अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष समाप्त होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी। ट्रंप का अनुमान है कि वर्तमान में लगभग 3 डॉलर प्रति गैलन पर बिक रहा कच्चा तेल युद्ध के खातमे के बाद गिरकर 2 डॉलर प्रति गैलन से भी कम स्तर पर आ सकता है। उन्होंने ईंधन और ऊर्जा की ऊंची कीमतों का सीधा संबंध मध्य पूर्व में जारी सैन्य गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि जैसे ही सैन्य अभियान पूरा होगा, ऊर्जा बाजार बेहद तेजी से स्थिर स्थिति में लौट आएंगे।
तेल की कीमतों और परमाणु हथियार पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान
अपने आधिकारिक ट्रुथ सोशल अकाउंट पर जारी संदेश में डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल करते ही तेल की कीमतें बेहद तेजी से नीचे गिरेंगी, ठीक उसी तरह जैसे अन्य वस्तुओं के दाम कम हो रहे हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि बाकी सामानों की तुलना में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की रफ्तार और भी ज्यादा देखने को मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय कच्चे तेल का भाव 3 डॉलर प्रति गैलन के आसपास है, लेकिन आने वाले समय में यह घटकर 2 डॉलर प्रति गैलन से भी निचले स्तर तक पहुंच जाएगा।
इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी पुरानी चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पूरा घटनाक्रम बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा और ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। अपनी इस पोस्ट के अंत में उन्होंने अपना चर्चित नारा MAGA भी लिखा।
ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले को लेकर ईरान की कड़ी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से पहले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने वाशिंगटन को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि अमेरिका ने ईरान के तेल और गैस प्रतिष्ठानों के खिलाफ कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे इसके गंभीर और भयानक परिणाम भुगतने होंगे। सोशल मीडिया पर दिए गए अपने बयान में घालीबाफ ने कहा कि ईरान की संपूर्ण तेल और गैस उत्पादन श्रृंखला काफी विशाल, सुलभ और खुली हुई है, जिस पर आसानी से असर पड़ सकता है।
ईरानी स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मध्य पूर्व के जल क्षेत्रों और स्थानीय सुविधाओं में काम कर रही अमेरिकी तेल और गैस कंपनियों को भी ठीक उसी तरह के सैन्य और आर्थिक जोखिमों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने वाशिंगटन को आगाह करते हुए कहा कि यदि ईरान की परिसंपत्तियों पर हमला किया गया, तो अमेरिकी ठिकानों पर भी जवाबी हमला होगा। घालीबाफ ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों का उदाहरण दिया जो अब बेकार हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ग्राफिक साझा करते हुए कहा कि D.O.I.W. के कुछ अधिकारियों के गलत फैसलों के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक खोया हुआ दशक आने वाला है।
अमेरिकी रक्षा सचिव की पोस्ट के बाद बढ़ा जुबानी जंग का दायरा
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ की यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के एक सोशल मीडिया संदेश के जवाब में आई थी। पीट हेगसेथ ने अपनी पोस्ट में दावा किया था कि ईरान का तेल टैंकर बेड़ा काफी असुरक्षित स्थिति में है और उस पर कभी भी हमला किया जा सकता है। हेगसेथ ने वाशिंगटन के उस दावे को भी दोहराया था जिसमें कहा गया था कि ईरानी नौसेना और वायु सेना को भारी नुकसान पहुंचाकर नष्ट कर दिया गया है।
नेताओं के बीच जारी इस जुबानी जंग और बयानों के आदान-प्रदान ने फारस की खाड़ी में जारी भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकियां दे रहे हैं।



















