अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में मंगलवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3490 के आसपास कमजोर रुख के साथ कारोबार करता दिखा। व्यापक वित्तीय बाजार इस समय अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की बुधवार को समाप्त होने वाली दो दिवसीय नीतिगत बैठक और बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत फैसले पर पैनी नजरें गड़ाए हुए हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा बुधवार को अपनी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जबकि इसके उलट गुरुवार को बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अपनी प्रमुख नीतिगत दर 3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखे जाने की उम्मीद है। दोनों प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक दिशाओं में यह संभावित अंतर पाउंड स्टर्लिंग पर दबाव की मुख्य वजह बनकर उभरा है। वर्तमान लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD जोड़ी 1.34 के स्तर पर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद स्तर 1.34 के मुकाबले 0.26 प्रतिशत के बदलाव को दर्शाती है और 1.30 से 1.38 के 52-सप्ताह के दायरे में सीमित है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी उम्मीदें
अमेरिकी मुद्रा में हालिया मजबूती की प्रमुख वजह पिछले शुक्रवार को जारी हुए मुद्रास्फीति आंकड़े रहे हैं। अगस्त महीने के दौरान कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 0.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार के पूर्व अनुमानों से अधिक रही। कोर सीपीआई में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने वित्तीय कारोबारियों के बीच यह भरोसा काफी मजबूत कर दिया कि लगातार बनी हुई जिद्दी महंगाई से निपटने के लिए फेडरल रिजर्व को सख्त मौद्रिक रुख अपनाना होगा और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखना पड़ सकता है।
शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के सीएमई फेडवॉच टूल (CME FedWatch Tool) के आंकड़ों के मुताबिक, निवेशक और कारोबारी अब सितंबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की 92.4 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले हफ्ते जारी हुए सीपीआई आंकड़ों से पहले यह संभावना केवल 67 प्रतिशत के आसपास आंकी जा रही थी। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की दो दिवसीय बैठक के समापन के बाद बुधवार को फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीति निर्माताओं की तरफ से नरम या डोविश संकेत मिलते हैं तो अमेरिकी डॉलर नीचे आ सकता है, जिससे पाउंड-डॉलर जोड़ी को सहारा मिलेगा। इसके विपरीत, यदि फेड अधिकारियों ने सख्त या हॉकिश बयानबाजी जारी रखी तो अल्पकाल में अमेरिकी डॉलर को और अधिक बल मिल सकता है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की स्थिति और ब्रिटेन के घरेलू नीतिगत घटनाक्रम
ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक यानी बैंक ऑफ इंग्लैंड की गुरुवार को होने वाली बैठक के संदर्भ में वित्तीय बाजारों का आकलन काफी दिलचस्प रुख दिखा रहा है। एलएसईजी (LSEG) के सोमवार के आंकड़ों के अनुसार, बाजार गुरुवार को चौथाई प्रतिशत यानी 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की 30 प्रतिशत संभावना जता रहा है। पिछले हफ्ते की शुरुआत में यह संभावना 10 प्रतिशत से भी कम थी, जबकि नवंबर की बैठक में कदम उठाए जाने की संभावना को बाजार लगभग पूरी तरह अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है।
बैंक ऑफ नोवा स्कोटिया (स्कॉटियाबैंक) के विश्लेषकों का कहना है कि बैंकों पर संभावित उच्च कर लगाने की यूके सरकार की योजनाओं की प्रमुख चर्चा के बावजूद राजनीतिक घटनाक्रम सीमित रहे हैं। स्कॉटियाबैंक ने 28 अक्टूबर को पेश किए जाने वाले आगामी शरदकालीन बजट (फॉल बजट) को ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा मध्यम अवधि का जोखिम भरा घटनाक्रम चिह्नित किया है।
तकनीकी विश्लेषण और चार्ट पर प्रमुख स्तर
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो GBP/USD जोड़ी एक तटस्थ अल्पकालिक रुख में दिखाई देती है। यह जोड़ी ऊपर की ओर 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड के मध्य बैंड को प्रतिरोध के रूप में और नीचे 20-दिवसीय निचले बैंड तथा 100-दिवसीय मूविंग एवरेज के समूह को समर्थन के रूप में लेते हुए इनके बीच सिमटी हुई है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 50 के स्तर के ठीक नीचे बना हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि जब तक कीमत बॉलिंजर बैंड के दायरे में सीमित है, तब तक किसी एक दिशा में मजबूत गति का अभाव है।
तकनीकी स्तरों के अनुसार, ऊपर की दिशा में 1.3557 पर स्थित बॉलिंजर मिडल बैंड के ऊपर स्पष्ट बढ़त देखने को मिलती है तो अगला प्रतिरोध 1.3660 के पास ऊपरी बैंड पर सामने आएगा। नीचे की दिशा में शुरुआती समर्थन 1.3455 के आसपास निचले बॉलिंजर बैंड पर स्थित है, जिसके बाद 1.3445 पर 100-दिवसीय मूविंग एवरेज मौजूद है। यदि यह जोड़ी इस स्तर से नीचे फिसलती है तो बाजार का रुझान स्पष्ट रूप से बिकवाली यानी मंदड़ियों के पक्ष में झुक सकता है। ताजा लाइव तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो आरएसआई (14) का स्तर 38 पर आ चुका है, एमएसीडी (MACD) मंदड़िया रुझान दर्शा रहा है, 20-दिवसीय ईएमए 1.35, 50-दिवसीय ईएमए 1.35 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर स्थित है, जबकि 14-दिवसीय औसत वास्तविक दायरा (ATR) 0.01 पर बना हुआ है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड स्टर्लिंग की महत्ता और कार्यप्रणाली
पाउंड स्टर्लिंग (GBP) दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से जुड़ा हुआ है, और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा (FX) बाजार में यह चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा इकाई है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में पाउंड स्टर्लिंग की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत है, जो प्रतिदिन औसतन 630 बिलियन डॉलर के कारोबार के बराबर बैठती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में इसके प्रमुख व्यापारिक युग्मों में GBP/USD शामिल है, जिसे पारंपरिक रूप से 'केबल' (Cable) के नाम से जाना जाता है और यह अकेले कुल एफएक्स कारोबार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा GBP/JPY, जिसे ट्रेडर्स 'ड्रैगन' कहते हैं, 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि EUR/GBP की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत है। पाउंड स्टर्लिंग को जारी करने और उसके प्रबंधन का दायित्व बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) संभालता है।
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बुनियादी कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने फैसलों को मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य पर केंद्रित रखता है, जिसका अर्थ मुद्रास्फीति दर को लगभग 2 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखना है। इस लक्ष्य को पाने का उसका मुख्य हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब ब्रिटेन में महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में वृद्धि करके इसे नियंत्रित करने का प्रयास करता है। उच्च ब्याज दरों से लोगों और व्यवसायों के लिए ऋण लेना महंगा हो जाता है, जिससे खर्च सीमित होता है। विदेशी मुद्रा बाजार में यह कदम आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को यूके में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति अत्यधिक गिर जाती है, तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है ताकि सस्ता कर्ज उपलब्ध कराकर निवेश और वृद्धि को गति दी जा सके।
इसके साथ ही ब्रिटेन के व्यापक आर्थिक आंकड़े पाउंड की दिशा निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सकल घरेलू उत्पाद (GDP), विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई (PMI) सूचकांक तथा रोजगार के आंकड़े अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का पैमाना होते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड के लिए अनुकूल होती है क्योंकि यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने का आधार देती है। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं तो पाउंड स्टर्लिंग में गिरावट का रुख बनता है। एक अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ा व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) का है, जो किसी अवधि में देश द्वारा निर्यात से अर्जित आय और आयात पर किए गए व्यय के अंतर को मापता है। सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन कमजोरी लाता है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और कमोडिटी बाजार का हाल
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों के अन्य क्षेत्रों में भी अमेरिकी नीतिगत उम्मीदों का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.7150 के नीचे दबाव में बना रहा, जो पिछले कारोबारी दिन छुए गए तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। चीन के मिश्रित आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इस मुद्रा युग्म को सीमित रखा। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 155.00 के स्तर की ओर बढ़त बनाए हुए है, हालांकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) की आगामी बैठक से जुड़े सख्त संकेतों की वजह से जापानी येन को भी कुछ समर्थन मिल रहा है।
कमोडिटी बाजार में सोने ने एशियाई सत्र में 4,300 डॉलर का स्तर फिर से हासिल कर लिया, लेकिन मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और आगामी एफओएमसी बैठक के कारण यह अब भी पिछले दिन के एक महीने के निचले स्तर के करीब संवेदनशील बना हुआ है। ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज करते हुए एशियाई कारोबारी घंटों में लगभग 98.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करती दिखी, जहां वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है।



















