अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में लगातार जारी जबरदस्त उछाल पर बुधवार को ब्रेक लग गया। फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीति निर्णय से ठीक पहले बेंचमार्क यील्ड में गिरावट देखी गई, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में कुछ राहत की सांस ली गई है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट की यील्ड 0.5 प्रतिशत गिरकर 4.98 प्रतिशत के आसपास आ गई। इससे एक दिन पहले मंगलवार को यील्ड नए बहु-वर्षीय उच्च स्तर 5.04 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जहां से मुनाफावसूली और नए घटनाक्रमों के चलते इसमें यह सुधार दर्ज किया गया है।
बाजारों की यह चाल एक बेहद नाजुक मोड़ पर आई है जब केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। उधार लेने की लागत में इजाफे की संभावना के साथ-साथ कच्चे तेल के बढ़ते दामों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने हाल के हफ्तों में सरकारी ऋणपत्रों की यील्ड को आक्रामक रूप से ऊपर धकेला था। हालांकि, टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी नई चेतावनियों और अत्यधिक बढ़े हुए स्तरों पर निवेशकों की सतर्कता ने इस तूफानी तेजी को कुछ हद तक शांत किया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता बुनियादी ढांचे पर बढ़ती चेतावनियों का असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई इस ताजा नरमी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र के भारी खर्च को लेकर सामने आई गंभीर चिंताएं भी शामिल हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ और सह-संस्थापक डारियो अमोदेई ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे बेतहाशा वैश्विक निवेश को लेकर आगाह किया। डारियो अमोदेई ने जोर देकर कहा कि वे कोई झूठ नहीं बोलेंगे और इस तकनीक से जुड़े वास्तविक खतरे मौजूद हैं। उन्होंने आगे कहा कि बहुत लंबे समय से यह उद्योग लोगों से इस तकनीक के जोखिमों को छुपाता रहा है। इस स्पष्ट चेतावनी ने बड़े पैमाने पर हो रहे पूंजीगत व्यय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गोल्डमैन सैक्स के अनुमानों के मुताबिक, पांच प्रमुख हाइपरस्केलर कंपनियां 2026 में लगभग 250 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी करने की तैयारी में हैं, जबकि 2027 में यह आंकड़ा 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो यह भारी भरकम विस्तार पूरे 2025 में हुए 108 अरब डॉलर के कुल निवेश से दोगुने से भी अधिक बैठता है। तकनीकी कंपनियों द्वारा कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से इतनी भारी उधारी उठाने की संभावनाओं ने ऋण बाजारों पर दबाव की स्थिति और निवेशकों के जोखिम मूल्यांकन को गहराई से प्रभावित किया है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की धमक और मुद्राओं पर दबाव
बॉन्ड यील्ड में आई मामूली गिरावट के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की लगभग पूरी संभावना और तेल की कीमतों से उपजी महंगाई ने डॉलर को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर अमेरिकी मुद्रा की ओर आकर्षित किया है, जिससे जोखिम वाली मुद्राओं की धारणा कमजोर हुई है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में लगातार तीसरे कारोबारी दिन नकारात्मक रुख देखा गया। एशियाई सत्र में यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए महीने के निचले स्तर के बेहद करीब कारोबार करती रही। जोखिम से संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के दोहरे दबाव का सामना कर रही है। दूसरी तरफ, जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) चढ़कर 155.00 के पार एक सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, यह जोड़ी 155.50 के स्तर से नीचे ही बनी रही क्योंकि ट्रेडर्स फेड के फैसले के साथ-साथ गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक को लेकर सतर्क हैं।
जापान की नीतिगत दिशा और ब्रिटेन के मुद्रास्फीति आंकड़े
वैश्विक पूंजी प्रवाह के केंद्र में रही जापानी मौद्रिक नीति भी अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। पिछले एक दशक से अधिक समय तक जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके चलते जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बना रहा। हालांकि, जहां अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति को थामने के लिए आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाईं, वहीं जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को फिर से कड़ा करने की उम्मीदों के साथ यह दशक पुरानी फंडिंग व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है।
दूसरी ओर, यूरोपीय बाजारों में भी हलचल तेज होने की उम्मीद है। ब्रिटेन का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय बुधवार को अगस्त महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े जारी करने वाला है। मुद्रास्फीति के यह आंकड़े ब्रिटिश पाउंड में भारी उतार-चढ़ाव ला सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि यह रिपोर्ट बैंक ऑफ इंग्लैंड के मौद्रिक नीति फैसले से ठीक एक दिन पहले पेश की जा रही है। ट्रेडर्स यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केंद्रीय बैंक आगे नीतिगत सख्ती बनाए रखेगा या दरों को स्थिर रखेगा।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की चाल
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें बुधवार की शुरुआत में एक बार फिर 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकलने का प्रयास करती दिखीं। यह मंगलवार के एशियाई कारोबार में देखे गए सीमित उछाल जैसा ही रुख था। कीमती धातुओं के कारोबारी किसी भी बड़े दांव से पहले फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के नतीजे और भविष्य के दृष्टिकोण का इंतजार कर रहे हैं। जब तक फेड के रुख को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक सोने की अगली दिशा सीमित दायरे में ही बंधी रहने की संभावना है।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में एथेरियम मंगलवार को फिसलकर 2,400 डॉलर के स्तर पर आ गया था। सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के आगे न बढ़ पाने की वजह से क्रिप्टो धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि, इस विधायी अड़चन और फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दर बढ़ोतरी की व्यापक आशंकाओं के बावजूद, प्रमुख ऑल्टकॉइन ने नई पूंजी को आकर्षित करना जारी रखा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से बाजार में एथेरियम खरीदार बिकवाली करने वालों पर हावी रहे हैं, जिससे इस गिरावट के बाद भी निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान दिखाई दिया है।



















