वैश्विक मुद्रा बाजार में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके चलते यूएसडी/सीएडी मुद्रा जोड़ी 1.4170 के निचले स्तर तक टूट गई। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में मंदड़ियों की पकड़ लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है, क्योंकि यह जोड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर 1.4200 के नीचे स्थिर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बैंकॉक में आयोजित मंच पर केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के बयानों के बाद बाजार का रुख बदला है, जिससे अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले कनाडाई डॉलर को जोरदार बढ़त हासिल हुई है।
केंद्रीय बैंक के बयानों से बाजार की दिशा में आया बदलाव
बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के दौरान दुनिया भर के केंद्रीय बैंकरों की टिप्पणियों पर निवेशकों की बारीक नजर थी। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने इस वैश्विक मंच पर संबोधन दिया, लेकिन उनके भाषण से नीतिगत दरों में अगली बढ़ोतरी के समय को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल सके। केविन वॉर्श ने दोहराया कि वह मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, किंतु उन्होंने आगामी ब्याज दर के रास्ते पर कोई ठोस खाका पेश नहीं किया। भविष्य की मौद्रिक सख्ती पर कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने से अमेरिकी डॉलर में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बिकवाली तेज हो गई।
दूसरी ओर, इसी मंच से बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर टिफ मैकलेम ने बिल्कुल अलग रुख अपनाया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि वैश्विक मौद्रिक सख्ती के चक्र में बैंक ऑफ कनाडा उन चुनिंदा प्रमुख केंद्रीय बैंकों में शामिल है जो इस समय पीछे चल रहे हैं। टिफ मैकलेम ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि यह स्थिति जितनी लंबी खिंचेगी, हालात उतने ही चुनौतीपूर्ण होते जाएंगे। उनके इस बयान ने आने वाले महीनों में कनाडाई केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं को हवा दे दी है, जिसके चलते कनाडाई डॉलर को व्यापक समर्थन मिला।
यूएसडी/सीएडी के लिए अहम तकनीकी स्तर और रुकावटें
तकनीकी चार्ट पर यूएसडी/सीएडी की चाल को देखें तो गिरावट की गति लगातार हावी दिख रही है। अगर यह जोड़ी ऊपर की ओर उबरने की कोशिश करती है, तो उसे सबसे पहले 1.4200 के दायरे में कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यह स्तर 6 अक्टूबर, 9 अक्टूबर और 13 अक्टूबर के निचले स्तरों के रूप में एक मजबूत समर्थन क्षेत्र बना हुआ था, जो अब टूटकर बाधा बन चुका है।
जब तक भाव इस 1.4200 के स्तर से नीचे बने रहेंगे, तब तक मंदी का रुझान हावी रहने के आसार हैं। यदि खरीदारी की नई लहर आती है और यह जोड़ी 1.4200 से ऊपर निकलने में कामयाब होती है, तो बाजार का ध्यान एक बार फिर 1.4300 के करीब स्थित 17 महीने के उच्चतम स्तर की ओर मुड़ जाएगा। इस 1.4300 के स्तर ने पूरे अक्टूबर महीने में कई बार तेजी के प्रयासों को सीमित किया है और यह मजबूत अवरोध बना हुआ है।
वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कनाडाई डॉलर का मजबूत प्रदर्शन
शुक्रवार को मुद्रा बाजार के दैनिक हीटमैप और प्रदर्शन के आंकड़ों के अनुसार कनाडाई डॉलर ने प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले शानदार मजबूती दिखाई है। सभी प्रमुख जोड़ीदारों में कनाडाई डॉलर ने जापानी येन के खिलाफ सबसे जोरदार तेजी दर्ज की। बैंक ऑफ कनाडा की तरफ से संभावित सख्ती के संकेतों ने कनाडाई करेंसी में नए खरीदारों को आकर्षित किया है।
मुद्राओं के विनिमय आंकड़ों से पता चलता है कि जब कनाडाई डॉलर को आधार मुद्रा के रूप में रखकर अमेरिकी डॉलर के साथ तुलना की जाती है, तो कनाडाई मुद्रा बढ़त की स्थिति में खड़ी दिखाई देती है, जिसने अमेरिकी डॉलर को बैकफुट पर धकेल दिया है।
अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी और अन्य बाजारों पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की अस्पष्ट टिप्पणियों का असर केवल यूएसडी/सीएडी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरे वैश्विक करेंसी बाजार पर महसूस किया गया। डॉलर इंडेक्स (डीएक्सवाई), जो दुनिया की प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, गिरकर लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया।
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी तेज उछाल देखने को मिला और एयूडी/यूएसडी मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गया। डॉलर पर बिकवाली के दबाव ने इस जोड़ी को ऊपर चढ़ने की पूरी जगह दी। वहीं दूसरी तरफ, डॉलर की चौतरफा गिरावट के कारण यूएसडी/जेपीवाई पर भी नया दबाव बना और यह जोड़ी एशियाई सत्र में 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गई।
मुद्रा बाजार के अलावा कमोडिटी बाजार में भी डॉलर की नरमी का सीधा लाभ देखा गया। अमेरिकी मुद्रा के कमजोर होने से सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी आई और खरीदार आकर्षित हुए, हालांकि पीली धातु पिछले दो सप्ताह के अपने सीमित दायरे में ही कारोबार करती रही। कुल मिलाकर, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग रुख ने विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में नई अस्थिरता पैदा कर दी है।


















