पिछले कुछ सालों में Nvidia (NVDA) ने शेयर बाज़ार पर जिस तरह राज किया है, वैसा उदाहरण कम ही मिलता है। कंपनी का मार्केट कैप इतना बढ़ चुका है कि वह कई देशों की पूरी GDP से भी आगे निकल गया है। Nvidia की इस उड़ान ने पूरी दुनिया में AI की लहर को हवा दी और इसके पीछे कई कंपनियाँ इसी राह पर चल पड़ीं। इसी दौड़ में AMD भी शामिल है, और उसकी कुछ नई खोजें अब Nvidia के लिए गंभीर खतरा बनती दिख रही हैं। आइए समझते हैं कि यह सब कैसे हो सकता है।
Nvidia की कमाई का असली राज़
Nvidia के शेयरों में जो रिकॉर्ड उछाल आया, उसकी जड़ कंपनी की चिप्स की भारी माँग में है। AI मॉडल चलाने के लिए Nvidia के GPU (Graphics Processing Unit) ज़रूरी होते हैं, और इन्हें इस्तेमाल करना सस्ता सौदा नहीं है। Nvidia से चलने वाले क्लाउड सर्वर पर कंप्यूटिंग पावर किराए पर लेने के लिए कंपनियाँ हर महीने $2,500 से $3,000 तक चुकाती हैं। पूरा मॉडल इसी मासिक भुगतान पर टिका है, जो AWS और Lambda Labs जैसे क्लाउड प्रोवाइडर के ज़रिए वसूला जाता है।
AMD कैसे बन रहा है Nvidia के शेयरों के लिए खतरा
असली चुनौती यहीं से शुरू होती है। इस साल CES (Consumer Electronics Show) में AMD की CEO Lisa Su ने एक $1,499 का मिनी PC पेश किया, जो उसी श्रेणी का AI मॉडल चला रहा था जिसके लिए कंपनियाँ हर महीने मोटी रकम देती हैं। यानी एक बार खरीदी गई सस्ती मशीन वही काम कर सकती है जिसके लिए अब तक लगातार किराया देना पड़ता था।
AMD की यह नई सोच Nvidia की मासिक फीस को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है। इसी बीच Google ने भी Anthropic और Meta के साथ ऐसे समझौते किए हैं जिनके तहत Nvidia की चिप्स की जगह उसकी अपनी चिप्स इस्तेमाल होंगी।
Nvidia का किराये वाला मॉडल अब तक इसलिए चल रहा था क्योंकि बाज़ार में उसका कोई सीधा प्रतिद्वंद्वी नहीं था। लेकिन AMD के अनोखे डिज़ाइन के साथ यह तस्वीर बहुत जल्द बदल सकती है। Nvidia के लिए और भी चिंता की बात यह है कि AMD की पकड़ CPU और GPU दोनों बाज़ारों में है, जबकि Nvidia फिलहाल सिर्फ़ GPU बाज़ार तक ही सीमित है।
जोखिम भी कम नहीं
हालाँकि AMD में Nvidia के दबदबे को पलटने का दम है, लेकिन एकमुश्त खरीद वाला यह समाधान खुद AMD के लिए ठहराव की वजह भी बन सकता है। कंपनियाँ प्रोसेसिंग यूनिट एक बार खरीद लेंगी और शायद सालों तक उसे अपग्रेड करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। इसका सीधा असर मुनाफ़े पर पड़ेगा, जो एक स्तर पर पहुँचकर ठहर सकता है।
इसके अलावा दूसरी कंपनियाँ भी अपने सस्ते विकल्पों के साथ इस बाज़ार में उतर सकती हैं। और खुद Nvidia भी ऐसी नई प्रोसेसिंग यूनिट बना सकता है जो आगे चलकर AMD के लिए भी चुनौती खड़ी कर दे।













