वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर अमेरिकी डॉलर मजबूती के साथ टिका हुआ है, जिसके कारण यूरो सहित अन्य प्रमुख मुद्राओं में सुस्ती का रुख देखने को मिला है। निवेशकों और कारोबारियों के बीच जोखिम उठाने की धारणा कमजोर होने से यूरो बनाम डॉलर यानी EUR/USD में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC की आगामी बैठक, उसके नीतिगत निर्णयों और नए आर्थिक अनुमानों पर केंद्रित है। इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं और भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को मजबूती प्रदान की है।
जर्मनी के आर्थिक आंकड़ों से मिले-जुले संकेत
यूरो क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी से जुड़े सितंबर महीने के ZEW सूचकांक ने अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य के परिदृश्य को लेकर विरोधाभासी संकेत दिए हैं। मौजूदा आर्थिक स्थिति का आकलन करने वाला सूचकांक सुधरकर -47.1 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि बाजार का आम अनुमान -52.1 का था और पिछले महीने यह आंकड़ा -61.1 पर रहा था। वर्तमान स्थिति का यह पैमाना पिछले साढ़े तीन वर्षों के अपने उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया है। जर्मनी की आर्थिक गतिविधियों में यह हालिया सुधार मुख्य रूप से उल्लेखनीय वित्तीय नरमी और विनिर्माण क्षेत्र में ऑर्डरों की बढ़ोतरी के कारण संभव हुआ है।
इसके विपरीत भविष्य के आर्थिक विकास से जुड़ी अपेक्षाओं ने विश्लेषकों को निराश किया है। भविष्य की वृद्धि का अनुमान लगाने वाला घटक 34.7 पर लगभग स्थिर रहा, जबकि पिछले महीने यह 34.2 पर था और बाजार को इसके 40.0 तक पहुंचने की उम्मीद थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह निराशा वित्तीय स्थितियों में हालिया सख्ती और ऊर्जा लागतों में आए उछाल को दर्शाती है। जर्मन खुदरा ऊर्जा बाजार और ब्याज दरों के मूल्य निर्धारण में होने वाली स्वाभाविक देरी को देखते हुए इन कारकों का आर्थिक वृद्धि पर वास्तविक असर दिखने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है, जिसे सितंबर का ZEW सर्वेक्षण साफ तौर पर उजागर कर रहा है।
फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों पर असहमति की संभावना
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति यानी FOMC के आगामी निर्णय को लेकर वित्तीय हलकों में यह माना जा रहा है कि फैसला पूरी तरह से सर्वसम्मत नहीं होगा। नीति निर्धारकों के बीच 2 से 3 सदस्य ऐसे हो सकते हैं जो ब्याज दरों में बदलाव न करते हुए उन्हें यथावत बनाए रखने के पक्ष में असहमति दर्ज करा सकते हैं। इसके बावजूद यह पूरी संभावना है कि FOMC अपने अद्यतन आर्थिक अनुमानों और प्रसिद्ध 'डॉट्स' यानी डॉट प्लॉट को सार्वजनिक करेगी, भले ही वॉर्श इस बार भी अपने व्यक्तिगत विचार प्रस्तुत करने से अलग रहने का विकल्प चुनें। इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने के लिए दोपहर में अगस्त महीने के खुदरा बिक्री के आंकड़े भी जारी होने हैं।
फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले की पृष्ठभूमि में अमेरिकी श्रम बाजार का मजबूत प्रदर्शन शामिल रहा है। अगस्त महीने की नौकरियों से जुड़ी सशक्त रिपोर्ट ने वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी थी। हालांकि ब्याज दरों के बाजार के लिए अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI के हालिया आंकड़े कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हुए हैं, जिससे दरों में आक्रामक रुख बने रहने की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
एशियाई मुद्राओं पर दबाव और बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती का व्यापक असर एशियाई कारोबारी सत्र में भी साफ देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD में लगातार तीसरे कारोबारी दिन नकारात्मक रुख बना रहा। यह जोड़ी 0.7100 के स्तर की रक्षा करते हुए बुधवार के एशियाई सत्र में अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार करती रही। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अपेक्षित वृद्धि और कच्चे तेल से प्रेरित महंगाई के डर ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भी सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर को समर्थन दिया है और जोखिम संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भारी दबाव डाला है।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले डॉलर लगातार मजबूत हुआ और USD/JPY बुधवार के एशियाई सत्र में तेजी के साथ 155.00 के पार एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की महंगाई और फेड की दर वृद्धि के अनुमान ने अमेरिकी प्रतिफल को ऊपर बनाए रखा है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी अमेरिकी डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की हैसियत को मजबूती दी है। हालांकि यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही, क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की महत्वपूर्ण बैठक से पहले नए बड़े दांव लगाने से बचते नजर आए।
बैंक ऑफ जापान की नीति में बदलाव और सोने की चाल
जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेशों में खरबों डॉलर के वित्तपोषण में अहम भूमिका निभाई है, जिसके चलते जापानी येन दुनिया भर में फंडिंग के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करने की उम्मीद की जा रही है, तो दशकों पुरानी यह विशिष्ट स्थिति एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अपवाद बना रहा था।
कमोडिटी बाजार में सोने ने यूरोपीय सत्र के पहले भाग में मामूली इंट्राडे बढ़त बनाए रखी, लेकिन इसमें लगातार खरीदारी का अभाव दिखा और भाव 4,350 डॉलर के नीचे बने रहे। कुछ मुनाफावसूली के कारण अमेरिकी डॉलर के अपने दो सप्ताह के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आने पर सोने को निचली कीमतों पर सहारा मिला। इसके बावजूद प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी नीतिगत निर्णयों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कारोबारी किसी एक दिशा में आक्रामक स्थिति लेने से बच रहे हैं और फिलहाल तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं।



















