अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शानदार बढ़त देखने को मिली है, जहां भाव 4,190 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचकर 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव और ट्रेजरी यील्ड में आई नरमी ने बहुमूल्य धातुओं के खरीदारों को नया उत्साह दिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख को लेकर निवेशकों में बनी अनिश्चितता के बीच पीली धातु की मांग में तेज इजाफा दर्ज किया गया है।
फेडरल रिजर्व का रुख और मौद्रिक नीति पर सस्पेंस
बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मंच पर फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के संबोधन के बाद वित्तीय बाजारों में हलचल बढ़ गई। वॉर्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और मजबूती की सराहना की, साथ ही यह भी दोहराया कि केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को जिस बात का सबसे ज्यादा इंतजार था, उस पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला। वॉर्श ने निकट भविष्य में ब्याज दरों की दिशा अथवा मौद्रिक नीति के अगले कदमों को लेकर कोई ताजा मार्गदर्शन नहीं दिया।
इस अनिर्णायक स्थिति ने मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की धारणा को कमजोर कर दिया। ब्याज दरों में आगे की कटौती अथवा ठहराव को लेकर ठोस जानकारी न मिलने से डॉलर इंडेक्स फिसल गया, जिससे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता और आकर्षक बन गया। जब भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख स्पष्ट नहीं करता, तब गैर यील्ड वाली संपत्तियों जैसे सोने में पूंजी का प्रवाह स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
महंगाई के ताजा आंकड़े और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति
अमेरिकी आर्थिक मोर्चे पर जारी हालिया आंकड़ों ने वित्तीय समीकरणों को और उलझा दिया है। सितंबर महीने के लिए जारी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) के आंकड़े उम्मीद से अधिक तेज रहे। इससे ठीक एक दिन पहले आए कंज्यूमर इन्फ्लेशन डेटा में भी मुद्रास्फीति के अनुमान से अधिक रहने की पुष्टि हुई थी। थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर बढ़ती कीमतों के बावजूद, गुरुवार को जारी अमेरिकी खुदरा बिक्री के आंकड़ों ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई।
लगातार बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच उपभोक्ताओं का खर्च जारी रहना यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था में तरलता बनी हुई है, लेकिन साथ ही यह फेडरल रिजर्व के लिए दर कटौती के फैसले को काफी जटिल बना देता है। जब आर्थिक वृद्धि बनी रहती है और मुद्रास्फीति धीमी नहीं होती, तब बॉन्ड बाजार में अनिश्चितता जन्म लेती है। ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आने से निवेशकों ने सुरक्षा की तलाश में सोने की तरफ रुख किया, जिससे इसकी कीमतों को मजबूत सहारा मिला।
करेंसी बाजार में डॉलर पर दबाव और प्रमुख जोड़ियों का रुख
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार की अन्य प्रमुख मुद्राओं पर साफ देखा गया। फेडरल रिजर्व के प्रमुख के बयानों के बाद ग्रीनबैक पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिसका फायदा प्रतिस्पर्धी मुद्राओं को मिला। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में अच्छी रिकवरी देखी गई और यह जोड़ी 0.6950 के स्तर की ओर तेजी से अग्रसर हो गई। वॉर्श की मूल्य स्थिरता की प्रतिबद्धता के बावजूद दरों के रास्ते पर रहस्य बने रहने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में खरीदारी का माहौल बना।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) पर भी नए सिरे से बिकवाली हावी रही और यह मुद्रा जोड़ी एशियाई सत्र में 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई। विभिन्न प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) गिरकर लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में आई यह तेज गिरावट इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक पूंजी फिलहाल अमेरिकी मुद्रा से हटकर अन्य संपत्तियों में स्थानांतरित हो रही है, जिससे सोने को ऊपरी स्तरों पर टिकने में मदद मिल रही है।
तकनीकी विश्लेषण: चार्ट पर सोने की चाल और अहम स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने (XAU/USD) का रुख निकट अवधि में तेजी का बना हुआ है और यह 4,179 डॉलर के स्तर पर मजबूती से कारोबार कर रहा है। ताजा कारोबारी सत्र में यह धातु 4,187 डॉलर के आसपास पहुंच गई, जो पिछले बंद स्तर 4,170 डॉलर से 0.40 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। चार घंटे के चार्ट पर 14 अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) सकारात्मक दायरे में 57 के स्तर पर बना हुआ है, जबकि दैनिक चार्ट पर आरएसआई 44 के संतुलित स्तर पर है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) संकेतक का शून्य से ऊपर बने रहना यह संकेत देता है कि बाजार में लगातार तेजी का दबाव बना हुआ है।
सोने के लिए 4,200 डॉलर का स्तर पहला बड़ा मनोवैज्ञानिक अवरोध साबित हो सकता है। यदि कीमतें इस आंकड़े को सफलतापूर्वक पार कर लेती हैं, तो अगला बड़ा रेजिस्टेंस 4,230 डॉलर पर स्थित है, जो 2 अक्टूबर का उच्चतम स्तर रहा है और पिछले तीन हफ्तों के कंसोलिडेशन रेंज का ऊपरी दायरा भी है। विश्लेषकों का मानना है कि 4,230 डॉलर के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट तेजी के एक नए दौर की पुष्टि करेगा, जिसका अगला लक्ष्य 25 सितंबर को बना 4,315 डॉलर का उच्च स्तर होगा।
इसके विपरीत, यदि बाजार में मुनाफावसूली हावी होती है, तो नीचे की तरफ पहला समर्थन स्तर 4,150 डॉलर के इंट्राडे निचले स्तर पर है। इसके बाद रेंज का निचला स्तर 4,070 डॉलर पर महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम करेगा। यदि सोने की कीमतें 4,070 डॉलर के नीचे टूटती हैं, तो तेजी का परिदृश्य कमजोर पड़ जाएगा और बाजार में जुलाई के अंत तथा अगस्त की शुरुआत में बने 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी और वैश्विक भंडार
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद साधन के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। आभूषणों और इसकी चमक से परे, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। किसी भी संप्रभु सरकार या केंद्रीय प्राधिकरण के नियंत्रण से मुक्त होने के कारण यह मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ सबसे कारगर ढाल के रूप में काम करता है।
विश्व स्वर्ण परिषद के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसका कुल मूल्य लगभग 70 अरब डॉलर था। यह इतिहास में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद दर्ज की गई। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक, विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की, अपने विदेशी भंडार को डॉलर की निर्भरता से मुक्त करने के लिए निरंतर सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की आर्थिक संप्रभुता और वित्तीय साख के लिए भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
सुरक्षित निवेश, बॉन्ड प्रतिफल और बाजार का व्यापक गणित
सोने की कीमत का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ एक विपरीत संबंध होता है। जब भी डॉलर में गिरावट आती है या बॉन्ड यील्ड घटती है, सोने में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि सोने पर कोई ब्याज या नियमित लाभांश नहीं मिलता, इसलिए जब वित्तीय बाजारों में ब्याज दरें स्थिर या घटने की ओर होती हैं, तो सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत काफी घट जाती है।
इसके अलावा, जोखिम वाली संपत्तियों जैसे शेयर बाजार और सोने के बीच भी विपरीत रुझान देखा जाता है। इक्विटी बाजारों में जब तेज बिकवाली या वैश्विक मंदी की आशंकाएं गहराती हैं, तब निवेशक घबराकर जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में लगाने लगते हैं। भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति का बढ़ता दबाव और प्रमुख मुद्राओं में अस्थिरता वे प्राथमिक कारक हैं जो वर्तमान में सोने की मांग को लगातार मजबूती प्रदान कर रहे हैं। जब तक डॉलर की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक सोने में तेजी का रुख कायम रहने की उम्मीद है।




















