मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली प्रमुख भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय आंकड़े पेश किए हैं। 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई इस तिमाही के दौरान कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 41 प्रतिशत की छलांग लगाकर 25,548 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते वित्त वर्ष की समान तिमाही में 18,165 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। पिछली तिमाही की तुलना में भी मुनाफे में ठोस बढ़त देखने को मिली है, जहां पहली तिमाही में रिलायंस ने 20,946 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। इसके साथ ही सहयोगी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों के नफे-नुकसान की हिस्सेदारी को जोड़कर कंपनी का कर पश्चात लाभ 33.8 प्रतिशत बढ़कर 29,550 करोड़ रुपये यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।
कंपनी के शीर्ष स्तर के कारोबार यानी कुल राजस्व में भी इस दौरान ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई। समीक्षाधीन तिमाही में रिलायंस का समेकित राजस्व 29 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 3,62,268 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो किसी भी एक तिमाही में कंपनी का अब तक का सर्वोच्च राजस्व स्तर है। आय के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन में कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स यानी ओ2सी कारोबार और हाल ही में सूचीबद्ध हुई दूरसंचार शाखा जियो प्लेटफॉर्म्स की अग्रणी हिस्सेदारी रही। दोनों प्रमुख कारोबारों की लगातार बेहतर मांग और मजबूत परिचालन ने कंपनी के शीर्ष स्तर की वृद्धि को सशक्त आधार दिया।
ओ2सी कारोबार की अगुवाई और परिचालन लाभ में उछाल
समीक्षाधीन तिमाही के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल एबिटा 23.9 प्रतिशत सालाना बढ़कर 62,409 करोड़ रुपये यानी लगभग 6.5 अरब डॉलर दर्ज हुआ। इस वित्तीय उछाल में सबसे उल्लेखनीय योगदान ओ2सी इकाई का रहा, जिसने ईंधन बाजारों में बेहतर मांग और अनुकूल मार्जिन का पूरा फायदा उठाया। इसके अलावा डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल डेल्टा में सुधार और मजबूत घरेलू मांग ने भी वित्तीय नतीजों को ऊपर खींचने में मदद की। कंपनी की तरफ से फीडस्टॉक खरीद प्रक्रिया और उत्पादों की आपूर्ति शृंखला को समय पर व्यवस्थित करने से मार्जिन में उल्लेखनीय बढ़त हासिल हुई।
मुकेश अंबानी ने नतीजों पर कहा, "हमारे ओ2सी कारोबार ने इस तिमाही में ईंधन बाजारों की मजबूती, पेट्रोकेमिकल डेल्टा में सुधार और घरेलू मांग के बल पर बेहद मजबूत प्रदर्शन किया।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक कमोडिटी बाजारों में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद कंपनी के घरेलू बाजार-उन्मुख पोर्टफोलियो और एकीकृत परिचालन मॉडल ने रिलायंस को बाहरी उतार-चढ़ाव से निपटने में सक्षम बनाए रखा।
जियो प्लेटफॉर्म्स और रिलायंस रिटेल का प्रदर्शन ढांचा
तिमाही नतीजों की घोषणा के समय सभी की निगाहें जियो प्लेटफॉर्म्स पर भी टिकी थीं, जिसकी शेयर बाजार में इसी सप्ताह शुरुआत हुई थी और लिस्टिंग के बाद यह कंपनी की पहली त्रैमासिक वित्तीय रिपोर्ट थी। हालांकि बाजार बंद होने तक बीएसई पर जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 1 प्रतिशत गिरकर 1,410.35 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जिससे कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण 13 लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 12,98,335.21 करोड़ रुपये रह गया। शेयर दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुआ था।
वहीं दूसरी तरफ कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने इस तिमाही के वित्तीय नतीजों को लेकर अनुमान जताया था कि रिलायंस का कुल समेकित एबिटा सालाना आधार पर 15 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 11.1 प्रतिशत बढ़ेगा। विश्लेषकों का मानना था कि ओ2सी खंड का एबिटा 47 प्रतिशत सालाना बढ़ेगा, जिसे सेज रिफाइनरी की मजबूत कमाई, अमेरिकी ईथेन-आधारित पेट्रोकेमिकल लागत और भारतीय रुपये में कमजोरी से समर्थन मिलेगा। इसके विपरीत खुदरा खंड यानी रिटेल कारोबार में एबिटा के 0.8 प्रतिशत मामूली घटने और तेल व गैस खंड के एबिटा में गिरते उत्पादन के चलते 7.2 प्रतिशत गिरावट की संभावना जताई गई थी।
फंड जुटाने की मंजूरी और कॉरपोरेट इतिहास
रिलायंस के निदेशक मंडल ने परिणामों की समीक्षा के साथ-साथ निजी नियोजन के आधार पर सूचीबद्ध, सुरक्षित या असुरक्षित, रिडीमेबल गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र यानी एनसीडी जारी करके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी देने की तैयारी की। हालांकि नियामक फाइलिंग में कंपनी ने कोई लाभांश, बोनस शेयर या स्टॉक विभाजन की योजना घोषित नहीं की। कंपनी का ध्यान इस चरण में पूंजी जुटाने और बैलेंस शीट को और अधिक मजबूत बनाने पर केंद्रित रहा है।
ऐतिहासिक रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयरधारकों को बोनस और लाभांश देने का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। कंपनी ने मई 2003 से लेकर अब तक 26 बार लाभांश वितरित किया है। इसके अलावा 2009, 2017 और अक्टूबर 2024 में दिवाली के अवसर पर 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी किए थे। अक्टूबर 2024 के बोनस इश्यू के बाद कंपनी ने अप्रैल 2025 में 5.50 रुपये प्रति शेयर और जून 2026 में 6 रुपये प्रति शेयर का अंतिम लाभांश शेयरधारकों को दिया था। नतीजों से ठीक पहले रिलायंस का शेयर भाव 0.5 प्रतिशत टूटकर 1,162.50 रुपये पर आ गया था, जिसने दिन के दौरान 1,157.35 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो इसके 52 हफ्तों के निचले स्तर 1,152.30 रुपये के बेहद करीब था।




















