सोमवार को शीर्ष अदालत में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति पर मुहर लग गई। केंद्र सरकार द्वारा इन नियुक्तियों को हरी झंडी दिए जाने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। हालिया विधायी संशोधनों के बाद अदालत में स्वीकृत कुल 38 पदों में से अब केवल एक पद रिक्त रह जाएगा।
नियुक्त किए गए न्यायाधीश और उनकी वर्तमान जिम्मेदारियां
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में इन नामों की पुष्टि की। इस अधिसूचना के अनुसार, गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह को प्रोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया है।
कॉलेजियम की सिफारिश और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इन तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों के नामों को आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस नवीनतम आदेश से पहले तक शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश सहित 34 जज अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन तीनों न्यायाधीशों के औपचारिक रूप से पद की शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद अदालत की कुल कार्यबल संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी।
स्वीकृत पदों की सीमा में हुआ था बदलाव
शीर्ष अदालत में स्वीकृत पदों की कुल क्षमता 38 है, जिसमें भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद भी सम्मिलित रहता है। सुप्रीम कोर्ट संशोधन अधिनियम, 2026 के लागू होने के पश्चात न्यायालय में न्यायाधीशों की अधिकतम स्वीकृत संख्या को 34 से संशोधित कर 38 निर्धारित किया गया था। इस विस्तार के चलते मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए आवश्यक न्यायिक पदों में बढ़ोतरी की गई थी।


















