चीन के विदेशी व्यापार और औद्योगिक परिदृश्य में सितंबर महीने के दौरान उल्लेखनीय तेजी दर्ज की जा रही है। वैश्विक बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की सतत मांग और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार के चलते चीन के निर्यात में सालाना आधार पर 25.7 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज होने का अनुमान लगाया गया है। कारखानों के स्तर पर गतिविधियों में इजाफा होने और आपूर्ति श्रृंखला के सक्रिय होने से अर्थव्यवस्था के बाहरी व्यापार को सीधा सहारा मिला है। इसके साथ ही बंदरगाहों पर माल की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला है, जिससे व्यापक व्यापारिक सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
विनिर्माण गतिविधियों में मजबूती और पीएमआई आंकड़े
औद्योगिक मोर्चे पर उत्पादन की गति में सुधार के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। आधिकारिक विनिर्माण पीएमआई और निजी क्षेत्र के काइशिन विनिर्माण पीएमआई, दोनों ही सितंबर के दौरान 50 अंक की विस्तार सीमा से ऊपर निकल गए हैं। अर्थशास्त्र में 50 से ऊपर का आंकड़ा विनिर्माण गतिविधियों में शुद्ध विस्तार और तेजी का परिचायक माना जाता है। इन सूचकांकों में आई तेजी यह दर्शाती है कि कारखानों में नए ऑर्डर और उत्पादन की गति तेज हुई है, जिससे अर्थव्यवस्था के उत्पादन तंत्र को स्थिरता मिली है।
बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में माल ढुलाई की रफ्तार
चीन के बाहरी व्यापार सूचकांकों में तेज रिकवरी के ठोस आंकड़े दर्ज किए गए हैं। देश के 20 प्रमुख बंदरगाहों पर संभाले जाने वाले दैनिक औसत डेडवेट टन भार की वृद्धि दर में भारी उछाल आया है। अगस्त महीने में जहां यह आंकड़ा सालाना आधार पर 0.7 प्रतिशत की गिरावट में था, वहीं सितंबर में यह सुधरकर 7.2 प्रतिशत की बढ़त पर पहुंच गया। इस बदलाव से स्पष्ट होता है कि समुद्री मार्गों से होने वाले आयात और निर्यात में तेजी से वृद्धि हुई है।
इसी प्रकार हवाई माल ढुलाई के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानों की संख्या में जहां अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, वहीं सितंबर की समान अवधि में यह आंकड़ा पलटकर 3.6 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने में सफल रहा। बंदरगाहों और हवाई मार्गों पर ढुलाई गतिविधियों का एक साथ संभलना यह पुष्ट करता है कि वैश्विक बाजारों तक चीनी सामान पहुंचाने की प्रक्रिया में तेजी आई है।
कच्चे माल की लागत और कारखाने के गेट पर कीमतें
कीमतों के मोर्चे पर कारखाने के गेट और कच्चे माल की लागत में ताजा उछाल आया है। भू-राजनीतिक तनावों के दोबारा गहराने के कारण वैश्विक स्तर पर लागत दबाव बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार मुख्य कच्चे माल की खरीद मूल्य उप-सूचकांक 56.6 से उछलकर 60.8 पर पहुंच गया। वहीं उत्पादक मूल्य उप-सूचकांक भी 50.4 से बढ़कर 54.0 दर्ज किया गया। इन दोनों संकेतकों में उछाल यह साबित करता है कि औद्योगिक उत्पादन से जुड़ी शुरुआती लागत में वृद्धि हुई है।
हालांकि उत्पादन स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद खुदरा स्तर पर इसका व्यापक असर सीमित रहने की संभावना है। मूल्य निर्धारण तंत्र की वजह से अंतिम उपभोक्ता कीमतों पर दबाव अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगा। परिणामस्वरूप उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर अगस्त के 0.8 प्रतिशत से मामूली बढ़कर सितंबर में सालाना 1.0 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, क्योंकि घरेलू मांग अभी भी अपेक्षाकृत सुस्त बनी हुई है।
विदेशी मुद्रा और बहुमूल्य धातुओं के बाजारों का हाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में विभिन्न मुद्राओं और संपत्तियों में भी हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले साप्ताहिक निचले स्तर से संभलकर 0.7000 के स्तर की ओर अग्रसर दिखा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रातों-रात आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे इस मुद्रा युग्म को संभलने का मौका मिला। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक से जुड़ी सख्त ब्याज दर नीतियों की उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया।
दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन का युग्म 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। जापान के घरेलू खर्च में शुक्रवार को लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज होने के आंकड़े सामने आए, जिससे जापानी येन पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच डॉलर की गिरावट को सीमित करती नजर आईं।
सोने के बाजार में शुरुआती तेजी के बाद गिरावट का रुख देखने को मिला। साप्ताहिक उच्च स्तर की ओर जाने के शुरुआती प्रयास के बाद शुक्रवार को पीली धातु दबाव में आ गई और प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई। विभिन्न अवधियों की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और अमेरिकी डॉलर की मजबूत तेजी ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा।



















