वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपने कई प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बढ़त दर्ज करने में सफल रहा, लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी चाल बेहद सुस्त और सीमित दायरे में सिमटी नजर आई। शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6948 के आसपास लगभग सपाट स्थिति में कारोबार करता दिखा। इस हफ्ते यह मुद्रा जोड़ी अपने दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर होने की कोशिश कर रही है, जहां एशियाई सत्र में इसका दायरा 0.6900 के मध्य स्तरों पर बना हुआ था। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर सहारा मिल रहा है, फिर भी अमेरिकी मुद्रा की चौतरफा मजबूती इसके बड़े उछाल की राह में बाधा बनी हुई है।
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के रुख और नीतिगत दरों की समीक्षा
बाजार के विश्लेषक और अर्थशास्त्री यह मान रहे हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) अब ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के सिलसिले को लंबा विराम देने की दिशा में बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने इस साल अपनी आधिकारिक नकद दर (ओसीआर) में चार बार 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी करते हुए इसे 4.6% तक पहुंचाया है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल रिसर्च के विश्लेषकों का मानना है कि 29 सितंबर की बैठक में आरबीए ने नकद दर को बढ़ाकर 4.60% करने का एकमत फैसला किया था। उनके अनुसार यह कदम काफी हद तक पहले से अपेक्षित था।
आरबीए के नीतिगत बयान में मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों का जिक्र जरूर किया गया था, लेकिन साथ ही देश में आर्थिक विकास दर के धीमे पड़ने, श्रम बाजार के दबावों के कम होने और आवासीय संपत्तियों की गिरती कीमतों को भी औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है और साफ कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में दरों में और इजाफा किया जा सकता है। इसके बावजूद आरबीए की गवर्नर बुलॉक के अपेक्षाकृत नरम रुख को देखते हुए वित्तीय विश्लेषक 4.6% के स्तर को इस मौजूदा चक्र की अंतिम दर बढ़ोतरी के रूप में आंक रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के व्यापार अधिशेष में भारी गिरावट
ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के बुनियादी आंकड़ों पर नजर डालें तो हालिया व्यापार संतुलन रिपोर्ट से काफी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा जारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया का ट्रेड सरप्लस तेजी से सिकुड़कर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (A$495M) पर आ गया। यह आंकड़ा पिछली रीडिंग के 1,351 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (A$1,351M) के अधिशेष से बेहद कम है। इतना ही नहीं, अगस्त के व्यापार अधिशेष को पहले दर्ज 1,923 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (A$1,923M) से नीचे संशोधित किया गया था। इस तीव्र गिरावट के बावजूद मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और संबंधित मुद्रा जोड़ी पर इसका प्रभाव तात्कालिक रूप से सीमित ही रहा।
मुद्राओं का तुलनात्मक प्रदर्शन और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े
वैश्विक करेंसी बास्केट में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का प्रदर्शन अलग-अलग मुद्राओं के मुकाबले मिश्रित रहा। जहां इसने जापानी येन के सामने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया और मजबूती दर्ज की, वहीं डॉलर इंडेक्स की स्थिरता के कारण डॉलर के खिलाफ यह संघर्ष करता दिखा। मुद्रा विनिमय दरों के हीट मैप से स्पष्ट होता है कि बेस करेंसी के तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अन्य प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले तो संभला हुआ है, पर कोट करेंसी के रूप में डॉलर इसे दबाए हुए है।
अमेरिकी डॉलर के मोर्चे पर निवेशकों का पूरा ध्यान अब 14:00 GMT पर जारी होने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के सितंबर महीने के ISM मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों पर टिका हुआ है। कारोबारी इस बात का आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं कि विनिर्माण क्षेत्र की वास्तविक स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में क्या संकेत दे रही है।
फेडरल रिजर्व की नीति और बॉन्ड यील्ड का गणित
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों को लेकर भी बाजार में उम्मीदों का पुनर्मूल्यांकन हुआ है। ट्रेडर्स ने फेड की अगली दर बढ़ोतरी के अनुमान को 28 अक्टूबर से खिसकाकर 9 दिसंबर कर दिया है। इस बदलाव की मुख्य वजह अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के साथ जारी सरकारी वार्षिक संशोधन रहा। इस संशोधन ने जुलाई के कोर पीसीई आंकड़ों को, जिसमें खाद्य और ऊर्जा की कीमतें शामिल नहीं होती हैं, 3.3% से घटाकर 3% कर दिया।
हल्के पीसीई आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड बढ़ोतरी के दांव को तो कुछ हद तक ठंडा किया, लेकिन कच्चे तेल के कारण उत्पन्न मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के पास ऊंचा बनाए रखा है। यही ऊंची यील्ड अमेरिकी डॉलर को निरंतर मजबूत बनाए हुए है, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बना हुआ है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का हाल
डॉलर के इस व्यापक दबदबे का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार के अन्य हिस्सों पर भी साफ नजर आ रहा है। USD/JPY मुद्रा जोड़ी गुरुवार को एशियाई सत्र में 158.00 के स्तर से ऊपर अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे पर जा बैठी। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) की ओर से सख्त नीतिगत संकेतों और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद व्यापक डॉलर शक्ति और अमेरिका-ईरान तनाव से पैदा हुई सुरक्षित निवेश की मांग ने येन को कमजोर रखा।
कमोडिटी बाजार में सोने ने पिछले दिन 4,220 डॉलर के स्तर से आई गिरावट के बाद एशियाई सत्र में 4,139 डॉलर के क्षेत्र के आसपास निचले स्तरों पर कुछ लिवाली आकर्षित की। अमेरिका के नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों से मिली राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई, क्योंकि ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बिना ब्याज देने वाली इस पीली धातु के किसी बड़े उछाल पर ढक्कन लगाए हुए है।
यूरोपीय मुद्रा EUR/USD गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क चुकी है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक गिर गई थी, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित जीवनदान दे सकता है। उधर डिजिटल एसेट स्पेस में हाइपरलिक्विड (HYPE) गुरुवार को 2% नीचे कारोबार कर रहा था, जिससे पिछले दिन की 5% की बढ़त घट गई। बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की पूंजी निकासी के साथ संस्थागत मांग कमजोर हुई है और इसका तकनीकी परिदृश्य 90 डॉलर के नीचे सीमित बना हुआ है।


















