अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आगामी आंकड़ों से पहले 4,200 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं। मौजूदा कारोबारी सत्र में सोने का भाव 4,220 डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर के मुकाबले 1.52 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। हाल ही में दो महीने के निचले स्तर को छूने के बाद कीमती धातु में यह सुधार देखने को मिला है। हालांकि, बाजार के विश्लेषक इस पूरी रिकवरी को दो बिल्कुल अलग नजरिए से देख रहे हैं। एक तरफ जहां विश्लेषक इसे वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर के मुकाबले सोने के बड़े पुनर्मूल्यांकन और गोल्ड ईटीएफ में रिकॉर्ड खरीदारी के रूप में आंक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी विश्लेषक इसे बड़े डाउनट्रेंड के भीतर केवल एक सुधारात्मक उछाल मान रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों का संरचनात्मक दृष्टिकोण और मौद्रिक बदलाव
सोने के बाजार में लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा मूल्य स्तरों के नीचे एक गहरा संरचनात्मक बदलाव आकार ले रहा है। विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी अत्यधिक निर्भरता घटाते हुए अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। स्थिति यह बन चुकी है कि कई सुरक्षित भंडारों में सोना अब अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से भी आगे निकल चुका है। इसके साथ ही एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ निवेशकों ने हालिया गिरावट का फायदा उठाते हुए ऐतिहासिक स्तर पर खरीदारी दर्ज की है। इस वर्ग का स्पष्ट तर्क है कि जब केंद्रीय बैंक सोने का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हों और रिकॉर्ड ईटीएफ होल्डिंग्स दर्ज हो रही हों, तो यह केवल एक अल्पकालिक ट्रेडिंग तेजी नहीं बल्कि एक व्यापक मौद्रिक बदलाव का संकेत है।
तकनीकी संकेतक और चार्ट पर अड़चनें
इसके ठीक उलट, तकनीकी विश्लेषण के जानकारों का रुख अभी भी सतर्कता भरा है। उनका कहना है कि जब तक सोने की कीमत 4,259 डॉलर पर मौजूद 100-दिवसीय एसएमए के अहम स्तर को पार नहीं कर लेती, तब तक प्रत्येक उछाल को समग्र डाउनट्रेंड के भीतर एक सुधारात्मक रैली ही समझा जाना चाहिए। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो दैनिक आरएसआई 44 के स्तर पर बना हुआ है, जो मंदी के दबाव से पूरी तरह बाहर नहीं आया है। एमएसीडी सूचक -64.09 पर है जबकि इसका सिग्नल स्तर -57.96 पर है, जिसका हिस्टोग्राम -6.13 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। इसके अलावा 50-दिवसीय ईएमए 4,315 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,439 डॉलर पर मौजूद है, जहां डेथ क्रॉस की स्थिति तकनीकी दबाव को दर्शाती है। 20-दिवसीय ईएमए 4,256 डॉलर पर है, जबकि बॉलिंजर बैंड 4,074 डॉलर से 4,462 डॉलर के दायरे में फैले हैं। वर्तमान में 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 4,091 डॉलर और प्रतिरोध स्तर 4,440 डॉलर पर बना हुआ है।
मुद्रा बाजारों और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव
सोने में यह मजबूती अमेरिकी डॉलर के 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे फिसलने के साथ आई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने डॉलर पर दबाव बनाया है, जिससे सोने को संभलने का मौका मिला। वैश्विक मुद्रा बाजार में भी इसकी हलचल स्पष्ट रूप से दर्ज की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी जोड़ी ने शुक्रवार को एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ते हुए पिछले दिन के उछाल को आगे बढ़ाया, जिसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों से सहारा मिला। दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी 158.00 के करीब टिकी हुई है, क्योंकि जापान के घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन को कमजोर किया। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व की नीतियों के बीच डॉलर की कमजोरी ने इस जोड़ी की गिरावट को भी सीमित रखा है।
अमेरिकी सीपीआई और फेडरल रिजर्व का आगामी फैसला
आगामी सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी सीपीआई आंकड़े सोने की अगली दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यह महंगाई रिपोर्ट तय करेगी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बनी रहती है या नहीं। यदि महंगाई के आंकड़े सख्त नीति की आवश्यकता दर्शाते हैं, तो सोने की मौजूदा बढ़त सीमित रह सकती है। वर्तमान ट्रेडिंग रेंज में धुरी स्तर 4,203 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध आर1 4,250 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध आर2 4,281 डॉलर पर स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो पहला समर्थन स्तर एस1 4,173 डॉलर और दूसरा समर्थन स्तर एस2 4,126 डॉलर पर होगा, जबकि 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच फैला हुआ है। बाजार प्रतिभागी अब अमेरिकी उपभोक्ता धारणा और मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
























