अमेरिकी मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। सितंबर 2026 की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी बैठक के जारी ब्योरे से स्पष्ट संकेत मिला है कि नीति निर्माता मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक सख्ती का रुख जारी रखने के पक्ष में हैं। बैठक में मौजूद सभी 19 सदस्यों ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए नीतिगत दर के दायरे को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत करने का एकमत से समर्थन किया था। जुलाई की पिछली बैठक में जहां अधिकारियों के बीच मतभेद नजर आए थे, वहीं इस बार पूरी समिति नीति को सख्त करने पर एकजुट दिखी। विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर में मध्यावधि चुनावों के चलते दरों में ठहराव रहेगा, लेकिन इसके बाद दो और दौर की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
सितंबर बैठक में आम सहमति और नीति निर्माताओं का रुख
सितंबर बैठक के ब्योरे से सामने आया है कि अमेरिकी नीति निर्माता अर्थव्यवस्था की मौजूदा गति को लेकर आश्वस्त हैं। समिति के सदस्यों ने माना कि महंगाई अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, श्रम बाजार अधिकतम रोजगार के स्तर के करीब है और आर्थिक गतिविधियां ठोस रफ्तार से विस्तार कर रही हैं। हालांकि दरें बढ़ाने के कारणों पर सदस्यों के अलग-अलग तर्क रहे। कुछ सदस्यों ने मुद्रास्फीति के जोखिमों से बचाव के रूप में इस बढ़ोतरी को जरूरी माना, जबकि कुछ अन्य सदस्यों ने अर्थव्यवस्था में मजबूत बुनियादी मांग को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। इसके बावजूद अधिकांश अधिकारियों का यही मानना था कि इस साल के अंत तक एक और ब्याज दर बढ़ोतरी पूरी तरह से उचित साबित हो सकती है।
अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना बेहद कम
बाजार के ताजा रुझानों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए अक्टूबर बैठक में ब्याज दरों में लगातार दूसरी बढ़ोतरी की उम्मीदें लगभग खारिज हो चुकी हैं। अक्टूबर में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक 3 नवंबर को निर्धारित मध्यावधि चुनावों से एक सप्ताह से भी कम समय पहले पड़ रही है। ऐसे संवेदनशील समय में नीति में अचानक बदलाव की संभावना बहुत क्षीण मानी जा रही है। ब्लूमबर्ग के डब्ल्यूआईआरपी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में दर वृद्धि की बाजार संभावना 8 अक्टूबर को गिरकर केवल 19.4 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़ा 5 अक्टूबर को 21.6 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जबकि 28 सितंबर को यही संभावना 70.3 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर आंकी जा रही थी। इस भारी गिरावट से स्पष्ट है कि बाजार अब अक्टूबर में नीतिगत ठहराव मानकर चल रहा है।
दिसंबर 2026 और 2027 की पहली तिमाही में बढ़ोतरी के आसार
यूओबी के एल्विन ल्यू के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी फेड फंड्स टारगेट रेट का ऊपरी दायरा 4.50 प्रतिशत पर जाकर चरम पर पहुंचेगा। उनका अनुमान है कि अक्टूबर के ठहराव के बाद नीतिगत दरों में दो और बढ़ोतरी की जाएंगी, जो दिसंबर 2026 और वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सामने आ सकती हैं। इसके बाद नीतिगत दरों को पूरे 2027 के दौरान इसी उच्च स्तर पर स्थिर रखा जाएगा। हालांकि, मुद्रास्फीति के मार्ग पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, नए व्यापार शुल्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े कारक मिलकर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे नीति को और अधिक कड़ा करने के जोखिम लगातार बने हुए हैं।
मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों की हलचल
एफओएमसी के सख्त ब्योरे और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों पर सीधा असर डाला है। मध्य पूर्व के संकट में तनाव लगातार बना हुआ है, जहां पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए सैन्य तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। इस बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी 0.6950 के ठीक ऊपर स्थिर रुख के साथ कारोबार करता दिखा, क्योंकि मजबूत डॉलर इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बनाए हुए है।
डॉलर के सामने येन और सोने की चाल
जापानी मुद्रा के मोर्चे पर, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र के दौरान 158.00 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को संभालने के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके साथ ही 18 महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंचे अमेरिकी डॉलर में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से भी इस मुद्रा जोड़ी में नरमी दर्ज की गई। वहीं कीमती धातुओं के बाजार में सोने की हालिया मामूली रिकवरी थम गई है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के दबाव में सोना दो महीने के निचले स्तरों के करीब बना हुआ है। एक्सएयू/यूएसडी यानी हाजिर सोना 4,143 डॉलर के इंट्राडे उच्च स्तर से गिरकर 4,119 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।



















