घरेलू शेयर बाजार में लगातार दो महीनों से जारी बिकवाली के दबाव के बाद आखिरकार राहत की सांस देखने को मिली है। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने पिछले आठ कारोबारी सप्ताहों से चली आ रही लगातार गिरावट की कड़ी को तोड़ दिया है, जो करीब 25 वर्षों में साप्ताहिक गिरावट का सबसे लंबा दौर था। इस सकारात्मक बदलाव के साथ बाजार अब 12 से 16 अक्टूबर 2026 के नए कारोबारी हफ्ते में सतर्क आशावाद के साथ कदम रख रहा है। बीते कारोबारी सप्ताह के समापन पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 संभलकर 22,520 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 72,472 के स्तर पर टिका। पूरे सप्ताह के दौरान दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में 0.5 से 0.8 प्रतिशत के दायरे में बढ़त दर्ज की गई।
लगातार बिकवाली के बाद तकनीकी सुधार के संकेत
हफ्तों की भारी गिरावट के बाद आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत जरूर लेकर आई है, लेकिन दलाल स्ट्रीट का माहौल अब भी पूरी तरह अनिश्चितताओं से मुक्त नहीं हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की तरफ से होने वाली निरंतर बिकवाली, वैश्विक बॉन्ड यील्ड की चाल, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मुद्रा बाजार में रुपये की स्थिति और चालू सितंबर तिमाही के आय परिणामों का दौर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। इसके अलावा देश में त्योहारी माहौल बना हुआ है, ऐसे में निवेशक नवरात्रि के पावन अवसर पर घरेलू खपत के रुझानों और उपभोक्ता खरीदारी की रफ्तार पर भी नजर रखेंगे।
निफ्टी में दर्ज की गई 0.44 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त आठ हफ्तों की लगातार फिसलन के बाद सामने आई है। इस सूचकांक को अपनी तकनीकी ट्रेंडलाइन और 100-सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) के आसपास मजबूत सहारा मिला है। चार्ट पर ओवरसोल्ड जोन से बाहर निकलने के बाद एक अल्पकालिक तकनीकी रिबाउंड की संभावना जरूर मजबूत हुई है, लेकिन जब तक प्रमुख प्रतिरोध स्तर पार नहीं हो जाते, तब तक बाजार में सावधानी बरतने का माहौल बना रहेगा। यदि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है और वैश्विक वित्तीय स्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो 12 से 16 अक्टूबर के दौरान यह रिकवरी आगे बढ़ सकती है। हालांकि तेजी की स्थिरता इस बात पर टिकी होगी कि क्या घरेलू पूंजी प्रवाह विदेशी बिकवाली के दबाव को संतुलित कर पाता है या नहीं। यदि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में दोबारा उछाल आता है, रुपये में कमजोरी बढ़ती है या कच्चे तेल के भाव अचानक चढ़ते हैं, तो इक्विटी बाजार पर दोबारा दबाव बन सकता है।
निफ्टी 50 के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह ने बाजार की तकनीकी संरचना पर विश्लेषण साझा किया है। डॉ. रवि सिंह ने कहा, "जब तक 22,150-22,200 के आसपास का साप्ताहिक निचला स्तर सुरक्षित है, तब तक सूचकांक 22,750 और फिर 21 दिन के ईएमए के पास 23,000 की तरफ रिकवरी बढ़ा सकता है।" हालांकि उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि व्यापक तकनीकी ट्रेंड अभी भी कमजोर बना हुआ है, इसलिए जब तक सूचकांक प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को दोबारा हासिल नहीं कर लेता, तब तक इस उछाल को सतर्कता के साथ देखा जाना चाहिए। बाजार में एक मजबूत और स्थायी सुधार की पुष्टि के लिए निरंतर खरीदारी की गति बेहद आवश्यक होगी।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार आगामी सप्ताह में निफ्टी के लिए 22,150 से 22,200 का दायरा अत्यंत महत्वपूर्ण आधार क्षेत्र बना रहेगा। यदि बुल्स बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखते हैं और खरीदारी का मोमेंटम बढ़ता है, तो ऊपर की तरफ 22,750 और 23,000 ऐसे प्रमुख स्तर होंगे जिन पर पैनी नजर रखनी होगी। यदि सूचकांक इन सपोर्ट स्तरों को बनाए रखने में नाकाम रहता है, तो बिकवाली का नया दौर शुरू हो सकता है। इसके विपरीत, प्रतिरोध स्तरों के पार निकलने पर ही बाजार में वास्तविक रिकवरी का ठोस संकेत मिलेगा।
बैंक निफ्टी में कंसॉलिडेशन और महत्वपूर्ण स्तर
बैंकिंग क्षेत्र के सूचकांक बैंक निफ्टी ने भी छह हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद पिछले सप्ताह 1.48 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। हालांकि दैनिक चार्ट पर यह सूचकांक अब कंसॉलिडेशन के चरण में प्रवेश कर चुका है। व्यापक तकनीकी दृष्टिकोण से बैंक निफ्टी का रुख अब भी सुस्त है, क्योंकि यह अपने 21-दिवसीय और 55-दिवसीय ईएमए तथा प्रमुख प्रतिरोध स्तरों के नीचे कारोबार कर रहा है। तकनीकी संरचना को मजबूती प्रदान करने के लिए बैंकिंग सूचकांक को अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज को फिर से हासिल करना जरूरी होगा। निवेशक ब्याज दरों के परिदृश्य, लोन ग्रोथ और कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर बैंकिंग और वित्तीय सेवा शेयरों में निरंतर लिवाली के संकेतों पर करीबी नजर रखेंगे।
डॉ. रवि सिंह ने बैंकिंग सूचकांक के तकनीकी लेवल्स पर राय देते हुए स्पष्ट किया है। डॉ. रवि सिंह ने कहा, "एक स्थायी सुधार के लिए बैंक निफ्टी को 55,520 के पास अपने 21 दिन के ईएमए को फिर से हासिल करने की जरूरत है, जिसके ऊपर 56,200 की तरफ कदम संभव है।" उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक सूचकांक अपने हालिया स्विंग लो 53,800 के ऊपर बना रहता है, तब तक अनुशासित जोखिम प्रबंधन के साथ 54,700 के पास गिरावट पर खरीदारी की सतर्क रणनीति पर विचार किया जा सकता है।
इस तकनीकी ढांचे के मुताबिक बैंक निफ्टी के लिए 53,800 का स्तर मुख्य सपोर्ट के रूप में काम करेगा, जबकि 55,520 का स्तर तात्कालिक रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस प्रतिरोध के ऊपर लगातार टिके रहने की स्थिति में 56,200 की ओर रास्ता खुल सकता है। जब तक यह दायरा नहीं टूटता, तब तक सूचकांक एक सीमित दायरे में फंसा रह सकता है, जहां कारोबारी व्यापक तेजी की बजाय चुनिंदा अवसरों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के बीच खींचतान
निकट भविष्य के बाजार परिदृश्य को आकार देने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के बीच जारी खींचतान सबसे बड़ा कारक बनी हुई है। पिछले कई हफ्तों से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर गहरा दबाव बनाया हुआ था। वहीं दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने इस बिकवाली के बड़े हिस्से को खपाने और बाजार को बहुत गहरी गिरावट से बचाने में अहम ढाल का काम किया है।
आगामी 12 से 16 अक्टूबर के कारोबारी सप्ताह में विदेशी पूंजी प्रवाह की दिशा यह तय करने में निर्णायक होगी कि हालिया रिबाउंड अगले हफ्ते भी जारी रहेगा या थम जाएगा। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आती है और घरेलू संस्थानों की खरीदारी का समर्थन बना रहता है, तो लार्ज-कैप शेयरों में एक मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन यदि विदेशी बिकवाली की रफ्तार फिर से तेज होती है, तो घरेलू निवेशकों के सहयोग के बावजूद सूचकांकों की बढ़त सीमित रह सकती है।



















