वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में कनाडाई डॉलर ने हालिया गिरावट के बाद वापसी दर्ज की है, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मुद्रा जोड़ी अपने अप्रैल 2025 के बाद के उच्चतम स्तर से पीछे हट गई। कारोबारी सत्र के दौरान लूनी में देखी गई इस मजबूती की मुख्य वजह लंबी कमजोरी के बाद तकनीकी लिवाली और मुनाफावसूली रही। दूसरी ओर, अमेरिका में व्यावसायिक गतिविधियों के मिले-जुले आंकड़ों के सामने आने से अमेरिकी डॉलर की तेज बढ़त की रफ्तार कुछ धीमी पड़ती दिखाई दी। हालांकि मुद्रा बाजार में व्यापक बुनियादी कारक अब भी अमेरिकी डॉलर के पक्ष में झुके हुए हैं, जिससे यह सुधार फिलहाल तकनीकी दायरे में सीमित नजर आ रहा है।
बॉन्ड यील्ड का अंतर और ब्याज दरों का परिदृश्य
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में लगातार बनी तेजी अमेरिकी डॉलर को ठोस समर्थन दे रही है। पिछले सप्ताह कमजोर अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट आने के बाद निवेशकों ने चालू महीने में फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को भले ही कम किया हो, लेकिन व्यापक बाजार अब भी इस साल आगे चलकर उधार लेने की लागत में वृद्धि की संभावना देख रहा है। अमेरिका में मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और ऊर्जा की कीमतों से जुड़ा दबाव लगातार बना हुआ है।
कनाडा और अमेरिका के सरकारी ऋणपत्रों की यील्ड में एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। कनाडा के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3.99% के करीब दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी नोट की यील्ड लगभग 5.32% पर पहुंच गई। यील्ड का यह व्यापक अंतर अमेरिकी डॉलर के लिए लगातार आकर्षण बनाए हुए है, क्योंकि उच्च प्रतिफल वाले डॉलर बॉन्ड की मांग अधिक बनी हुई है।
कनाडा के आगामी रोजगार आंकड़े और नीतिगत जोखिम
मुद्रा बाजार के सहभागियों का ध्यान अब शुक्रवार को जारी होने वाले कनाडा के सितंबर श्रम बाजार सर्वेक्षण पर टिका है। आर्थिक अनुमानों के अनुसार, अगस्त में 41.7k नौकरियां गंवाने के बाद सितंबर में कनाडाई अर्थव्यवस्था में केवल 5.0k रोजगार जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही बेरोजगारी दर के 0.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 6.5% होने का अनुमान है, जबकि श्रम भागीदारी दर 65.0% पर स्थिर रहने की संभावना है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से श्रम मांग में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
ब्राउन ब्रदर्स हैरिमन के विश्लेषकों का मानना है कि बैंक ऑफ कनाडा (BOC) द्वारा अगले बारह महीनों में 100bps तक ब्याज दरें बढ़ाने की मौजूदा बाजार उम्मीदें आवश्यकता से अधिक आक्रामक हैं। कनाडा की मुख्य मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के करीब आ चुकी है और कई आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त आपूर्ति की स्थिति दर्शा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अत्यधिक सख्त मौद्रिक नीति का औचित्य सीमित दिखता है, और यदि बाजार अपनी ब्याज दर अपेक्षाओं में कटौती करता है तो कनाडाई डॉलर नीतिगत नरमी के कारण कमजोर पड़ सकता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल
वैश्विक मुद्रा तालिकाओं और हीटमैप के रुझानों से पता चलता है कि अमेरिकी डॉलर का प्रभाव आज प्रमुख मुद्राओं पर हावी रहा। न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दिया। सोमवार को देर एशियाई कारोबार में AUD/USD में बिकवाली दर्ज की गई और यह जोड़ी 0.6900 के स्तर की ओर फिसल गई। मध्य पूर्व तथा रूस और यूक्रेन के भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर की मजबूती ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भारी पड़ी। अब इस जोड़ी के लिए कच्चे तेल की कीमतें, बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नीतिगत संकेत महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
जापानी येन के मोर्चे पर, USD/JPY अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के स्तर पर वापस पहुंच गया और अपने एक सप्ताह पुराने दायरे में कारोबार करता रहा। भले ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना कमजोर हुई हो, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त रुख और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के चलते इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
सोने, क्रिप्टोकरेंसी और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की स्थिति
सोने के बाजार में सोमवार को शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद सीमित दायरे में बदलाव देखा गया। पीली धातु एक ओर फेड की संभावित ब्याज दर वृद्धि की घटती उम्मीदों और दूसरी ओर मजबूत अमेरिकी डॉलर तथा बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के निकट बनी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बीच फंसी हुई है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन सोमवार को 86,000 डॉलर से ऊपर सीमित दायरे में कंसोलिडेशन करता नजर आया। दूसरी ओर, ऑल्टकॉइन बाजार में तेजी का रुख रहा, जहां एथेरियम 2,700 डॉलर से ऊपर चढ़ा और रिपल 1.52 डॉलर से ऊपर स्थिर रहा। इस बीच, यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के सामने मुद्रास्फीति से निपटने की बड़ी चुनौती खड़ी है, जो उसके लक्ष्य से लगभग दोगुनी चल रही है। आम तौर पर ऐसी स्थिति में ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, लेकिन बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक रूप से वित्तीय परिस्थितियों को सख्त कर चुका है, जिससे केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत निर्णय लेना बेहद जटिल हो गया है।


















