जुलाई 2026 के अंतिम कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर बाजार मिला-जुला रुख अपनाते हुए बंद हुआ। इस दौरान टेक कंपनियों के शेयरों पर बने भारी दबाव के कारण प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि आखिरी कारोबारी सत्र की शानदार खरीदारी ने बड़े बेंचमार्क सूचकांकों को मासिक नुकसान से बचा लिया। नैस्डैक 100 सूचकांक में जुलाई के दौरान 1,500 से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट देखने को मिली। वहीं 31 जुलाई को हुई रिकवरी के बावजूद नैस्डैक कंपोजिट मंदड़ियों के प्रभाव से बाहर निकलने में नाकाम रहा और महीने के अंत में करीब 3% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके विपरीत, डैउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और एसएंडपी 500 जो जुलाई के उत्तरार्ध तक नुकसान दर्ज करने की ओर बढ़ रहे थे, महीने के आखिरी दिन जबरदस्त तेजी के साथ हरे निशान में बंद होने में सफल रहे। आने वाले समय में निवेशकों की नजर मिडल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की चाल पर टिकी रहेगी।
आखिरी सत्र की रिकवरी से डैउ और एसएंडपी 500 मासिक नुकसान से उबरे
जुलाई के अंतिम कारोबारी दिन से ठीक पहले अमेरिकी शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक मासिक नुकसान की ओर बढ़ते दिख रहे थे। 30 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, डैउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में महीने-दर-महीने के आधार पर 0.21% की गिरावट का रुझान था, जबकि व्यापक एसएंडपी 500 सूचकांक में करीब 1% की गिरावट दर्ज की जा रही थी। हालांकि शुक्रवार 31 जुलाई को बाजार में लौटी चौतरफा खरीदारी ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया और दोनों प्रमुख सूचकांकों को लाल निशान से बाहर निकालकर हरे निशान पर पहुंचा दिया।
शुक्रवार को कारोबार की समाप्ति पर डैउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 276.97 अंक या 0.53% बढ़कर 52,485.03 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एसएंडपी 500 सूचकांक 52.09 अंक या 0.70% की मजबूती के साथ 7,489.72 पर बंद होने में कामयाब रहा। टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट में भी शुक्रवार को 251.68 अंक या 1% की तेजी आई और यह 25,373.85 पर बंद हुआ। 27 जुलाई से 31 जुलाई तक के कारोबारी हफ्ते के दौरान डैउ जोन्स 0.6% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट में क्रमशः 0.34% और 0.55% की तेजी दर्ज की गई।
शुक्रवार की तेजी के बावजूद, पूरे जुलाई महीने का रिकॉर्ड दिग्गज टेक कंपनियों और पारंपरिक औद्योगिक शेयरों के बीच गहरा अंतर दिखाता है। 1 जुलाई से 31 जुलाई तक के पूरे महीने के दौरान डैउ जोन्स ने 179.79 अंक या 0.34% की शुद्ध बढ़त हासिल की। एसएंडपी 500 में भी 6.49 अंक या 0.09% की मामूली बढ़त दर्ज की गई। लेकिन टेक सेक्टर के लिए जुलाई का महीना बेहद निराशाजनक रहा। नैस्डैक कंपोजिट पूरे महीने के दौरान 666.18 अंक या 2.6% टूट गया। नैस्डैक 100 में गिरावट और भी भीषण रही, जो महीने भर में 1,534.94 अंक यानी 5.15% का गोता लगाकर 28,274.20 के स्तर पर बंद हुआ।
बिग टेक शेयरों का प्रदर्शन: अमेज़न में उछाल, आपूर्ति बाधाओं से एप्पल सुस्त
जुलाई महीने के दौरान व्यक्तिगत शेयरों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने कॉर्पोरेट नतीजों और भविष्य के अनुमानों पर प्रतिक्रिया दी। क्लाउड कंप्यूटिंग कारोबार में मजबूत वृद्धि के बल पर अमेज़न के शेयर में 15.3% की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर की मांग से जुड़ी उम्मीदों ने बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों को बल दिया। जुलाई के दौरान अल्फाबेट के शेयर में 6.9% का उछाल आया, माइक्रोसॉफ्ट 3% बढ़ा, और मेटा ने 3.3% की बढ़त दर्ज की, क्योंकि कंपनियों द्वारा AI टूल्स में भारी निवेश जारी रहा।
इन सब के बावजूद एप्पल के शेयर में दर्ज 7.3% की गिरावट ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। सेमीकंडक्टर चिप्स की किल्लत के कारण उत्पादन लागत बढ़ने और जून तिमाही में विनिर्माण घटने से कंपनी के नतीजों पर असर पड़ा। टेक सेक्टर से इतर अन्य क्षेत्रों में भी सुस्ती देखने को मिली। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स में 2% की गिरावट आई, जबकि फार्मा दिग्गज एली लिली 0.6% नीचे आया। ऊर्जा कंपनी एक्सॉनमोबाइल के शेयर में 1% की कमी दर्ज की गई, क्योंकि रिफाइनरी क्षमता सीमित रहने के चलते कंपनी दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का पूरा लाभ उठाने से वंचित रह गई।
फेडरल रिजर्व का निर्णय, बॉन्ड यील्ड में उछाल और कॉर्पोरेट आय की स्थिति
जुलाई के अंतिम सप्ताह के दौरान अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के बावजूद वॉल स्ट्रीट पर उतार-चढ़ाव बना रहा। केंद्रीय बैंक की ओर से भविष्य में दरों में कटौती के स्पष्ट संकेतों के अभाव से वित्तीय बाजारों में निराशा देखी गई। इस अस्पष्टता के कारण लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया, जिसने अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत पर दबाव बढ़ाया। वित्तीय परामर्श संस्थान चार्ल्स श्वाब की रिपोर्ट के अनुसार, दर नीति में स्पष्टता न होने से निवेशकों में निराशा बढ़ी और बॉन्ड यील्ड में उछाल दर्ज किया गया।
टेक और AI सेक्टर में आई गिरावट पर चार्ल्स श्वाब के डेरिवेटिव्स रिसर्च एंड स्ट्रैटेजी निदेशक नेथन पीटरसन ने कहा कि टेक सूचकांकों में उतार-चढ़ाव अत्यधिक लेवरेज, भारी पोजीशनिंग और कंपनियों द्वारा AI पर किए जा रहे अत्यधिक खर्च एवं इसके आर्थिक लाभ को लेकर उठ रहे सवालों का नतीजा है। हालांकि, व्यापक बाजार में कॉर्पोरेट कंपनियों के बुनियादी आंकड़े अब भी मजबूत बने हुए हैं। दूसरी तिमाही के नतीजे दिखाते हैं कि भले ही नतीजों के बाद शेयरों में तात्कालिक प्रतिक्रिया सुस्त रही हो, लेकिन कंपनियों की आय मजबूत स्थिति में है।
अब तक एसएंडपी 500 सूचकांक की 305 कंपनियों ने दूसरी तिमाही के वित्तीय आंकड़े जारी किए हैं। इनमें से 68% कंपनियों ने राजस्व (टॉप लाइन) के अनुमानों को पछाड़ा है, जबकि 86% कंपनियों ने शुद्ध लाभ (बॉटम लाइन) के मामले में अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन किया है। अर्निंग्स सीजन के मध्य चरण तक कंपनियों की प्रति शेयर आय (EPS) वृद्धि 57.00% की दर से आगे बढ़ रही है, जबकि कुल राजस्व में 14.81% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।
वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और दक्षिण कोरिया के कॉस्पी का यू-टर्न
जुलाई में उतार-चढ़ाव केवल अमेरिकी शेयर बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी भारी हलचल देखी गई। अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार ब्याज दरों के रुझान और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बने रहे। दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क कॉस्पी (KOSPI) सूचकांक ने जुलाई के अंतिम सप्ताह के दौरान अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का सामना किया, जो वैश्विक बाजारों में बनी अस्थिरता को दर्शाता है।
सप्ताह के शुरुआती दिनों में कॉस्पी सूचकांक में लगातार दो दिनों तक 10-10 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बाजार ने जोरदार वापसी की और एक ही दिन में 17.91% की ऐतिहासिक छलांग लगाई। यह तेज रिकवरी दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक मौद्रिक नीति और आर्थिक संकेतों के आधार पर कितनी तेजी से सतर्कता और खरीदारी के बीच बदलाव कर रहे हैं।
कच्चा तेल, मिडल ईस्ट संघर्ष और उभरते बाजारों पर असर
अगस्त के महीने में निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार के घटनाक्रमों पर केंद्रित रहेगा। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पोनमुडी आर के अनुसार, आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर मिडल ईस्ट के हालात पर टिकी रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी नए सैन्य तनाव से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम धारणा पर तत्काल असर पड़ेगा। वर्तमान में डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चा तेल $86 से $87 प्रति बैरल के ऊंचे दायरे में कारोबार कर रहा है।
यद्यपि कच्चे तेल की कीमतें अपने हालिया उच्च स्तरों से थोड़ी नीचे आई हैं, फिर भी यह स्तर वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है। ऊर्जा आपूर्ति या समुद्री व्यापार मार्गों में कोई भी रुकावट कच्चे तेल में फिर से तेजी ला सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों पर नजर रखेंगे। सितंबर की फेड नीति बैठक से पहले रोजगार के आंकड़े, विनिर्माण सर्वेक्षण और मुद्रास्फीति के आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं या केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाता है, तो अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है, जिससे उभरते बाजारों के शेयर बाजारों पर दबाव पड़ेगा। इसके विपरीत, सुस्त आर्थिक आंकड़े बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम कर सकते हैं और शेयर बाजार को समर्थन दे सकते हैं।


















