ब्रिटेन के श्रम बाजार से जुड़े ताजा आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों के संकेतों के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। ब्रिटिश पाउंड में आई कमजोरी के चलते यूरो ने अपने पिछले नुकसान की भरपाई करते हुए बढ़त दर्ज की है। मुद्रा बाजार में यूरो बनाम पाउंड की विनिमय दर 0.8560 के आसपास पहुंच गई, हालांकि दो कारोबारी सत्रों में दर्ज की गई करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह अब भी सतर्क दायरे में बनी हुई है। इससे पहले कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी फिसलकर 0.8552 के स्तर तक चली गई थी, जो दो सप्ताह का निचला स्तर था। ब्रिटेन में रोजगार परिदृश्य से जुड़े विरोधाभासी संकेतों ने निवेशकों को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
ब्रिटेन के श्रम बाजार से सामने आए विरोधाभासी आंकड़े
ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी किए गए रोजगार आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की मिली-जुली तस्वीर पेश की है। जुलाई को समाप्त हुई तीन महीने की अवधि के दौरान अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन मानकों पर आधारित बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही। बाजार विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे थे कि यह दर बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, ऐसे में हेडलाइन बेरोजगारी दर ने मामूली राहत जरूर दी। हालांकि, वास्तविक चिंता बेरोजगारी लाभ के लिए किए जाने वाले नए दावों की संख्या को लेकर पैदा हुई, जहां तेज उछाल दर्ज किया गया।
आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी भत्ता मांगने वाले नए दावेदारों की संख्या में 27.8 हजार की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों ने इस दौरान मात्र 8.3 हजार की वृद्धि का अनुमान लगाया था, जिसकी तुलना में वास्तविक आंकड़ा तीन गुना से भी अधिक रहा। इससे पिछले महीने में इन दावों में 11.8 हजार की कमी दर्ज की गई थी, लेकिन ताजा उछाल ने श्रम बाजार में बन रहे नए दबाव को उजागर कर दिया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि हेडलाइन बेरोजगारी दर भले ही स्थिर दिख रही हो, लेकिन दावों में अप्रत्याशित उछाल यह संकेत देता है कि आने वाले समय में रोजगार के मोर्चे पर चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और बॉन्ड योजना पर नजर
इस सप्ताह ब्रिटिश अर्थव्यवस्था के लिहाज से कई अहम घटनाक्रम कतार में हैं। बुधवार को ब्रिटेन के अगस्त महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े जारी होने हैं, जबकि सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गुरुवार को बैंक ऑफ इंग्लैंड का मौद्रिक नीति संबंधी फैसला रहेगा। व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों को यथावत रखेगा। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर बेली ने पिछले सप्ताह ब्रिटेन की संसद में दिए अपने बयान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को अपरिहार्य मानने वाले विचारों को खारिज किया था। हालांकि, बैंक की मौद्रिक नीति समिति में फैसले को लेकर मतभेद उभरने की पूरी संभावना जताई जा रही है। बाजार प्रतिभागी समिति के उन असंतुष्ट सदस्यों की संख्या पर कड़ी नजर रखेंगे जो दर वृद्धि के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, जिससे भविष्य के नीतिगत रुख का अंदाजा लगाया जा सके।
इसके साथ ही सरकारी उधारी की लागत को काबू में करने के लिए भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। वैश्विक बॉन्ड बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच बैंक ऑफ इंग्लैंड अपने बॉन्ड बिक्री कार्यक्रम में व्यापक बदलाव करने की योजना बना रहा है। बैंक ने 20 साल और 30 साल की परिपक्वता वाले दीर्घावधि बॉन्डों की बिक्री रोकने का फैसला किया है। लंबे समय वाले इन बॉन्डों की भारी बिक्री के कारण ब्रिटेन की उधारी लागत में अवांछित बढ़ोतरी हो रही थी, जिसे थामने के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।
यूरोपीय देशों में महंगाई की अलग-अलग दिशाएं
यूरोपीय क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी एक जैसी नहीं दिख रही है। फ्रांस में जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में नरमी दर्ज की गई, जिससे वहां मूल्य वृद्धि के दबाव कम होने के संकेत मिले हैं। इसके विपरीत, स्पेन में उपभोक्ता महंगाई दर में तेज उछाल देखा गया और यह पिछले तीन वर्षों में सालाना आधार पर अपनी सबसे तेज गति से बढ़ी है। यूरोप के अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों में जर्मनी का जेडईडब्ल्यू आर्थिक धारणा सूचकांक और जुलाई महीने के यूरो क्षेत्र के व्यापार संतुलन आंकड़े भी सामने आने हैं, जो पूरे महाद्वीप के आर्थिक स्वास्थ्य का दायरा तय करेंगे।
ब्रिटेन के आर्थिक संकेतकों को समझने के लिए बेरोजगारी दर और बेरोजगारी भत्ते के दावों का अंतर समझना महत्वपूर्ण है। बेरोजगारी दर ब्रिटिश श्रम बाजार का सबसे व्यापक संकेतक मानी जाती है। हालांकि यह महीना खत्म होने के करीब छह सप्ताह बाद देर से जारी होती है, फिर भी वित्तीय जगत से लेकर मुख्यधारा की मीडिया में इसका गहरा असर देखा जाता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, लेकिन बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के बीच गहरा विपरीत संबंध होता है। जब बेरोजगारी दर अनुमान से अधिक आती है, तो यह आम तौर पर ब्रिटिश पाउंड के लिए मंदी का संकेत मानी जाती है।
दूसरी ओर, बेरोजगारी भत्तों के लिए आवेदन करने वालों की संख्या श्रम बाजार की सबसे ताजी स्थिति को दर्शाने वाला शुरुआती पैमाना है। यह आंकड़ा महीने के मध्य में जारी होता है और पिछले महीने की स्थिति बताता है, जबकि मुख्य बेरोजगारी दर उससे भी पुराने महीने की होती है। बेरोजगारी दावों में वृद्धि को बिगड़ती आर्थिक स्थिति का संकेत माना जाता है, जिससे केंद्रीय बैंक पर मौद्रिक नीति नरम रखने का दबाव बनता है। वहीं दावों में कमी बेहतर होते आर्थिक हालात को दर्शाती है। दावों की संख्या जब भी उम्मीद से अधिक आती है, तो यह विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड की सेहत के लिए नकारात्मक साबित होती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और कमोडिटी का रुख
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में भी अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले सतर्कता बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी एशियाई सत्र में 0.7150 के स्तर से नीचे दबाव में रही, जो पिछले कारोबारी दिन दर्ज किए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब है। फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बने हुए हैं, जिसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुए मुद्रास्फीति जोखिमों से भी समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, अगस्त महीने के लिए जारी चीन के मिश्रित आर्थिक गतिविधियों के आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास दिशा देने में नाकाम रहे।
अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन में तेजी का रुख जारी रहा और यह जोड़ी शुरुआती सत्र में 155.00 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करती दिखी। व्यापारी इस सप्ताह फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों की बैठकों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर को दर वृद्धि की उम्मीदों और मजबूत बॉन्ड प्रतिफल का फायदा मिल रहा है, हालांकि बैंक ऑफ जापान की ओर से नीति सामान्यीकरण के आक्रामक रुख की संभावना येन को नीचे से सहारा दे सकती है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
कमोडिटी बाजार में सोने की चाल सुस्त नजर आ रही है। एशियाई सत्र में मामूली सुधार के बावजूद सोना पिछले कारोबारी दिन छुए गए एक महीने के निचले स्तर के करीब अटका रहा। यह पीली धातु 4,300 डॉलर के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करती दिखी, क्योंकि फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय नीतिगत बैठक शुरू होने से पहले अधिकांश कारोबारियों ने जोखिम लेने से बचते हुए किनारे रहना बेहतर समझा। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावनाओं ने सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बना रखा है।



















