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मॉस्को रिफाइनरी पर यूक्रेन के बड़े हमले के बीच कच्चे तेल और ग्लोबल करेंसी में हलचलबाज़ार
21 सित॰ 2026, 8:08 am (2 घंटे पहले)· 0

मॉस्को रिफाइनरी पर यूक्रेन के बड़े हमले के बीच कच्चे तेल और ग्लोबल करेंसी में हलचल

यूक्रेन ने रविवार को मॉस्को की मुख्य तेल रिफाइनरी और आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए भीषण ड्रोन व मिसाइल हमला किया, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और प्रमुख मुद्राओं पर देखा गया। डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल फिसलकर 93.60 डॉलर पर आ गया है।

यूक्रेन ने रविवार को रूस की राजधानी मॉस्को और उसके नजदीकी इलाकों को निशाना बनाते हुए व्यापक स्तर पर रातभर ड्रोन और मिसाइल हमला किया। रूसी अधिकारियों ने राजधानी के चारों ओर बड़े पैमाने पर एयर डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने और नुकसान होने की पुष्टि की है। मॉस्को के मेयर सेर्गेई सोबयानिन के अनुसार, लगभग 450 ड्रोन राजधानी की दिशा में बढ़ रहे थे, जिनमें से हमलों ने शहर की मुख्य तेल रिफाइनरी और एक आवासीय इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस सैन्य कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कीव ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए मॉस्को क्षेत्र में स्थित एक अहम रूसी तेल प्रतिष्ठान और एक लॉजिस्टिक्स केंद्र को सटीक निशाना बनाया है। ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि ये बुनियादी ढांचा सीधे तौर पर उन अरबों डॉलर से जुड़ा है जो युद्ध के लिए जरूरी संसाधनों और सैन्य तंत्र को लगातार वित्तीय सहारा देते हैं।

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नाटो के सामने संभावित परीक्षण और भू-राजनीतिक चिंताएं

यूक्रेनी हमलों के तेज होते दायरे के बीच यूरोपीय खुफिया अधिकारियों ने भी गंभीर चिंताएं जताई हैं। यूरोपीय खुफिया तंत्र ने चेतावनी दी है कि रूस निकट भविष्य में नाटो के धैर्य और उसकी रक्षा प्रणाली का परीक्षण कर सकता है। एक अधिकारी के अनुसार, इस तरह का संभावित परीक्षण वर्षों में नहीं, बल्कि कुछ ही महीनों के भीतर देखने को मिल सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संकट और गहराने के आसार बन गए हैं।

सैन्य टकराव और रिफाइनरी को पहुंचे नुकसान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 1.74 प्रतिशत टूटकर 93.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आपूर्ति और मांग के गणित के साथ-साथ सुरक्षित निवेश की बदलती धारणा बाजार की चाल तय कर रही है।

डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और अंतरराष्ट्रीय बाजार का ढांचा

डब्ल्यूटीआई क्रूड अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कारोबार होने वाले प्रमुख कच्चे तेल के प्रकारों में शामिल है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ यह वैश्विक स्तर पर तीन सबसे बड़े तेल प्रकारों में गिना जाता है। अपनी कम ग्रेविटी और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे बाजार की शब्दावली में हल्का और मीठा तेल कहा जाता है। कम सल्फर होने की वजह से इसे रिफाइन करना बेहद आसान और सस्ता होता है, जिससे इसे उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है।

यह कच्चा तेल पूरी तरह अमेरिका से निकाला जाता है और इसे कुशिंग हब के रास्ते वितरित किया जाता है। कुशिंग को विश्व में पाइपलाइनों का चौराहा माना जाता है, जहां से विभिन्न दिशाओं में तेल का वितरण होता है। दुनिया भर के वित्तीय मीडिया और तेल बाजारों में डब्ल्यूटीआई की कीमत को मानक बेंचमार्क के रूप में लगातार उद्धृत किया जाता है।

मांग, आपूर्ति और भू-राजनीति से तय होती कीमतें

अन्य सभी प्रमुख वित्तीय संपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों को निर्धारित करने वाले मुख्य कारक आपूर्ति और मांग ही हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार तेज होती है, तो उद्योगों और परिवहन में ईंधन की मांग बढ़ती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके उलट, यदि वैश्विक विकास कमजोर पड़ता है, तो मांग घटने से दाम गिरने लगते हैं।

राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, सैन्य हमले और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को सीधे तौर पर बाधित कर सकते हैं, जिससे अचानक कीमतों में भारी उछाल या अनिश्चितता आ जाती है। इसके अलावा ओपेक देशों के फैसले भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी तेल के भाव को प्रभावित करती है। कमजोर डॉलर से तेल खरीदना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है, जबकि मजबूत डॉलर आयात करने वाले देशों के लिए इसे महंगा बना देता है।

इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक का उत्पादन संतुलन

अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी ईआईए द्वारा हर हफ्ते जारी की जाने वाली इन्वेंट्री रिपोर्ट भी कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। स्टॉक में होने वाले बदलाव मांग और आपूर्ति के वास्तविक संतुलन को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है, जिससे कीमतें ऊपर चढ़ती हैं। वहीं भंडार में बढ़ोतरी कमजोर मांग या अधिक आपूर्ति की ओर इशारा करती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

एपीआई अपने आंकड़े प्रत्येक मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी ईआईए अपनी रिपोर्ट अगले दिन बुधवार को प्रस्तुत करती है। करीब 75 प्रतिशत मौकों पर इन दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 1 प्रतिशत के मामूली अंतर के साथ एक-दूसरे से मेल खाते हैं। हालांकि सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को बाजार में अधिक प्रामाणिक और भरोसेमंद माना जाता है।

दूसरी ओर, पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो साल में दो बार होने वाली औपचारिक बैठकों में सदस्य देशों के लिए सामूहिक उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा घटाने का निर्णय लेता है, तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और भाव बढ़ जाते हैं। इसके विपरीत उत्पादन बढ़ाने पर बाजार में तेल की प्रचुरता से कीमतें गिरती हैं। ओपेक प्लस इस समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है।

विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल और केंद्रीय बैंकों के कदम

रूस और यूक्रेन के बीच गहराते तनाव के साथ-साथ पश्चिम एशिया के संकट ने विदेशी मुद्रा बाजारों को भी प्रभावित किया है। एशियाई कारोबारी सत्र में सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का विनिमय अनुपात 0.7100 के स्तर से ऊपर स्थिर बना रहा। अमेरिकी डॉलर की जुलाई के उच्च स्तर से शुरू हुई मामूली गिरावट थम गई, जिसे लगातार बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितता का समर्थन मिला। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना द्वारा लोन प्राइम रेट में कोई बदलाव न करने से ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर थोड़ा दबाव दिखा, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में आगे वृद्धि के अनुमानों ने ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले इसे सहारा दिया।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में थोड़ी मजबूती देखने को मिली, जिससे सोमवार को यूएसडी/जेपीवाई फिसलकर 157.00 से नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा किए गए रेट चेक के बाद संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने व्यापारियों को सतर्क कर रखा है। जापान में सार्वजनिक अवकाश के दिन रूस-यूक्रेन टकराव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कारोबारियों को जोखिम लेने से रोका, जिससे अमेरिकी डॉलर की गिरावट भी सीमित रही।

बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर वृद्धि और सोने पर दबाव

जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान ने नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से वित्तीय बाजार की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल था।

कमोडिटी बाजार में सोने की चाल भी सीमित रही। पिछले दो दिनों की बढ़त को भुनाने में नाकाम रहने के बाद नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया। पश्चिम एशिया में संघर्ष के और व्यापक होने के जोखिम ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया, जिससे शुक्रवार की गिरावट रुक गई। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े मौद्रिक रुख ने डॉलर को मजबूत बनाए रखा, जिसके चलते बिना ब्याज वाली बहुमूल्य धातु सोना 4,400 डॉलर के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा।

सवाल-जवाब

यूक्रेन ने मॉस्को में किन ठिकानों को निशाना बनाया?
यूक्रेन ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए मॉस्को की मुख्य तेल रिफाइनरी, एक लॉजिस्टिक्स केंद्र और एक आवासीय इमारत को निशाना बनाया।
मॉस्को की ओर कुल कितने ड्रोन भेजे गए थे?
मॉस्को के मेयर सेर्गेई सोबयानिन के अनुसार, लगभग 450 ड्रोन राजधानी की दिशा में बढ़ रहे थे।
हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत क्या रही?
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 1.74 प्रतिशत गिरकर 93.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लिया?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।
सोने की कीमत पर क्या असर देखने को मिला?
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के रुख के कारण सोना दबाव में रहा और 4,400 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।
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टिप्पणियाँ 1

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 घंटे पहले

यह घटना दिखाती है कि आधुनिक सैन्य संघर्षों में अब पारंपरिक मोर्चों के साथ-साथ डिजिटल और स्वचालित तकनीकों का कितना बड़ा दखल हो चुका है। मॉस्को पर एक साथ सैकड़ों ड्रोन का यह हमला इस बात का संकेत है कि युद्ध का स्वरूप अब पूरी तरह बदल रहा है, जहाँ सॉफ्टवेयर, एआई-संचालित नेविगेशन और ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ऊर्जा बुनियादी ढाँचे और लॉजिस्टिक्स हब पर इस तरह की डिजिटल रूप से निर्देशित स्ट्राइक से आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल सप्लाई नेटवर्क्स पर अभूतपूर्व दबाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर तकनीकी बाजारों और कमोडिटी ट्रेडिंग पर पड़ेगा।

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