अमेरिकी अर्थव्यवस्था की हालिया मजबूती, शेयर बाजारों की तेजी और डॉलर के प्रभुत्व को सहारा देने वाला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इंजन अब मुद्रा बाजार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर रहा है। वित्तीय रणनीतिकारों के अनुसार, AI से जुड़े भारी निवेश ने लंबे समय से अमेरिकी विकास दर, इक्विटी बाजारों और बॉन्ड यील्ड को अभूतपूर्व समर्थन दिया है। हालांकि, यदि इस क्षेत्र के विशाल पूंजी निवेश और फंडिंग मॉडल को लेकर संशय गहराता है, तो यह मजबूत ढांचा कमजोर पड़ सकता है। इसी डर और मौद्रिक नीति से जुड़े अनिश्चित संकेतों के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ बिकवाली का व्यापक रुझान देखने को मिला है।
AI बूम और डॉलर की निर्भरता का नया गणित
बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि AI क्षेत्र में हो रहे पूंजीगत खर्च ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचाया था। इस निवेश प्रवाह ने डॉलर को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आधार दिया। ओसीबीसी के रणनीतिकारों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग ने रेखांकित किया है कि AI से जुड़ी पूंजीगत व्यवस्था में आने वाली किसी भी तरह की अड़चन इन सभी सहायक कारकों को उलट सकती है। इससे वित्तीय बाजारों में रिस्क-ऑफ का माहौल बन सकता है, जहां ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आएगी और डॉलर कमजोर पड़ेगा।
मुद्रा बाजार के पारंपरिक नियमों से यह स्थिति काफी अलग नजर आती है। आमतौर पर जब दुनिया भर में अनिश्चितता या घबराहट का माहौल बनता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश मानकर अमेरिकी डॉलर की ओर भागते हैं। रणनीतिकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि वित्तीय तनाव का केंद्र स्वयं अमेरिका बनता है, तो ट्रेजरी बॉन्ड में सुरक्षित ठिकाने की मांग से यील्ड तो नीचे आ जाएगी, लेकिन अमेरिकी संपत्तियों से कमजोर रिटर्न डॉलर के आकर्षण को घटा देगा। इस तरह जोखिम से बचने के माहौल में भी डॉलर का कमजोर होना एक असामान्य घटनाक्रम पेश करता है। विश्लेषकों के अनुसार, AI के मामले में उपजी घबराहट व्यापक निवेश गाथा में एक रुकावट के बजाय केवल एक अस्थायी झटका अधिक लगती है, लेकिन यह घटनाक्रम विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक बड़ी चेतावनी जरूर है। उनका कहना है कि ऊपर जाते वक्त डॉलर को AI-संचालित लचीलेपन से जितना अधिक लाभ मिला है, वह सहारा छूटने पर मुद्रा उतनी ही अधिक जोखिम में आ जाएगी।
फेडरल रिजर्व के बयानों से बढ़ी बिकवाली
AI निवेश पर उठते सवालों के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख ने भी डॉलर की नरमी को हवा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के वक्तव्य ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं दिया। वार्श ने दोहराया कि वह मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में दरों के रास्ते पर कोई स्पष्ट खाका पेश नहीं किया। इस अनिर्णायक रुख से निवेशकों में डॉलर बेचने की होड़ बढ़ गई।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY, जो दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, टूटकर लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया। नीतिगत दर में बदलाव की स्पष्ट दिशा न मिलने और AI से जुड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों ने विदेशी मुद्रा कारोबारियों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
वैश्विक मुद्राओं और सोने में हलचल
डॉलर पर बने दबाव का सीधा असर शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र में प्रमुख मुद्रा जोड़ों और कीमती धातुओं पर दिखाई दिया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उल्लेखनीय तेजी आई और AUD/USD उछलकर 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ गया। अमेरिकी फेड प्रमुख के बयानों ने डॉलर पर बिकवाली के दबाव को मजबूत किया, जिसका सीधा फायदा ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मिला।
वहीं जापानी मुद्रा के मुकाबले भी डॉलर बैकफुट पर आ गया। शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ताजा बिकवाली के चलते USD/JPY फिसलकर 158.00 के अहम स्तर से नीचे आ गया। मौद्रिक सख्ती के भविष्य पर ठोस संकेत न होने से येन खरीदारों को मजबूती मिली। इसके साथ ही सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में लगातार दूसरे दिन खरीदार सक्रिय रहे। डॉलर के कमजोर पड़ने से सोने को समर्थन मिला, हालांकि यह धातु अभी भी अपने पिछले दो सप्ताह के तय दायरे में ही कारोबार कर रही है।


















