भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली को थामने और बाजार में पूंजी प्रवाह को नई मजबूती देने के उद्देश्य से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है। नियामक ने विदेशी निवेशकों पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी टैक्स को समाप्त करने की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, घरेलू खुदरा निवेशकों को सहारा देने के लिए सेबी ने म्यूचुअल फंड निवेश के नियमों में भी राहत देने की पैरवी की है, ताकि एक साल से अधिक समय तक रखी गई यूनिट्स को बिना किसी टैक्स देनदारी के दूसरी योजनाओं में बदला जा सके। यह संपूर्ण प्रस्ताव आगामी फरवरी महीने में पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2027 से पहले चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिस पर अंतिम निर्णय निर्मला सीतारमण के नेतृत्व वाला वित्त मंत्रालय लेगा।
विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और विनियामक की पहल
विदेशी संस्थागत निवेशक बीते छह सालों से भारतीय इक्विटी बाजारों में लगातार शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। इस लंबी अवधि की बिकवाली ने न केवल घरेलू शेयर सूचकांकों पर दबाव बनाया है, बल्कि भारतीय मुद्रा पर भी गहरा असर डाला है। स्टॉक एज के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि साल-दर-साल के आधार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की कुल निकासी रिकॉर्ड 4,48,229.19 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इससे पहले वर्ष 2024 और 2025 में भी विदेशी निवेशकों ने प्रत्येक वर्ष 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध निकासी दर्ज की थी। विदेशी फंडों की इस भारी बिकवाली के चलते पैदा हुए दबाव को कम करने के लिए नियामक ने बीते दो वर्षों के दौरान विदेशी निवेशकों के साथ कई दौर की बैठकें की थीं, जिसके बाद यह कर सुधार का प्रस्ताव सामने रखा गया है।
घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए स्विचिंग पर राहत का प्रस्ताव
नियामक का दूसरा महत्वपूर्ण सुझाव घरेलू इक्विटी म्यूचुअल फंड के करोड़ों खुदरा निवेशकों को राहत पहुंचाने से संबंधित है। वर्तमान में आम बचतकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर रखे गए डायवर्सिफाइड घरेलू इक्विटी फंडों के रिटर्न इस वर्ष सुस्त रहे हैं। मॉर्निंगस्टार के आंकड़ों के अनुसार, लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंडों के औसत रिटर्न में इस अवधि के दौरान 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सेबी ने सिफारिश की है कि यदि कोई निवेशक एक साल से अधिक समय तक होल्ड की गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचकर उसी राशि को किसी नई फंड स्कीम में दोबारा निवेश करता है, तो उस बिक्री पर एलटीसीजी टैक्स से छूट मिलनी चाहिए। इस कदम से निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को बिना अतिरिक्त कर भार के पुनर्गठित करने की सुविधा मिलेगी।
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का बढ़ता आकार और खुदरा भागीदारी
घरेलू बाजार में खुदरा निवेशकों की बढ़ती ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्तियां यानी एयूएम लगभग 82.6 लाख करोड़ रुपये, जो करीब 870.80 अरब डॉलर के बराबर हैं, तक पहुंच चुकी हैं। इसके साथ ही व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी के जरिए हर महीने औसतन 30,000 करोड़ रुपये से 32,000 करोड़ रुपये का नया निवेश आ रहा है। सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 10.06 करोड़ एसआईपी योगदान खाते सक्रिय हैं, जबकि कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या 28.62 करोड़ दर्ज की गई है। अकेले एसआईपी के तहत प्रबंधित परिसंपत्तियों का आंकड़ा 17.86 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में घरेलू फंडों के लिए प्रस्तावित कर राहत करोड़ों छोटे निवेशकों की बचत को बेहतर सुरक्षा और लचीलापन दे सकती है।
बाजार विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों का दृष्टिकोण
ग्लोबल ब्रोकिंग फर्म जेफरीज का मानना है कि कैपिटल गेन्स टैक्स में किसी भी प्रकार की कटौती भारतीय शेयर बाजार के आकर्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी बढ़ा देगी। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा आने वाले फंड प्रवाह में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हो सकता है। ब्रोकरेज फर्म आईआईएफएल के एक अनुमान के अनुसार, यदि कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है, तो इससे विदेशी निवेशकों के रिटर्न में लगभग 2.3 प्रतिशत अंकों की सीधी बढ़ोतरी हो सकती है। यह अतिरिक्त रिटर्न विदेशी फंड प्रबंधकों को भारत की तरफ अपनी पूंजी आवंटित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
एसबीआई रिसर्च की नीतिगत बदलाव और संरचनात्मक उपायों की मांग
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई ने भी अपने शोध नोट में विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए एलटीसीजी टैक्स हटाने की आवश्यकता पर बल दिया है। एसबीआई के आकलन के अनुसार, विदेशी निवेशकों का लगातार बाहर जाना वैश्विक स्तर पर उनकी घटती भागीदारी को दर्शाता है, जिसके समाधान के लिए नीतिगत हस्तक्षेप अनिवार्य हो चुका है। एसबीआई रिसर्च ने अपने विश्लेषण में कहा है कि सरकार को इक्विटी सेगमेंट में आने वाले अस्थिर पूंजी प्रवाह को मजबूती देने के लिए होल्डिंग अवधि को बढ़ाकर दो से तीन साल करने और इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को पूरी तरह समाप्त करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
एसबीआई का यह भी मानना है कि वित्तीय बाजारों और विनिमय दर को स्थिर रखने के लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए जाने वाले मौद्रिक और विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं हैं। सरकार की ओर से ठोस संरचनात्मक कदमों की आवश्यकता है। एसबीआई के अनुसार, तीन साल जैसी उचित होल्डिंग अवधि पूरी होने के बाद विदेशी पूंजी आवंटकों के लिए पर्याप्त रूप से कम कर का माहौल तैयार करने से अतिरिक्त पूंजी प्रवाह को गति मिल सकती है, क्योंकि भारतीय बाजार का ढांचा अब भी आकर्षक है और यहां की प्रमुख ब्लू-चिप कंपनियां वैश्विक स्तर पर आकर्षक रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।
कैपिटल गेन्स टैक्स की मौजूदा व्यवस्था और नियम
वर्तमान वित्तीय ढांचे में एलटीसीजी इक्विटी, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, डेट सिक्योरिटीज, सोना, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट यानी आरईआईटी और कमोडिटीज सहित विभिन्न बाजार से जुड़े साधनों पर लागू होता है। इसके साथ ही सेबी के नियमों के अनुसार निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा रखी गई प्रतिभूतियों पर भी कैपिटल एसेट्स के तहत एलटीसीजी वसूला जाता है, जबकि अचल संपत्ति यानी रियल एस्टेट पर भी यह लागू होता है। वहीं 12 महीने से कम समय के लिए रखे जाने वाले बाजार से जुड़े एसेट्स पर 20 प्रतिशत की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स यानी एसटीसीजी टैक्स लगाया जाता है।
आयकर विभाग की आधिकारिक परिभाषा के अनुसार, किसी भी करदाता द्वारा ट्रांसफर की तारीख से ठीक पहले 36 महीने से अधिक समय तक रखी गई पूंजीगत संपत्ति को लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है। ऐसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट के ट्रांसफर से होने वाले मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कहा जाता है। हालांकि इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड के मामले में यह अवधि एक वर्ष से अधिक होने पर लागू होती है। आगामी बजट में यदि वित्त मंत्रालय सेबी के इन सुझावों को स्वीकार कर लेता है, तो यह भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को पुनर्जीवित करने और घरेलू खुदरा निवेशकों को पोर्टफोलियो प्रबंधन में सुगमता प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।



















