं, तो वैश्विक वित्तीय बाजारों में सस्ता फंडिंग स्रोत माने जाने वाले येन का पुराना दौर एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।



















