ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में रोजगार के मोर्चे पर लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है, जिससे केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीतियों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। डॉयचे बैंक के मुख्य यूके अर्थशास्त्री संजय राजा के ताजा मूल्यांकन के अनुसार, रोजगार सृजन में संघर्ष और रिक्तियों में लगातार आ रही कमी यह साफ संकेत देती है कि रोजगार की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। हालांकि अर्थव्यवस्था के उत्पादन में वृद्धि उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन चिंता की बात यह है कि यह पूरी बढ़त कम कार्यबल के सहारे हासिल की जा रही है। ऐसे माहौल में बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति के लिए यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि मौजूदा बैंक रेट अर्थव्यवस्था की गति को सीमित करने का काम प्रभावी रूप से कर रही है।
श्रम बाजार में ठहराव और पेरोल में गिरावट के आंकड़े
अर्थव्यवस्था में नौकरी के अवसरों की स्थिति का आकलन करते हुए अर्थशास्त्री संजय राजा ने माना कि श्रम बाजार के पूरी तरह निचले स्तर तक पहुंच जाने की धारणा को ताजा आंकड़ों ने झटका दिया है। उन्होंने कहा, "Today’s labour market data throws a small (and maybe temporary) wrench in our view that the labour market is bottoming out." सर्वे आधारित आंकड़ों में कुछ आशावादी रुख दिखने के बावजूद वास्तविक आंकड़े श्रम बाजार की गहरी सुस्ती की तस्वीर पेश कर रहे हैं। यूके के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश की बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही, जो कि अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप थी। इसके विपरीत, एचएमआरसी से जारी पेरोल डेटा में अगस्त के दौरान 26,000 नौकरियों की भारी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आगे चलकर इसमें कुछ संशोधन की उम्मीद जताई जा रही है।
तिमाही आधार पर देखे जाने वाले वर्कफोर्स जॉब्स डेटा में भी रोजगार में गिरावट की प्रवृत्ति साफ दिखाई दी है। वसंत ऋतु के दौरान कुल कार्यबल नौकरियों में 48,000 की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें दूसरी तिमाही के भीतर कर्मचारियों की नौकरियों में 10,000 की कमी शामिल है। यह आंकड़ा दिखाता है कि कंपनियां नए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर काफी सतर्क रुख अपना रही हैं और मौजूदा पदों को भरने में भी हिचकिचाहट देखी जा रही है। रिक्तियों में आ रही यह लगातार गिरावट दर्शाती है कि आने वाले महीनों में नौकरी चाहने वालों को अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
वेतन वृद्धि के रुझान और उत्पादकता का बढ़ता दायरा
वेतन से जुड़े आंकड़ों में मामूली सुधार या सुधार की प्रक्रिया के संकेत मिले हैं, जिसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति द्वारा करीबी नजर रखे जाने वाले मुख्य पैमाने, एडब्ल्यूई प्राइवेट रेगुलर पे में जुलाई के दौरान तीन महीने के आधार पर सालाना 2.9 प्रतिशत की दर दर्ज की गई। मजदूरी में होने वाली इस तरह की चाल केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति अनुमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वेतन की गति सीधे तौर पर सेवा क्षेत्र की महंगाई को प्रभावित करती है।
ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के संदर्भ में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आर्थिक विकास अनुमानों से बेहतर रहने के बावजूद इसमें काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है। इसका सीधा तकनीकी मतलब यह निकलता है कि उत्पादकता की दर में वृद्धि दर्ज की जा रही है, क्योंकि कम कर्मचारियों के साथ अधिक उत्पादन निकाला जा रहा है। इसके बावजूद संजय राजा का मानना है कि इन शुरुआती संकेतों के आधार पर यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि ब्रिटिश रोजगार बाजार सभी संकटों से पूरी तरह बाहर आ चुका है। मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों के लिए यह सुस्त रोजगार ढांचा एक मजबूत आधार प्रदान करता है कि वर्तमान में लागू बैंक रेट प्रतिबंधात्मक रुख बनाए रखने में सक्षम है।
वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
ब्रिटेन के घरेलू आर्थिक घटनाक्रम के साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी नीतिगत फैसलों को लेकर हलचल तेज है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान 0.7150 के नीचे कमजोर बनी रही, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब टिके हुए हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई के जोखिम और अगस्त महीने में चीन के आर्थिक आंकड़ों में आए मिले-जुले रुझानों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव बनाए रखा।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) लगातार मजबूती दिखाते हुए 155.00 के स्तर की तरफ बढ़ गया है। कारोबारी इस सप्ताह होने वाली एफओएमसी और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं और बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने डॉलर को तेजी दी है। हालांकि बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति सामान्यीकरण को लेकर सख्त होते अनुमान जापानी येन को सहारा दे रहे हैं, जिससे इस विनिमय जोड़ी की अतिरिक्त बढ़त सीमित रहने की संभावना है।
सोने की कीमतों में गिरावट और सुरक्षित निवेश की मांग
वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली पीली धातु यानी सोने पर भी लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव गिरकर 4,260 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में आ गए। डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में अनिश्चितता और फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों की अतिरिक्त सतर्कता ने सोने की धारणा को कमजोर किया है। कमोडिटी बाजार के सहभागी केंद्रीय बैंकों के आगामी रुख पर नजरें टिकाए हुए हैं, जिससे धातु बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।


















