राजस्थान के पूर्व विधायक बलजीत यादव को विधायक निधि में करीब 3 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ द्वारा सुनाया गया। इस न्यायिक आदेश के बाद वे करीब 9 महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आ रहे हैं।
मामला और वित्तीय अनियमितता के आरोप
पूर्व विधायक बलजीत यादव के खिलाफ विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA फंड) से जुड़े लगभग 3 करोड़ रुपये के दुरुपयोग और गबन का मामला दर्ज हुआ था। इसी वित्तीय अनियमितता के आरोपों के चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था। फरवरी 2026 में अदालत द्वारा उनकी गिरफ्तारी को वैध ठहराते हुए न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसके बाद से वे सलाखों के पीछे थे।
हाईकोर्ट में चली कानूनी लड़ाई
हिरासत में जाने के बाद बलजीत यादव ने रिहाई के लिए कई बार अदालत का रुख किया। इससे पहले जून 2026 में हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, उस समय वे करीब 5 महीने से जेल में थे। लगातार प्रयासों और कानूनी दलीलों के बाद अब जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उनकी याचिका मंजूर कर ली और जमानत पर रिहाई का निर्देश दिया।
हिरासत के दौरान जेल में विवाद
न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान भी पूर्व विधायक चर्चा में रहे थे। सितंबर 2026 में जयपुर सेंट्रल जेल में सघन जांच के दौरान उनके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ था, जिसके बाद कारागार प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर काफी विवाद खड़ा हुआ था। हालांकि, अब हाईकोर्ट द्वारा मुख्य गबन मामले में जमानत मंजूर किए जाने से उनकी जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।


















