वैश्विक आर्थिक हालातों और मौद्रिक नीतियों के बीच मुद्रा बाजारों में हलचल लगातार बनी हुई है। इसी कड़ी में बीएनपी परिबास के रणनीतिकारों ने जापान की अर्थव्यवस्था को लेकर अपने ताजे अनुमान पेश किए हैं, जिसके तहत आगामी वर्षों में देश की विकास दर सुस्त रहने की संभावना जताई गई है।
जीडीपी वृद्धि और महंगाई का असर
विश्लेषकों का मानना है कि जापान का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी विस्तार 2025 के 1.1 प्रतिशत से फिसलकर 2026 में 0.8 प्रतिशत तक सीमित हो सकता है। आर्थिक गतिविधियों पर बढ़ते दामों और ऊर्जा संबंधी खर्चों का भारी दबाव बना हुआ है, हालांकि सरकारी राजकोषीय सहायता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में हो रहे निवेश इस मंदी के असर को कुछ हद तक थामने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा, देश पर दीर्घकालिक ब्याज दरों का भारी दबाव भी साफ दिखाई दे रहा है, जिसकी मुख्य वजह ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर चल रहे 10-वर्षीय और 30-वर्षीय यील्ड हैं। माना जा रहा है कि यह स्थिति सार्वजनिक कर्ज के बढ़ते स्तर और मौद्रिक समायोजन की गति के कारण पैदा हुई है।
बैंक ऑफ जापान की नीतियां और येन का भविष्य
बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच बैंक ऑफ जापान ने साल 2024 के दौरान अपनी मौद्रिक नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ब्याज दरों को नकारात्मक दायरे से बाहर निकाला था और इन्हें बढ़ाकर 1.0 प्रतिशत तक पहुंचाया, जो कि साल 1995 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जानकारों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस रुख को जारी रखते हुए हर चार से पांच महीने में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी का सिलसिला आगे भी बरकरार रखेगा। इसके तहत साल 2028 तक नीतिगत दर के 2.50 प्रतिशत के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इन तमाम नीतिगत बदलावों और कसौटियों के बावजूद, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन पर दबाव बना रहने की संभावना है और अनुमान है कि साल 2026 की चौथी तिमाही तक USD/JPY का यह जोड़ा 165 के स्तर के आसपास बना रह सकता है।
प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में हालिया उतार-चढ़ाव
विदेशी मुद्रा बाजार में जापान के अलावा अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में भी खासा बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआत में बढ़त हासिल करने के बाद ब्रिटिश पाउंड यानी GBP/USD में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई और यह 1.3300 के अहम दायरे को तोड़ते हुए कई हफ्तों के नए निचले स्तर पर फिसल गया। मध्य पूर्व के संघर्ष में आए ठहराव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और ब्रिटेन में हाल ही में सामने आए महंगाई के नरम आंकड़े इस बात के संकेत दे रहे हैं कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी आगामी बैठक से पहले ब्याज दरों में किसी भी तरह की सख्ती से फिलहाल परहेज कर सकता है। उधर, यूरो यानी EUR/USD की चाल में भी शुरुआती तेजी फीकी पड़ती दिखाई दी है और सोमवार को यह जोड़ी फिसलकर 1.1370 के दायरे की तरफ आ गई। हालांकि, अमेरिकी डॉलर के असमंजस भरे रुख और मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर निवेशकों की पैनी नजर के बीच इस जोड़े ने अपनी पिछली दो दिनों की लगातार गिरावट को थामने में सफलता हासिल की है, जबकि बाजार में अब कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा जारी होने वाले अमेरिकी कंज्यूमर कॉन्फिडेंस आंकड़े का इंतजार किया जा रहा है।



















