अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चाल और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो पर बिकवाली का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां व्यापक आर्थिक आंकड़ों के आधार पर विनिमय दर में 1.10 के स्तर तक फिसलने की आशंका जताई जा रही है। बाजार विश्लेषक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में अपनी सख्त मौद्रिक नीति को जारी रखेगा। यदि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े उम्मीद से अधिक मजबूत आते हैं और फेडरल रिजर्व अक्टूबर में दरें बढ़ाने के साथ आक्रामक रुख बनाए रखता है, तो EUR/USD जोड़ी में एक और तेज गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, यदि ब्याज दरों में अगला बदलाव केवल दिसंबर में होने की संभावना प्रबल रहती है, तो तत्काल बड़ी गिरावट सीमित रह सकती है।
कच्चे तेल की नरमी और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की चुनौतियां
वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी यूरो को खास राहत देती नहीं दिख रही है। वित्तीय बाजारों की धारणा यह संकेत दे रही है कि निवेशक फेडरल रिजर्व की तुलना में यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा मौद्रिक सख्ती वापस लेने या नीति को नरम करने की संभावना को ज्यादा तेजी से आंक रहे हैं। यदि ऊर्जा लागत घटने से यूरोप में मुद्रास्फीति का दबाव घटता है, तो ECB दरों में और बढ़ोतरी करने से हाथ खींच सकता है, जिसका सीधा असर साझा मुद्रा की मजबूती पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है। इस प्रकार नीतिगत दरों के अंतर के कारण डॉलर के मुकाबले यूरो का रुख कमजोर बना रह सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा दो महीने के निचले स्तर पर फिसली
एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को AUD/USD गिरकर 0.6950 के करीब आ गया, जो पिछले दो महीनों का इसका सबसे निचला स्तर है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर यह दबाव तब बना जब अगस्त के लिए ऑस्ट्रेलिया के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े अनुमान से कमजोर दर्ज किए गए। मुद्रास्फीति के इन ठंडे आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। इसके अतिरिक्त, चीन के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया। डॉलर की हालिया तेजी पर अस्थायी विराम लगने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा अपनी गिरावट की भरपाई करने में विफल रही।
येन में हस्तक्षेप का डर और डॉलर में गिरावट
बुधवार के एशियाई सत्र में USD/JPY 157.00 के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की संभावनाओं और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने जापानी येन को सहारा प्रदान किया। जापान के कमजोर घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़ों के बावजूद येन में मजबूती का रुझान देखा गया। वहीं, व्यापक बाजार में अमेरिकी डॉलर के थोड़ा पीछे हटने से भी USD/JPY जोड़ी में गिरावट को बढ़ावा मिला।
सोने के भाव दायरे में, अमेरिकी पीसीई महंगाई आंकड़ों का इंतजार
यूरोपीय कारोबारी सत्र की शुरुआत तक सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में कारोबार करती रहीं और भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस के निशान से नीचे बने रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को मंगलवार के दो महीने के उच्च स्तर से नीचे धकेल दिया, जिससे सोने को कुछ समर्थन मिला। इसके बावजूद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रवैये की आशंकाओं ने सोने की बढ़त को सीमित कर दिया। निवेशक गैर-उपज वाली इस पीली धातु पर नई दिशा तय करने से पहले अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस बुधवार को 12:30 GMT पर अगस्त के लिए पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े जारी करेगा। यह सूचकांक फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है, जिसके आधार पर आगामी ब्याज दर नीति तय की जा सकती है।
क्रिप्टो बाजार में एवे टोकन पर मुनाफावसूली
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में बुधवार को एवे (AAVE) का भाव फिसलकर 161 डॉलर से नीचे आ गया। इससे ठीक एक दिन पहले इस टोकन में 10 प्रतिशत से अधिक की जबर्दस्त उछाल दर्ज की गई थी। ऑन-चेन डेटा से पता चलता है कि ऊपरी स्तरों पर निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिसके चलते भाव में यह गिरावट आई। इस बीच, एवे के संस्थापक स्टानी कुलेचोव 'एवेनॉमिक्स 3.0' के तहत AAVE टोकन बर्न तंत्र लागू करने पर विचार कर रहे हैं। इस कदम को टोकन के लिए भविष्य में एक संभावित उत्प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है, जिससे इसकी आपूर्ति सीमित होने की उम्मीद है।



















