वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत निर्णय से पहले यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर सतर्क दायरे में कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा अपनी प्रमुख ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचाने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। इस संभावित फैसले से ठीक पहले यूरो/यूएसडी जोड़ी 1.1545 के आसपास काफी संभलकर रुख अपनाए हुए है। इसके साथ ही मौजूदा लाइव आंकड़ों में यह जोड़ी 1.15 के स्तर पर पिछले बंद स्तर के मुकाबले 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करती दिख रही है। बाजार विश्लेषक इस बात पर भी करीबी नजर रख रहे हैं कि क्या अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस कैलेंडर वर्ष में दरों में एक और इजाफा करने की तैयारी कर रहा है।
नीतिगत रुख की पड़ताल करते हुए एबीएन एमरो के रणनीतिकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह कदम आक्रामक तौर पर महंगाई घटाने की तुलना में एहतियाती दृष्टिकोण से ज्यादा प्रेरित है। विश्लेषकों का तर्क है कि इस बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य सीधे तौर पर महंगाई को नीचे लाना कम और मुद्रास्फीति को लंबे समय तक टिकने से रोकना अधिक है। अपने जोखिम प्रबंधन ढांचे को स्पष्ट करते हुए संस्थान ने संकेत दिया है कि दिसंबर की बैठक में एक और अतिरिक्त बढ़ोतरी को शामिल किया गया है, जो पहले कदम जैसे ही आधारों पर टिकी होगी। इसके बाद नीति की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े किस तरह का व्यवहार दिखाते हैं।
तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बरकरार
चार्ट विश्लेषण के लिहाज से यूरो/यूएसडी 1.1548 के आसपास कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहा है क्योंकि यह 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) 1.1590 के नीचे बना हुआ है। इस गतिशील बाधा को पार करने में बार-बार मिल रही विफलता दर्शाती है कि हाल के हर उछाल पर बिकवाली हावी हो रही है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) लगभग 43 के स्तर पर मौजूद है, जो तटस्थ से नरम दायरे को दर्शाता है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि नकारात्मक दबाव कायम है, हालांकि चार्ट पर अभी अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की नौबत नहीं आई है। वहीं ताजा लाइव तकनीकी संकेतकों पर 14-दिवसीय आरएसआई 37 के आसपास दर्ज है, जो दबाव की निरंतरता की पुष्टि करता है।
स्कॉटियाबैंक के रणनीतिकारों ने भी मौजूदा सेटअप को तटस्थ से मंदी की ओर झुका हुआ करार दिया है। बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि अगस्त के अंत में 70 के ओवरबॉट स्तर को छूने के बाद आरएसआई तेजी से मंदी के क्षेत्र में फिसल गया है। ऊपर की ओर, पहला कड़ा प्रतिरोध 20-दिवसीय ईएमए 1.1590 पर बना हुआ है। मौजूदा नकारात्मक दबाव को कम करने और एक स्थायी सुधार की राह खोलने के लिए दैनिक आधार पर इस बाधा के ऊपर बंद होना आवश्यक होगा। दूसरी ओर, नीचे की तरफ 1.1500 का मनोवैज्ञानिक स्तर सबसे प्रमुख सहारा क्षेत्र बना हुआ है। मौजूदा लाइव डेटा में 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए का डेथ क्रॉस भी लंबी अवधि के मंदी के रुख को रेखांकित करता है, जिसमें एडीएक्स 26 पर ट्रेंड की ताकत दिखा रहा है।
कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड से डॉलर को मिला समर्थन
मुद्रा बाजार के अन्य हलकों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान लगातार तीसरे दिन नकारात्मक दायरे में बनी रही। यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के बेहद करीब कारोबार कर रही थी। फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावना और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे डॉलर को मजबूती मिली है। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने डॉलर की सुरक्षित निवेश मांग को बढ़ाया है, जिसका सीधा असर जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर देखा गया।
इसी तरह अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी बुधवार को एशियाई सत्र में 155.00 के पार पहुंचकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। तेल से जुड़ी महंगाई की आशंका और अमेरिकी दरों में बढ़ोतरी के पूर्वानुमान ने सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल को सहारा दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी डॉलर को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अतिरिक्त मजबूती प्रदान की। हालांकि, दिन में बाद में होने वाले फेडरल रिजर्व के निर्णय और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स अत्यधिक आक्रामक दांव लगाने से बचते दिखे, जिससे यह जोड़ी 155.50 के नीचे सीमित रही।
सोने में सुस्ती और एशियाई शेयर बाजारों का मिला-जुला रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने सीमित इंट्राडे उछाल को भुनाने में संघर्ष करता रहा और पूरे एशियाई सत्र के दौरान 4,350 डॉलर के स्तर के नीचे ही बना रहा। दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थोड़ी थमी, जिससे सोने को कुछ मामूली सहारा जरूर मिला। इसके बावजूद बड़े केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसले से पहले कारोबारी दोनों तरफ आक्रामक स्थितियां बनाने के बजाय किनारे बैठकर इंतजार करना पसंद कर रहे हैं। सोने का यह ठहराव बताता है कि निवेशक ब्याज दरों के वास्तविक पथ को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं।
एशियाई इक्विटी बाजारों में बुधवार को मामूली बढ़त देखने को मिली, जिसे अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स में स्थिरता से समर्थन मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले बाजार का समग्र रुझान बेहद सतर्क बना रहा। कच्चे तेल के ऊंचे दाम, मध्य पूर्व का तनाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड निवेशकों के मूड को लगातार असहज बनाए हुए हैं।
जापानी येन और वैश्विक पूंजी प्रवाह का बदलता परिदृश्य
एक दशक से अधिक समय तक जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने वैश्विक निवेश में खरबों डॉलर का वित्तपोषण करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसी नीति ने जापानी येन को दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बना दिया था। जहां अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया का सबसे बड़ा अपवाद बना रहा।
अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को फिर से सख्त किए जाने की व्यापक उम्मीद की जा रही है, यह पुराना लाभ एक नए चरण में प्रवेश करता दिख रहा है। नीतिगत बदलाव की यह आहट न केवल येन की चाल को बदल सकती है, बल्कि वैश्विक परिसंपत्तियों में लगे सस्ते कर्ज की दिशा पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकती है। केंद्रीय बैंकों की इन परस्पर विरोधी चालों के बीच यूरो/यूएसडी के लिए आने वाले सत्र काफी उतार-चढ़ाव भरे रहने के आसार हैं।



















