वैश्विक मुद्रा बाजारों में इस हफ्ते होने वाली महत्वपूर्ण केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले अमेरिकी डॉलर के तेवर नरम पड़े हैं। ऊर्जा की कीमतों में हालिया करेक्शन और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों ने मौद्रिक नीति को लेकर बाजार के अनुमानों को नया मोड़ दिया है। इस हफ्ते फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की अहम नीतिगत घोषणाएं होनी हैं, जिन पर निवेशकों की पैनी नजर टिकी हुई है।
ऊर्जा कीमतों का असर और ब्याज दरों के अनुमान
ऊर्जा के दाम घटने से केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कुछ हद तक राहत मिली है। पिछले हफ्ते अमेरिकी दर बाजार में इस बात की संभावना काफी बढ़ गई थी कि बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ने पर फेडरल रिजर्व इसी हफ्ते ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकता है। शुक्रवार के आंकड़ों के अनुसार, इस हफ्ते होने वाली नीतिगत बैठक में लगभग 10 आधार अंकों की दर वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, सप्ताहांत के दौरान मध्य पूर्व से आए सकारात्मक कूटनीतिक संकेतों के बाद यह अनुमान घटकर करीब 8 आधार अंकों पर आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस हफ्ते फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को स्थिर रखे जाने की संभावना अधिक है, फिर भी पूरी तरह से दर वृद्धि की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है।
प्रमुख मुद्राओं में मजबूती और पाउंड-डॉलर की चाल
कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच प्रमुख मुद्रा जोड़ियों में तेजी का रुख देखा जा रहा है। पाउंड-डॉलर यानी जीबीपी/यूएसडी में पिछले हफ्ते के निचले स्तर से रिकवरी जारी है और नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में सोमवार को इसमें लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की गई है। यूरोपीय सत्र के दौरान यह प्रमुख जोड़ी 1.3350 के आसपास कारोबार कर रही है। मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव और डॉलर के कमजोर होने से खरीदारों को बल मिला है। व्यापारी अब सप्ताह के अंत में आने वाले फेड और बोए के नीतिगत बयानों का इंतजार कर रहे हैं ताकि बाजार की अगली दिशा तय हो सके।
यूरो में उछाल और भू-राजनीतिक स्थिति
दूसरी ओर, यूरो-डॉलर यानी यूरो/यूएसडी भी यूरोपीय सत्र में 1.3400 के स्तर के आसपास मजबूत बना हुआ है। इस इंट्राडे मजबूती के पीछे मुख्य वजह व्यापक रूप से कमजोर होता अमेरिकी डॉलर है। पिछले पांच महीनों से चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक समाधान की दिशा में बंधी नई उम्मीदों ने डॉलर पर दबाव बढ़ाया है, जिससे यूरो को महत्वपूर्ण सहारा मिला है।



















