वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर में कमजोरी का रुख देखा गया, जिससे यूएसडी/सीएडी जोड़ी को निचले स्तरों पर खरीदारों का समर्थन मिला। एक दिन पहले 1.4300 के अहम स्तर के करीब से हल्की गिरावट दर्ज करने के बाद यह मुद्रा जोड़ी 1.4265 के आसपास कारोबार कर रही है, जो अप्रैल 2025 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। लगभग एक महीने से जारी तेजी के इस रुझान को कच्चे तेल की कमजोर कीमतों, बैंक ऑफ कनाडा के नरम नीतिगत रुख और वाशिंगटन तथा ओटावा के बीच व्यापारिक तनाव से लगातार हवा मिल रही है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। हालिया घटनाक्रम में यमन के हूती समूह ने सोमवार को घोषणा की कि उसने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, एक तेल संयंत्र और प्रमुख सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों तथा ड्रोनों से तीन बड़े सैन्य अभियान चलाए हैं। इसके अतिरिक्त इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि इजरायल, अमेरिका के साथ मिलकर या स्वतंत्र रूप से, ईरान के खिलाफ किसी संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इन घटनाक्रमों ने बाजार में जोखिम से बचने की भावना को मजबूत किया है, जिससे ग्रीनबैक को सहारा मिल रहा है।
फेडरल रिजर्व की नीति और तकनीकी संकेतकों की स्थिति
अमेरिकी डॉलर सोमवार को छुए गए अप्रैल 2025 के अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार कर रहा है क्योंकि निवेशक फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। बाजार की निगाहें बुधवार को जारी होने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के कार्यवृत्त (मिनट्स) पर टिकी हुई हैं। इसके अलावा फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं के आगामी भाषण और भू-राजनीतिक मोर्चे से आने वाले समाचार डॉलर की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इसके बावजूद समग्र आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यूएसडी/सीएडी में ऊपर की तरफ बढ़ने का रुझान बरकरार है।
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से यूएसडी/सीएडी 1.4003 पर स्थित अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से काफी ऊपर मजबूती बनाए हुए है। पिछले सप्ताह 1.4245 से 1.4250 के बाधा क्षेत्र को पार करने के बाद यह जोड़ी अल्पकालिक तेजी के रुख को आगे बढ़ा रही है। हालांकि 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 78 के आसपास पहुंच गया है, जो ओवरबॉट स्थिति का संकेत देता है। इसका मतलब यह है कि बाजार में तेजी का दबाव हावी रहने के बावजूद हालिया उछाल के बाद कीमतों में थोड़ा सुधारात्मक ठहराव या कंसॉलिडेशन देखने को मिल सकता है।
कनाडाई डॉलर को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक पहलू
कनाडाई डॉलर (CAD), जिसे बाजार में लूनी के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से बैंक ऑफ कनाडा (BoC) द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरों, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, कनाडा के व्यापक आर्थिक स्वास्थ्य, महंगाई दर और व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) से संचालित होता है। वैश्विक बाजार का रुझान भी इस पर असर डालता है। जब निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों की ओर बढ़ते हैं (रिस्क-ऑन), तो कनाडाई डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ती है (रिस्क-ऑफ), तो इस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के नाते अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत भी कनाडाई मुद्रा के उतार-चढ़ाव में सीधी भूमिका निभाती है।
बैंक ऑफ कनाडा ब्याज दरों का निर्धारण करके देश में ऋण स्थितियों को नियंत्रित करता है, जिससे इंटरबैंक लेंडिंग के जरिए आम उपभोक्ताओं और व्यवसायों की उधारी लागत तय होती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य ब्याज दरों में फेरबदल करके मुद्रास्फीति को 1% से 3% के दायरे में बनाए रखना है। जब बैंक ऑफ कनाडा तुलनात्मक रूप से ऊंची ब्याज दरें लागू करता है, तो विदेशी पूंजी आकर्षित होती है और कनाडाई डॉलर मजबूत होता है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक परिमाणात्मक ढील (क्वांटिटेटिव ईजिंग) या सख्ती (क्वांटिटेटिव टाइटनिंग) का भी इस्तेमाल करता है, जिसमें पहली नीति कनाडाई डॉलर के लिए नकारात्मक और दूसरी सकारात्मक मानी जाती है।
कच्चे तेल की कीमतें और व्यापार संतुलन का प्रभाव
कच्चा तेल कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कीमतों का कनाडाई डॉलर पर तुरंत असर पड़ता है। जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो कनाडा के निर्यात राजस्व में इजाफा होता है और मुद्रा की कुल मांग बढ़ती है, जिससे लूनी मजबूत होता है। इसके उलट अगर कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो कनाडाई मुद्रा कमजोर होती है। ऊंचे तेल मूल्य देश के लिए एक अनुकूल व्यापार संतुलन बनाने में मदद करते हैं, जो मुद्रा के मूल्य को स्थिरता प्रदान करता है।
कमोडिटी बाजार के ताजा सत्र के आंकड़ों के अनुसार क्रूड ऑयल (CL=F) पिछले बंद भाव 91.11 डॉलर के मुकाबले 1.70% घटकर 89.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि इसका 52-सप्ताह का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच है। तकनीकी संकेतकों में इसका 14-दिवसीय आरएसआई 45 पर है, जबकि एमएसीडी 0.22 पर सिग्नल 1.50 के नीचे मंदी का संकेत दे रहा है। हालांकि 50-दिवसीय ईएमए 90.18 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.80 डॉलर के साथ लंबी अवधि का गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, लेकिन 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 86.14 डॉलर से 105.76 डॉलर के बीच होने और वॉल्यूम औसत का केवल 0.01 गुना रहने के कारण कच्चे तेल में निकट अवधि की सुस्ती बनी हुई है, जो कनाडाई डॉलर के लिए प्रतिकूल साबित हो रही है।
मुद्रास्फीति, पूंजी प्रवाह और वृहद आर्थिक संकेतक
परंपरागत रूप से मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के मूल्य को घटाने वाले कारक के तौर पर देखा जाता था, लेकिन आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में सीमा पार पूंजी प्रवाह के नियमों में छूट के बाद यह समीकरण बदल गया है। ऊंची महंगाई दर के दबाव में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करते हैं। अधिक रिटर्न की तलाश में वैश्विक निवेशक संबंधित देश की परिसंपत्तियों में पूंजी निवेश करते हैं, जिससे स्थानीय मुद्रा की मांग में तेजी आती है। कनाडा के मामले में भी ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें निवेशकों को आकर्षित करती हैं।
इसके अतिरिक्त कनाडा के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण जैसे प्रमुख वृहद आर्थिक आंकड़े लूनी की सेहत का आकलन करने में अहम हैं। यदि देश के आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं, तो यह न केवल विदेशी निवेश को बढ़ावा देता है बल्कि केंद्रीय बैंक को सख्त नीति बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है, जिससे कनाडाई डॉलर को ताकत मिलती है। वहीं यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर साबित होते हैं, तो कनाडाई डॉलर में तेज गिरावट की आशंका बढ़ जाती है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति
वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी व्यापक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिन की रिकवरी थम गई। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में जारी बिकवाली के चलते बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई है, जिसने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं के कमजोर होने के बावजूद अमेरिकी डॉलर की तेजी को थामने नहीं दिया। हालांकि इस महीने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे सकती हैं।
जापानी येन के मुकाबले डॉलर (USD/JPY) 158.00 के नीचे दायरे में सीमित रहा। बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन दिया है, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव डॉलर को साल के उच्चतम स्तर के करीब रखे हुए हैं। इस दोतरफा दबाव के कारण कारोबारी किसी स्पष्ट दिशा में बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे स्थिर बना हुआ है। फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती उम्मीदों ने बिना ब्याज वाली इस पीली धातु को आधार प्रदान किया है, लेकिन मजबूत डॉलर ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगा रखा है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत असमंजस
यूरोप में भी नीतिगत मोर्चे पर अनिश्चितता का माहौल है। सितंबर के मध्य से व्यापारियों ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के ब्याज दर अनुमानों से लगभग एक चौथाई फीसदी (25 आधार अंक) की कटौती को हटा दिया है। बाजार में यह माना जा रहा था कि फ्रांसीसी ऋण पत्रों में मंदी के चलते ईसीबी दरों में वृद्धि रोक देगा। हालांकि 2022 और 2023 में ऐसा ही दांव दो बार विफल साबित हो चुका है, जब केंद्रीय बैंक ने वित्तीय तनाव के बावजूद दरें बढ़ाई थीं क्योंकि मुद्रास्फीति उसके 2% के लक्ष्य से ऊपर थी। सितंबर में यूरो क्षेत्र की महंगाई दर 3.8% दर्ज की गई थी।
सामान्य परिस्थितियों में लक्ष्य से लगभग दोगुनी मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा विकल्प होता। लेकिन इस बार स्थितियां सामान्य नहीं हैं क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय सख्ती का हिस्सा खुद पूरा कर रहा है। इसके चलते यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक बेहद जटिल नीतिगत असमंजस का सामना कर रहा है, जो वैश्विक मुद्रा बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।
























